रुद्रपुर की राजनीति में स्वार्थ की आंधी, गरीबों के घर उजाड़ अमीरों के महल तैयार!

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रुद्रपुर: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों स्वार्थ और सत्ता का खेल चरम पर है। जनप्रतिनिधि, जिन्हें जनता की भलाई के लिए काम करना चाहिए, अब बिल्डरों के इशारों पर नाचते नजर आ रहे हैं। गरीबों की झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, जबकि रोडवेज के सामने आलीशान मॉल का निर्माण बिना किसी रुकावट के जारी है। सवाल यह उठता है कि क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही बना है?

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

पैसों के आगे घुटने टेकती राजनीति

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डरों ने जनप्रतिनिधियों की जेबें भर दी हैं, जिसके कारण वे अब जनता की आवाज सुनने के बजाय खामोश तमाशबीन बने बैठे हैं। प्रशासन भी आंखें मूंदे हुए है, मानो सबकुछ पहले से तय हो। जिन गरीबों का रोजगार और घर उजड़ने वाले हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।

जनता के वोट से सत्ता में, 5 साल में 100 गुना अमीरी!

हर चुनाव में सेवा का वादा करने वाले जनप्रतिनिधि जब सत्ता में आते हैं, तो 5 साल में 100 गुना आर्थिक विस्तार कर लेते हैं। छोटे नेता, बड़े बिल्डर बन जाते हैं। कभी सड़क पर आम आदमी की तरह घूमने वाले जनसेवक अब महंगी गाड़ियों में चलते हैं, आलीशान बंगलों में रहते हैं और करोड़ों के मालिक बन जाते हैं

उत्तराखंड सरकार की चुप्पी, किसके लिए?

बड़ा सवाल यह भी है कि उत्तराखंड सरकार इस मामले पर क्यों चुप है? क्या सरकार की मौन स्वीकृति इस लूट-खसोट का समर्थन कर रही है? या फिर गरीबों के आशियाने उजाड़ने की साजिश सरकार की ही शह पर हो रही है?

रुद्रपुर के लोग अब इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। जनता सवाल पूछ रही है—“क्या सरकार सिर्फ अमीरों की, बिल्डरों की, पैसे वालों की है?” गरीबों की झोपड़ी तोड़ने वालों को मॉल और हाई-राइज़ बनाने की इजाजत कौन दे रहा है?

अब फैसला जनता को करना है!

आने वाले चुनावों में जनता को यह सोचना होगा कि वे किसे वोट दे रहे हैं—एक ऐसे नेता को, जो 5 साल में अरबपति बन जाता है, या एक ऐसे जनसेवक को, जो सच में उनकी भलाई के लिए काम करता है? अगर अब भी जनता चुप रही, तो कल शायद उनके अपने घर और रोजगार भी इस बुलडोजर की चपेट में आ जाएं।


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