


यह काम पहली जून से प्रस्तावित है। इसके लिए टीएचडीसी प्रबंधन ने केंद्र सरकार से टिहरी बांध से पानी न छोड़े जाने की अनुमति मांगी है। हालांकि अभी अनुमति मिली नहीं है।


टिहरी बांध की क्षमता 2400 मेगावाट है। इसमें से एक हजार मेगावाट का टिहरी बांध, चार सौ मेगावाट का कोटेश्वर बांध संचालित हैं। इन दिनों एक हजार मेगावाट के पंप स्टारेज प्लांट का काम चल रहा है। अब इसका अंतिम चरण का काम किया जाना है। इधर, टिहरी बांध झील से पानी न छोड़े जाने की अनुमति मिलने पर भागीरथी नदी में भी जलस्तर काफी कम हो जाएगा। हालांकि टीएचडीसी प्रबंधन का कहना है कि इस दौरान एक अन्य सुरंग से सिर्फ पांच क्यूमेक्स पानी भागीरथी नदी में छोड़ा जाएगा जिससे गंगा की अविरल धारा बनी रहे।
पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
टिहरी बांध झील से भागीरथी नदी में पानी न छोड़े जाने की स्थिति में जून में नई टिहरी में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। जल संस्थान भागीरथी नदी से पानी लिफ्ट कर नई टिहरी में सप्लाई करता है। ऐसे में नदी का जलस्तर कम होने पर पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हालांकि जल संस्थान का दावा है कि पेयजल संकट नहीं होगा। पानी को गहराई से लिफ्ट किया जाएगा और इसकी आपूर्ति सीमित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से भी पानी पहुंचाया जाएगा।
पीएसपी के अंतिम चरण का काम होना है। टिहरी बांध झील से 45 दिन तक पानी नहीं छोड़ने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने पर पहली जून से पानी छोड़ना बंद कर दिया जाएगा। इस दौरान बिजली उत्पादन भी बंद रहेगा।
-एलपी जोशी, अधिशासी निदेशक, टीएचडीसी, भागीरथीपुरम कांप्लैक्स टिहरी गढ़वाल
