अटरिया मेला: श्रद्धा, परंपरा और सियासत के रंगों में रंगा रुद्रपुर

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रुद्रपुर, उत्तराखण्ड – शक्ति की प्रतीक माँ अटरिया के पावन स्थल पर आज से ऐतिहासिक अटरिया मेला विधिवत प्रारंभ हो गया। मेले का शुभारंभ रमपुरा स्थित अटरिया मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धूमधाम से पूजा-अर्चना कर किया गया। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की गूंज, रंग-बिरंगी आतिशबाजी और जयकारों के साथ माँ अटरिया का भव्य डोला शक्ति विहार कॉलोनी स्थित प्राचीन अटरिया मंदिर की ओर रवाना हुआ।

इस भव्य शोभायात्रा में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मीना शर्मा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल शर्मा, नगर निगम पार्षद रवि पाल, पूर्व पार्षद हरपाल सिंह, विजय गुप्ता, राजू गुप्ता, विटोला देवी, यादों देवी, सरोज रानी, किरण सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। श्रद्धा और आस्था से सराबोर इस आयोजन ने मेले की ऐतिहासिक गरिमा को पुनर्जीवित कर दिया।

भव्यता से सिमटते दायरे तक: मीना शर्मा का कटाक्ष

पूर्व पालिका अध्यक्ष मीना शर्मा ने अटरिया मेले के पुराने वैभव को याद करते हुए वर्तमान परिस्थितियों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “जब मैं नगर पालिका अध्यक्ष थी, तब यह मेला 10 एकड़ से भी ज्यादा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आयोजित होता था। लेकिन आज यह मेला एक एकड़ में सिमटकर रह गया है। जिस स्थान पर कभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक होती थी, वहां अब प्लाटिंग कर दी गई है।”

मीना शर्मा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण मेले की भव्यता मिट्टी में मिल गई है। उन्होंने अटरिया मेले को केवल परंपरा नहीं, बल्कि रुद्रपुर की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण की मांग की।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

माँ अटरिया की शक्ति: आस्था का केंद्र

अटरिया मंदिर, रुद्रपुर के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ मां अटरिया की पूजा से साधकों को विशेष शक्तियाँ और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मेले में दूर-दराज़ से श्रद्धालु पहुंचते हैं और माँ के दर्शन कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस वर्ष के मेले ने जहां श्रद्धा और परंपरा की लौ को प्रज्वलित किया, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है कि आने वाले समय में क्या इस मेले को उसका पुराना स्वरूप मिल पाएगा।



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