

रुद्रपुर उत्तराखंड में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। जहां एक ओर पहाड़ों में बादल डेरा डाले हुए हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों में धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया हुआ है।रुद्रपुर का मौसम इन दिनों बड़ा दिलचस्प बना हुआ है। आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच राजनीतिक तापमान भी चढ़ा हुआ नजर आ रहा है। एक ओर जहां मौसम विभाग हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जता रहा है, वहीं राजनीतिक मैदान में भी गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही। भारतीय जनता पार्टी का तापमान अपने चरम पर है, जबकि राजकुमार ठुकराल की सक्रियता मानो मूसलाधार बारिश बनकर बरस रही है। जनता इस बदले मौसम और सियासी हलचल को गहरी नजर से देख रही है, जहां हर बादल के साथ नई राजनीतिक गर्जना सुनाई दे रही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
देहरादून समेत आसपास के इलाकों में सुबह से ही धूप और बादलों की आंख-मिचौनी देखने को मिल रही है। बीच-बीच में घने बादल छाने से हल्की बारिश की संभावना बनी रही, जिससे उमस में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पहाड़ों में अलर्ट, मैदानी इलाकों में गर्मी
मौसम विभाग के अनुसार
उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार
आकाशीय बिजली और अंधड़ को लेकर येलो अलर्ट जारी
आने वाले दिनों में पहाड़ों में बारिश जारी रहने की संभावना
मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ सकता है
देहरादून का अधिकतम तापमान करीब 32°C दर्ज किया गया, जबकि ऊधमसिंह नगर में यह 33.8°C तक पहुंच गया।
️ प्रमुख शहरों का तापमान
देहरादून: 31.8°C / 17.6°C
ऊधमसिंह नगर: 33.8°C / 18.2°C
मुक्तेश्वर: 23.5°C / 10.2°C
नई टिहरी: 22.5°C / 9.2°C
मौसम के बीच चुनावी सरगर्मी तेज
मौसम की अनिश्चितता के बावजूद उत्तराखंड में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। पहाड़ हो या मैदान—हर जगह राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
प्रमुख क्षेत्रों का चुनावी अपडेट
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)
औद्योगिक नगरी रुद्रपुर में चुनावी रैलियों की भरमार है। बड़े नेताओं की सभाओं के साथ स्थानीय मुद्दे—बेरोजगारी और आवास—मुख्य केंद्र बने हुए हैं।
ऊधम सिंह नगर (किच्छा, बाजपुर, गदरपुर)
यहां ग्रामीण और शहरी वोट बैंक को साधने के लिए दलों के बीच कांटे की टक्कर है। किसान और प्रवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
नैनीताल
पर्यटन नगरी में विकास बनाम पर्यावरण बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। युवा मतदाता सोशल मीडिया के जरिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पिथौरागढ़
सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां राष्ट्रीय सुरक्षा, सड़क और स्वास्थ्य सेवाएं चुनावी बहस का केंद्र हैं।
काशीपुर
व्यापारिक केंद्र काशीपुर में व्यापारी वर्ग और उद्योग से जुड़े मुद्दे हावी हैं। यहां मुकाबला रोचक बना हुआ है।
अल्मोड़ा
सांस्कृतिक नगरी में पलायन और रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं। स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार की बहस भी तेज है।
चंपावत
मुख्यमंत्री के प्रभाव वाला क्षेत्र होने के कारण यहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और विकास कार्यों को प्रमुखता से गिनाया जा रहा है।
लोहाघाट
छोटा लेकिन रणनीतिक क्षेत्र—यहां स्थानीय नेतृत्व और जनसंपर्क चुनाव का रुख तय कर रहा है।
बागेश्वर
हालिया उपचुनाव के बाद भी यहां राजनीतिक सक्रियता बनी हुई है। जनता विकास कार्यों की समीक्षा के मूड में है।
उत्तराखंड इस समय दो मोर्चों पर खड़ा है—
एक तरफ मौसम की अनिश्चितता, दूसरी तरफ चुनावी गर्मी।
पहाड़ों में गरजते बादल और मैदानों में बढ़ती गर्मी के बीच जनता अब अपने फैसले की तैयारी में जुट चुकी है।
उत्तराखंड का बदलता मौसम और सियासी तापमान: कहीं गरज, कहीं बूंदाबांदी”
उत्तराखंड में मार्च के आखिरी दिन मौसम ने जैसे पूरी राजनीतिक तस्वीर , जहां पहाड़ों में तेज गर्जना और बारिश का दौर जारी है, वहीं सियासी गलियारों में भी उतार-चढ़ाव साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में जहां-जहां जोरदार वर्षा हो रही है, वहां कांग्रेस की सक्रियता बढ़ती दिख रही है, मानो Rajkumar Thukral की सियासी बारिश पूरे प्रदेश में फैल रही हो।
वहीं दूसरी ओर जहां तापमान बढ़ा हुआ है और मौसम शुष्क बना हुआ है, वहां भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव कायम नजर आता है, जिसका नेतृत्व Pushkar Singh Dhami कर रहे हैं।
हल्की-हल्की बूंदाबांदी वाले इलाकों में Meena Sharma की मौजूदगी महसूस की जा रही है, तो जहां रिमझिम बारिश हो रही है वहां Harish Rawat का सियासी असर झलक रहा है।
आने वाले समय में तेज आंधी की संभावना भी जताई जा रही है, जिसे Tilak Raj Behar की राजनीतिक सक्रियता से जोड़ा जा रहा है।
अगर बात करें रुद्रपुर की, तो यहां मौसम फिलहाल शुष्क है, लेकिन सियासत में गरज जरूर सुनाई दे रही है। यहां गर्जना के साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं Shiv Arora और महापौर Vikas Sharma, जिनकी मौजूदगी राजनीतिक माहौल को गरम बनाए हुए है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड का मौसम सिर्फ बादलों और बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति का आईना भी बन चुका है—जहां हर बूंद, हर धूप और हर गर्जना किसी न किसी सियासी हलचल का संकेत दे रही है।




