Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht

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नगला जवाहर नगर का द्वंद,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स,नगला क्षेत्र में रहते हैं द्वितीय विश्व युद्ध के जांबाज , 1962, 1965, 1971, कारगिल युद्ध में दिखा चुके हैं अपना जौहर। 1कर्नल, 1एनडीए क्वालिफाइड कैप्टन, 1जल सेना में कैप्टन, एक दर्जन के करीब पूर्व फौजी, आधा दर्जन राज्य आंदोलनकारी जिन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज सरकार के द्वारा भेदखली की कार्रवाई से आहत है। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट एवं प्रदेश के समस्त राज्य आंदोलनकारी का आह्वान किया है। नगला क्षेत्र को बचाने के लिए नगला क्षेत्र को बसाने के लिए सभी से सहयोग की अपील की है। 1962 से निवास कर रहे हैं नगला वासी जनहित याचिका के फैसले से काफी आहत हैं। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की पड़ताल से जी जो बात निकाल कर सामने आई है। नगला व पंतनगर के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के अथक प्रयासों द्वारा नगर पालिका बनाए जाने हेतु शासन प्रशासन से प्रस्ताव पास किया गया। नगला से लगा हुआ ग्रामीण क्षेत्र जवाहर नगर जिसमें 52 परिवार स्वतंत्रता सेनानी है। जवाहर नगर को नगर पालिका में शामिल करने से अफवाह फैलाई गई हमें सरकार को टैक्स देना होगा। जबकि वास्तविकता में जवाहर नगर के लगभग 50% भूभाग पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर लोगों को बेच दी गई है। बिना 143 के और सरकार की गाइड लाइनों का खुला उल्लंघन करते हुए, नौकरशाहों की मिली भगत से, रेरा कोर्ट के नियमों का खुला सरकारी उल्लंघन जवाहर नगर में देखने को मिलता है।जवाहर नगर की रजिस्ट्री में भी देहरादून की तरह भ्रष्टाचार का खेल खेला गया ,जिससे सरकार को करोड़ों रुपए की राजस्व की क्षति हुई है।जांच का विषय है। पानी ,नाली व कूड़ा निस्तारण की कोई सुविधा वहां पर उपलब्ध नहीं है। जवाहर नगर की 50% जनता जिन्होंने अपने आशियाने के लिए ऊंचे दामों पर जमीन खरीद कर अपना ठिकाना बनाया । आज छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर अपने को ठगा हुआ महसूस करते है। जवाहर नगर से रेलवे लाइन निकलती है उस रेलवे लाइन पर जवाहर नगर में निवासी कूड़ा करकट डालते हैं। जिससे महामारी का भय भी लोगों में बना रहता है। दूसरी ओर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार प्रॉपर्टी डीलरों को ऊंचे दामों पर जमीन बेचकर इति श्री कर लेते हैं। वहां निवास कर रहे लोग जिन्हें मौखिक रूप से ऊंचे सब्ज बाग दिखाए गए। जवाहर नगर निवासी अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं/ ।पानी की निकासी की कोई भी व्यवस्था जवाहर नगर में नहीं है। सड़क जर्जर हालत मैं है। पूंजी पतियों के द्वारा अपने को नगर पालिका में शामिल नहीं करवाने हेतु नगला के खिलाफ जनहित याचिका दूसरे पक्ष से डलवा दी गई। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद सरकार से मांग की है नगला क्षेत्र को बचाया जाए या फिर उन्हें कहीं विस्थापित किया, जवाहर नगर क्षेत्र को लोगों की मूलभूत सुविधा हेतु नगर पालिका में शामिल किया जाए। जिससे जवाहर नगर वासियों का जिन्होंने अपने आशियाने बनाए हैं। उन्हें उचित पानी की निकासी की व्यवस्था, लाइट, रोड का रखरखाव अन्य सुविधाएं जो नगर पालिका द्वारा मिलती हैं उन्हें मिल सके ।प्रॉपर्टी डीलरों के द्वारा जवाहर नगर की मुख्य सड़क को बेच दिया गया। वही जवाहर नगर की निकासी पानी की गुल को प्लाटिंग कर दी गई। निकासी की उचित व्यवस्था न होने पर जल भराव से प्रत्येक वर्ष लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं या फिर मौत के आगोश में चले जाते हैं।


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