


अवतार सिंह बिष्ट
अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद
अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा को झकझोर देने वाला ऐसा प्रश्न है, जिसने पूरे प्रदेश को व्यथित, आक्रोशित और चिंतित किया है। यह मामला अब किसी एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्याय, शासन, संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस हत्याकांड की सीबीआई जांच की संस्तुति एक महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कदम है। यह निर्णय उस जनदबाव, जनभावना और पीड़ा की स्वीकारोक्ति है, जो लंबे समय से उत्तराखंड के जनमानस में उबाल बनकर सामने आ रही थी। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद इस निर्णय को न्याय की दिशा में एक आवश्यक पहल मानती है।
इसी क्रम में, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल उत्तराखंड द्वारा 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड प्रदेश बंद को स्थगित करने का निर्णय तथा उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद द्वारा भी 11 जनवरी को होने वाले उत्तराखंड बंद को स्थगित किया जाना, यह दर्शाता है कि हमारा उद्देश्य अराजकता नहीं, बल्कि न्याय है। जब सरकार जनभावना को समझते हुए ठोस कदम उठाती है, तो समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वह सकारात्मक सहयोग करे।
हालांकि, परिषद यह स्पष्ट करना आवश्यक समझती है कि केवल सीबीआई जांच की घोषणा ही पर्याप्त नहीं है। जनता का भरोसा तभी बहाल होगा जब यह जांच किसी भी एजेंसी द्वारा हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। यह निगरानी न केवल जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी, बल्कि उन तमाम आशंकाओं पर भी विराम लगाएगी, जो समय-समय पर इस प्रकरण में उठती रही हैं।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद का यह मानना है कि अंकिता को न्याय दिलाना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य के नैतिक दायित्व की परीक्षा है। यदि इस मामले में कहीं भी प्रभाव, पद, पैसा या सत्ता न्याय के मार्ग में बाधा बनती है, तो यह देवभूमि की अवधारणा पर सीधा आघात होगा।
हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि बंद का स्थगन संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि संघर्ष के स्वरूप में परिवर्तन है। परिषद पूरे घटनाक्रम पर सतत निगरानी रखेगी। यदि जांच प्रक्रिया में शिथिलता, पक्षपात या लीपापोती का प्रयास किया गया, तो राज्य आंदोलनकारी, नागरिक समाज और उत्तराखंड का जनमानस पुनः सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगा।
अंकिता भंडारी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब दोषियों को कठोरतम सजा मिले और भविष्य में कोई भी बेटी सत्ता, व्यवस्था या रसूख की बलि न चढ़े। यही उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद की भावना है, यही हमारा संकल्प है।





