ऊत्तराखंड के निर्माण के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देने वाले राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को आरक्षण का हक दोबारा पाने में 11 साल लग गए। वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने आरक्षण देने की शुरूआत तो की थी, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आती ही रही।

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वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में आरक्षण के खिलाफ केस दायर होने की वजह से आरक्षण की सुविधा पर रोक लग गई थी। तब से राज्य आंदोलनकारी आरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे थे।वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर आरक्षण विधेयक पारित कर राजभवन भेजा था।

लेकिन न्यायिक पेच की वजह से राजभवन उस पर निर्णय लेने से हिचकता रहा। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहल करते हुए राजभवन से अनुरोध कर वर्षों से लटके इस विधेयक को वापस मंगवाया और दोबारा से विधानसभा में विधेयक को पारित कर प्रक्रिया शुरू की।

राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती ने कहा कि अब जल्द नोटिफिशन और जीओ जारी किया जाना चाहिए। भाजपा नेता रविंद्र जुगरान का कहना है कि विधेयक का मंजूर होना, राज्य आंदोलन के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है।

हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर

आंदोलनकारी आरक्षण पर कब-क्या हुआ

-11 अगस्त, 2004 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार ने आरक्षण को किए थे दो जीओ जारी

-पहला, सात दिन से ज्यादा जेल रहने वाले अथवा घायलों को सीधी नौकरी, दूसरा, सात दिन से कम जेल में रहने वाले अथवा चिन्हित आंदोलनकारियों को 10 फीसदी आरक्षण

-12 अगस्त, 2009 में निशंक सरकार ने आंदोलनकारियों को पेंशन की सुविधा दी

-19 अप्रैल, 2012 में बीसी खंडूड़ी सरकार में आश्रितों को भी मिला था आरक्षण का लाभ

-26 अगस्त, 2013 को हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दायर होने के बाद आरक्षण पर रोक

-दिसंबर, 2015 में तत्कालीन कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने विधेयक पेश कर भेजा था राजभवन

-07 मार्च, 2018 को हाईकोर्ट ने आरक्षण का जीओ, नोटिफिकेशन व सर्कुलर तीनों किए खारिज

-सितंबर 2022 में धामी सरकार ने राजभवन से विधेयक वापस मंगाया

-20 दिसंबर, 22 को कैबिनेट बैठक में सब कमेटी गठित की

-08 सितंबर 2023 में सदन के पटल पर रखने के साथ ही प्रवर समिति को सौंपा था विधेयक

-06 फरवरी, 2024 को प्रवर समिति की संस्तुति के बाद संशोधित विधेयक पटल पर रखा

-07 फरवरी, 2024 को संशोधित विधेयक विधानसभा से दोबारा पारित किया गया, राजभवन भेजा

-18 अगस्त 2024 को विधेयक को राजभवन से मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ देने का संकल्प लिया गया था। अपने इस संकल्प को सीएम धामी ने पूरा किया। आंदोलनकारी दिल की गहराइयों से सीएम धामी का आभार व्यक्त करते हैं।

अशोक वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग

यह सभी राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष का परिणाम है। इस अधिनियम पर हस्ताक्षर होने से 10 हजार राज्य आंदोलनकारी परिवारों को लाभ मिलेगा। ये राज्य आंदोलन के शहीदों का सही मायनों में सम्मान है।

जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश अध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी मंच

10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिए जाने से जुड़े विधेयक का मंजूर होना, सभी राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष का परिणाम हैं। सरकार से यही उम्मीद है कि अब जल्द सभी सरकारी भर्तियों में आरक्षण का लाभ देते हुए आदेश जारी किए जाएं।

केशव उनियाल, राज्य आंदोलनकारी

प्रेमचंद ने राज्यपाल और सीएम का जताया आभार

वित्त मंत्री मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण वाले प्रस्ताव को राजभवन की मंजूरी मिलने पर राज्यपाल और सीएम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं राज्य आंदोलनकारी रहे हैं। वह उनकी पीड़ा और त्याग को समझते हैं।

आरक्षण को मंजूरी सम्मान की बात भट्ट

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को 10 फीसदी आरक्षण पर राजभवन की मंजूरी सवा करोड़ देवभूमि वासियों की भावना का सम्मान है। मीडिया को जारी बयान में भट्ट ने कहा कि सीएम धामी ने राज्य की जनता से किया एक और वादा पूरा कर लिया है।


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