अंबेडकर पार्क, रुद्रपुर में गूंजा “जय पहाड़, जय पहाड़ी” — क्या 2027 से पहले बदलेगा सियासी समीकरण?

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अंबेडकर पार्क, रुद्रपुर में उत्तराखंड क्रांति दल के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 2027 बदलाव का वर्ष होगा। उन्होंने जय पहाड़ जय पहाड़, के उद्घोष के साथ जल–जंगल–जमीन, स्थानीय रोजगार और पहाड़ की अस्मिता की रक्षा को प्राथमिकता बताया। नेगी ने युवाओं से संगठित होकर क्षेत्रीय ताकत मजबूत करने का आह्वान किया और कहा—“अब समय है, युवा आगे बढ़ें, उत्तराखंड खुद निर्णय


रुद्रपुर के अंबेडकर पार्क में रविवार को क्षेत्रीय राजनीति ने एक नई करवट ली। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के बैनर तले आयोजित सभा में “जय पहाड़, जय पहाड़ी” के नारों ने माहौल को पूरी तरह पहाड़ी अस्मिता के रंग में रंग दिया। मंच से बार-बार यह संदेश दिया गया कि राज्य आंदोलन की मूल भावना को फिर से जीवित करने का समय आ गया है।
सभा में वक्ताओं ने दो टूक कहा—“भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी से सत्ता संभाली, लेकिन पहाड़ का दर्द जस का तस है।” यूकेडी नेताओं का दावा रहा कि उत्तराखंड राज्य की नींव क्षेत्रीय संघर्ष ने रखी थी, और अब उसी विचारधारा को फिर से मजबूत करने की जरूरत है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

अंबेडकर पार्क में उमड़ा जनसैलाब, आशीष नेगी के भाषण ने भरी नई ऊर्जा
रुद्रपुर। अंबेडकर पार्क में Uttarakhand Kranti Dal के युवा नेता आशीष नेगी को सुनने के लिए युवाओं और महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। दुकानदारों ,टुकटुक और रिक्शा चालकों ने भी वाहन रोककर उनके विचार सुने। नेगी ने कहा कि राज्य आंदोलन के अधूरे सपनों को अब युवा पूरा करेंगे। लंबे समय बाद रुद्रपुर में उक्रांद की प्रभावी मौजूदगी दिखी। कई छात्र नेताओं ने सदस्यता ली। हालांकि सीमित प्रचार के कारण ज्यादा संख्या में स्थानीय लोग नहीं पहुंच पाए, जिसको लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली,लोग आशीष नेगी को सुनना चाहते थे, देखना चाहते थे।


बड़ा सवाल: क्या होगा राजनीतिक उलटफेर?
हाल के दिनों में पूरे उत्तराखंड से राजनीतिक धुरंधर युवाओं के ’ द्वारा यूकेडी की सदस्यता ग्रहण करने की चर्चा ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय चेहरों का यूकेडी की ओर झुकाव बढ़ता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नए समीकरण बन सकते हैं।
इसी संदर्भ में एक और नाम चर्चा में है—काशी सिंह  एरी सवाल उठ रहा है कि क्या वे यूकेडी से मुख्यमंत्री का चेहरा बन सकते हैं? हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच इस संभावना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
पहाड़, पलायन और पहचान का मुद्दा
रुद्रपुर अंबेडकर पार्क की सभा में रोजगार, पलायन, स्थानीय युवाओं के अधिकार, भू-कानून और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि “जो मंच से ‘बेटी बचाओ’ की बात करते हैं, जब उन्हीं के नाम फाइलों में सामने आते हैं, तब सच्चाई सबसे ज्यादा चुभती है।” यह बयान स्पष्ट संकेत था कि यूकेडी आने वाले समय में नैतिकता और पारदर्शिता के मुद्दे को भी चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाने जा रही है।

आशीष नेगी केंद्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड क्रांति युवा प्रकोष्ठ मिशन 2027 की आत्मा  सत्ता परिवर्तन की आहट के रूप में देखा जारहा है,उत्तराखंड की असली लड़ाई—जल, जंगल, जमीन की हिफाज़त थी। स्थायी राजधानी का सवाल आज भी अधूरा है। स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाल व्यवस्था पहाड़ से पलायन बढ़ा रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड ने वीआईपी कल्चर की क्रूर सच्चाई उजागर की। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा अब भी इंतज़ार में है। राज्य आंदोलन की मूल भावना पारदर्शिता और जवाबदेही थी। अब समय है कि सरकार केवल सुनने का दावा न करे, बल्कि हर वर्ग की पीड़ा को स्वीकार कर ठोस निर्णय ले—तभी मिशन 2017 की कसौटी पर खरी


कार्यकर्ताओं ने कहा कि 2027 को लक्ष्य बनाकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा। “यह कारवां अब रुकने वाला नहीं है,” मंच से घोषणा की गई।
युवा शक्ति पर विशेष फोकस
। रुद्रपुर में भी बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि यूकेडी जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ा रही है।
अंबेडकर पार्क में उपस्थित प्रमुख कार्यकर्ता
रुद्रपुर के अंबेडकर पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुशील उनियाल, राजेंद्र प्रसाद जोशी संरक्षक,DS रावत,कुलदीप रावत, आनंद सिंह असगोला , पूनम राणा, प्रताप सिंह  चौहान जिला अध्यक्ष नैनीताल, दीपक ढ़ोडियाल,कांति भागुणी, इंदु बोरा,भुवन  बिष्ट, तारा देवी, बबीता बोरा, लक्ष्मी विश्वना देवी, देवकी देवी, जानकी जोशी, रेनू मेहरा, पुष्पा परिहार, मंजू पनेरु, चैता रावत, पूजा देवी, देवेंद्र सिंह रावत, बलवंत सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह कार्की, सतीश शाह, मनोज अधिकारी, प्रदीप गुहुलत (ब्लॉक अध्यक्ष सितारगंज), भानु प्रताप मेहरा, अजय जोशी, गोकुल सिंह रावत, भूपेंद्र नेगी, नीरज मेहरा, लक्ष्मण धनी, हिमांशु सिंह परिहार, करण सिंह, कारणदीप सिंह,  सावित्री जोशी, भारत सिंह, सावित्री कुमारी, पूनम गुप्ता, रामवती, थाना बोरा और रेखा बोरा , राजेंद्र सिंह गढ़िया , हंस पांडे,मोहन सिंह नेगी जिला उपाध्यक्ष नैनीताल,सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यूकेडी की ओर से युवाओं और आम नागरिकों को संगठन से जुड़ने का खुला आह्वान किया जा रहा है। इच्छुक व्यक्ति स्थानीय पदाधिकारियों से संपर्क कर या पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से सदस्यता ले सकते हैं।
बदलाव की शुरुआत या क्षणिक उत्साह?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या यह बदलाव की ठोस शुरुआत है या केवल चुनावी माहौल का उत्साह? उत्तराखंड की राजनीति में अब तक क्षेत्रीय दलों को सीमित सफलता मिली है, लेकिन जनभावनाओं और स्थानीय मुद्दों पर यदि मजबूत रणनीति बनी, तो सियासी तस्वीर बदल भी सकती है।
अंबेडकर पार्क की सभा ने इतना जरूर संकेत दिया है कि पहाड़ की राजनीति में एक बार फिर क्षेत्रीय अस्मिता केंद्र में लाने की कोशिश हो रही है। अब देखना यह है कि यह आवाज चुनावी परिणामों में कितनी गूंज बन पाती है।
जय पहाड़, जय पहाड़ी!


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