संपादकीय | रुद्रपुर की सियासत में ‘चाणक्य’ की वापसी?राजकुमार ठुकराल की रहस्यमयी चाल और आने वाला राजनीतिक भूचाल

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रुद्रपुर की राजनीति इन दिनों केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि संकेतों, खामोशी और रहस्यों से संचालित हो रही है। कांग्रेस नेत्री मीना शर्मा के सोशल मीडिया बयानों से उपजे सियासी संदेश हों या पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को लेकर तेज होती अटकलें—हर कदम मानो किसी अदृश्य शतरंज की बिसात पर रखा जा रहा हो।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


मीना शर्मा का यह कहना कि वह पार्टी हाईकमान के हर फैसले का सम्मान करेंगी, अपने आप में साधारण बयान नहीं है। यह बयान विरोध से अधिक स्वीकृति की भाषा में पढ़ा जा रहा है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह खुला समर्थन नहीं, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे बनी सहमति का सार्वजनिक संकेत जरूर है।
इसी बीच, जिस नाम ने पूरी सियासत को बेचैन कर रखा है—राजकुमार ठुकराल। सवाल यह नहीं है कि वे कांग्रेस में जाएंगे या नहीं, सवाल यह है कि वे क्या लेकर जा रहे हैं और किस कीमत पर। ठुकराल अब पहले वाले ठुकराल नहीं रहे। न भाषणों की जल्दबाज़ी, न विरोध की तीव्रता—बल्कि ठहराव, संयम और रणनीतिक मौन। यह मौन सामान्य नहीं, यह चाणक्य की नीति का परिचायक है।
सूत्रों की मानें तो ठुकराल के पास ऐसा राजनीतिक ऑफर है, ऐसा फार्मूला है, जिसे सुनकर न सिर्फ कांग्रेस बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी खलबली मची हुई है। शतरंज की गोटियों को जैसे मंत्र देकर आगे बढ़ाया जा रहा हो—हर चाल सोच-समझकर, हर कदम भविष्य की जमीन तैयार करता हुआ।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस पूरी रणनीति की पूरी तस्वीर अभी किसी के सामने नहीं है। यह खबर फिलहाल या तो पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के पास है, या फिर हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के मुख्य संपादक अवतार सिंह बिष्ट के पास। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में बेचैनी है, और मीडिया व जनता की नजरें लगातार हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स पर टिकी हैं।
आने वाले दो से तीन महीने बेहद निर्णायक होंगे। तब तक इंतजार करना पड़ेगा—क्योंकि जो पक रहा है, वह सामान्य सियासी समझ से कहीं आगे है। यह केवल दल-बदल की कहानी नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन को उलट देने वाली रणनीति हो सकती है।
एक बात तय है—
राजकुमार ठुकराल अब भीड़ की राजनीति नहीं कर रहे, वे भूख जमा रहे हैं। कदम रहस्य में हैं, योजना गुप्त है और खेल बड़ा। जब पर्दा उठेगा, तब कई चेहरे हैरान होंगे, कई गणित ध्वस्त होंगे और उत्तराखंड की राजनीति एक नई दिशा में मुड़ती दिखाई देगी।
फिलहाल—
इंतजार कीजिए।
क्योंकि चाणक्य बोलने से पहले शतरंज सिखाते हैं।


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