किरेन रिजिजू ने कहा कि नए वक्फ बिल का नाम ‘उम्मीद’ (UMEED) हो गया है। इस संशोधित बिल से नया सवेरा आने वाला है। करोड़ों मुसलमानों को फायदा होगा। मुसलमानों ने बिल का स्वागत किया है। बोर्ड के ऑडिट करने का भी प्रावधान रखा गया है। इस बिल के बाद असल पता चलेगा कि कितनी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड के पास हैं। वक्फ बोर्ड में अब 10 सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे। 10 सदस्यों में 2 महिलाएं को रखना अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि 4 गैर मुस्लिम सदस्य होंगे। बोर्ड में 3 सांसद होंगे। वहीं 1 सदस्य बार काउंसिल से होगा। दो प्रोफेशनल्स होंगे। संशोधन के बाद बोर्ड में मुसलमानों के हर वर्ग से सदस्य शामिल होंगे। रिजिजू ने कहा कि आप जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो ऐसा नहीं होगा कि आदिवासी क्षेत्र में जाकर क्रिएट कर देंगे। शेड्यूल 5 और शेड्यूल 6 क्षेत्र में आप वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट नहीं कर सकेंगे, हमने आदिवासियों के अधिकार संरक्षित करने के लिए ये प्रावधान किया है। ट्रिब्यूनल में तीन मेंबर होंगे जिनका एक नीयत कार्यकाल होगा. वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णय से खुश नहीं हैं तो आप अदालत जा सकते हैं. ये रास्ता भी हमने खोल दिया है. वार्षिक अनुदान घटाकर सात से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है जिससे ज्यादा पैसा चैरिटी के लिए खर्च किया जा सकेय़छ वक्फ संपत्ति पर भी लिमिटेशन एक्ट लागू होगा। सेक्शन 40 के तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर देता था। इसे हमने हटा दिया है। इसे कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे। इस प्रावधान का इतना दुरुपयोग हुआ कि प्रॉपर्टी लाखों तक पहुंच गई और इसकी वजहसे कई विवाद देश में आए हैं। रिजिजू ने हरियाणा से कर्नाटक तक, वक्फ प्रॉपर्टी घोषित किए जाने के विवादों का भी जिक्र किया और कहा कि केरल में 600 ईसाई परिवारों की जमीन को वक्फ बोर्ड ने वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया। अभी भी देर नहीं हुआ, आप राजनीतिकरण करके अड़े रहे तो मुश्किल में फंसने वाले हैं। इस बिल का विरोध करके कांग्रेस के साथी दल भी बहुत बड़ी मुश्किल में फंसने वाले हैं। इस संसद को भी वक्फ डिक्लेयर न कर दें, इसको ध्यान में रखकर आगे काम करें। रिजिजू ने कहा कि मेरी हिम्मत को तो सराहो, मेरे हमराही बनो। मैंने एक शमा जलाई है हवाओं के खिलाफ. पीएम मोदी ने मेरे जैसे एक साधारण सदस्य को इतना पुण्य का काम करने के लिए चुना है। रिजिजू ने कहा कि हम किसी जाति-धर्म की वजह से सांसद नहीं बने हैं। आपका ट्रस्ट है, ट्रस्ट को चैरिटी कमिश्नर संभालता है. आप कैसे कहेंगे कि वह मुसलमान नहीं है तो कैसे संभाल सकता है। ये बार-बार कहा जा रहा है कि मुसलमान के मामले में गैर मुस्लिम क्यों आ रहा है। अरे इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं देना नहीं है। ये संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा मामला है। उन्होंने ये भी कहा कि वक्फ की जिन संपत्तियों पर विवाद है, हम कोर्ट के पावर को कैसे ले सकते हैं। सीएए जब लाए थे, तब भी ये लोग कह रहे थे कि मुसलमान का हक छिना जा रहा है। बताइए, किसी मुसलमान की नागरिकता छिनी गई है। आज आप दोबारा मिसलीड करेंगे तो मुंह की खाना पड़ेगा आपको। फिर कोई बिल लेकर दोबारा आएंगे और पर्दाफाश करेंगे आपका। आप वक्फ क्रिएट कर सकते हैं लेकिन महिलाओं और बच्चों का अधिकार नहीं छिन सकते। ये बहुत बड़ा रिफॉर्म है।

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आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा है। बिल को दोपहर 12 बजे सदन के पटल पर रखे जाने के लिए सरकार तैयार है। दूसरी ओर विपक्ष ने भी वक्फ बिल का विरोध करने के लिए कमर कस ली है।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

ऐसे में इस दौरान जोरदार हंगामे के आसार हैं।

वैसे तो केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पिछले साल अगस्त में लोकसभा के सामने रखा था। बाद में सर्वसम्मति से इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। जेपीसी में दिए गए कुछ सुझावों को विधेयक में शामिल किया गया है। इसे फिर संसद में पेश करने की मंजूरी दी गई। केंद्रीय कैबिनेट ने भी इस विधेयक पर मुहर लगा दी।

वक्फ बिल पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष भी तैयार

वक्फ बिल पर पहले से ही हंगामा मचा है। एक ओर तो सत्ता पक्ष एकजुट है। BJP को NDA में अपने सहयोगी दलों का साथ इस बिल को लेकर मिल गया है। तो वहीं पूरा विपक्ष भी बिल के विरोध में एक साथ है। एक ओर बिल के जरिए सरकार वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की बात कह रही है। तो दूसरी ओर विपक्ष इसे संविधान पर हमला बताता नजर आ रहा है।

बिल को आज (2 अप्रैल) को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पेश करेंगे। इसके बाद बिल पर चर्चा शुरू होगी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता अपनी-अपनी बात रखेंगे। चर्चा के लिए फिलहाल 8 घंटे का समय दिया गया है। चर्चा के बाद बिल पर वोटिंग होगी। लोकसभा के बाद इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

क्या है वक्फ संशोधन बिल?

यह वक्फ अधिनियम 1995 में बदलाव करने वाला विधेयक है। इस बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और दुरुपयोग रोकने के लिए नियमों को सख्त करना है।

क्या होंगे बड़े बदलाव?

सरकार ने वक्फ अधिनियम में कई संशोधन पेश किए हैं, जिसके जरिए वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाए जाने की बात कही गई। वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में राज्य सरकार का नियंत्रण और भूमिका बनी रहेगी। कोई संपत्ति वक्फ की है या फिर नहीं, इसका फैसला करने के लिए राज्य सरकार कलेक्टर की रैंक से ऊपर के अधिकारी को नियुक्त कर सकती है। वहीं व्यक्ति वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा, जो 5 वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन कर रहा हो। अगर दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होगा तो ऐसी स्थिति में जांच के बाद ही आखिरी फैसला लिया जाएगा।

वहीं, बिल में मौजूदा पुरानी मस्जिदों, दरगाह या अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थानों से छेड़छाड़ नहीं करने की बात कही गई है। यानी कानून पुरानी तारीख से लागू नहीं होगा। सहयोगी दल JDU ने इस संशोधन की मांग की थी, जिसे स्वीकार किया गया है। वहीं, औकाफ यानी दान की सूची गजट में प्रकाशन के 90 दिनों के अंदर पोर्टल पर अपडेट करनी जरूरी होगी।

साथ ही बिल के अनुसार महिलाओं और गैर मुस्लिम की भी वक्फ बोर्ड में एंट्री होगी। पदेन सदस्यों के साथ ही दो गैर मुस्लिम सदस्य भी इसमें होंगे। वहीं, बोर्ड में वक्फ मामलों से संबंधित संयुक्त सचिव पदेन सदस्य होंगे।

विरोध में मुस्लिम संगठन

देशभर के कई मुस्लिम संगठन वक्फ संशोधन बिल के विरोध में हैं। वो इसे ‘धार्मिक संपत्तियों पर हमला’ करार दे रहे हैं। AIMPLB ने इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया। ईद के मौके पर वक्फ बिल के खिलाफ काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की गई।

कौन बिल के साथ, कौन कर रहा विरोध?

क्फ संशोधन बिल को लेकर पूरा NDA एकजुट है। चंद्रबाबू नायडू के बाद नीतीश कुमार की JDU भी वक्फ संशोधन बिल को लेकर सरकार के साथ आ गई है। जीतन राम मांझी की हिन्‍दुस्‍तानी आवाम पार्टी (HAM) एनडीए की सहयोगी पार्टी है। मांझी ने भी इस बिल पर साथ आने के संकेत दे दिए। NDA में शामिल अन्य पार्टियों ने भी समर्थन का ऐलान किया है। वहीं बात विरोध की करें तो वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्ष भी एक साथ हैं। कांग्रेस, समाजवाद पार्टी, RJD, TMC, DMK, AIMIM समेत तमाम विपक्षी पार्टियों इस बिल के खिलाफ हैं।

विपक्षी इंडिया गठबंधन ने एक दिन पहले मंगलवार को एक बैठक कर संयुक्त रूप से बिल का विरोध करने का फैसला किया.

उधर बीजेपी ने मंगलवार को अपने लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर बुधवार को सभी सांसदों को लोकसभा में उपस्थित रहने को कहा है.

बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच सहमति के आसार नहीं दिख रहे हैं ऐसे में संसद में बहुमत के आधार पर इसका भविष्य तय होगा.


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इस सारी बहस से जुड़ी बातें समझने के लिए पढ़िए ये दस बड़ी बातें-

1. लोकसभा और राज्यसभा में संख्या बल

मौजूदा लोकसभा में एनडीए की संख्या 293 है, जोकि 542 सदस्यों वाले निचले सदन में बहुमत से काफ़ी अधिक है.

लोकसभा में इंडिया गठबंधन के सदस्यों की संख्या 234 है. जबकि बहुमत के लिए 272 वोटों की ज़रूरत है.

236 सदस्यों वाली राज्य सभा में भी एनडीए का संख्या बल 126 है, जोकि बहुमत के लिए पर्याप्त है.

इनमें दो स्वतंत्र और छह नामित सदस्य हैं जो आम तौर पर सरकार का समर्थन करते हैं.

2. इस बिल के समर्थन में कौन है?

वक़्फ़ संशोधन बिल को बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार लेकर आई है.

नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी भी एनडीए का हिस्सा हैं. इन दोनों पार्टियों ने बिल का समर्थन करने की घोषणा की है.

एनडीए में शामिल अन्य दल शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी अपने सांसदों को दो और तीन अप्रैल को संसद में मौजूद रहने और सरकार का समर्थन करने का व्हिप जारी किया है.

3. टीडीपी का समर्थन लेकिन…


ANIदिल्ली में पिछले साल नौ जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू.

आर्थिक मामलों के अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, टीडीपी ने बिल का समर्थन करने की घोषणा तो की है लेकिन लोकसभा में इसके सांसद बिल में कुछ बदलावों का प्रस्ताव देंगे.

इसके अलावा टीडीपी ने सरकार से इस विधेयक को बीते समय से लागू न करने की अपील की.

जेडीयू ने भी बिल का समर्थन करने की घोषणा की है. लोकसभा में टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सदस्य हैं.

बीजेपी के अपने 240 सांसद हैं और उसके लिए इन दोनों दलों का पूरा समर्थन संशोधन बिल के पास होने के लिए आवश्यक है.

लेकिन इन दोनों की दलों की मुस्लिम अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच पैठ है. और इसलिए बिल के समर्थन की वजह से इसपर असर पड़ने की आशंका के चलते दोनों ही दल सावधानी बरत रहे हैं.

4. ओवैसी की नायडू और नीतीश से अपील

शुरू से ही इस बिल के ख़िलाफ़ मुखर रहने वाले एआईएमआईएम के नेता और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी एनडीए की सदस्य पार्टियों के नेताओं से भी बिल का विरोध करने की अपील करते रहे हैं.

संसद में बिल पेश करने के दौरान विपक्ष का जमकर हंगामा देखने को मिला. विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग भी की है. बिल पेश करने के दौरान सरकार ने मुसलमानों को 5 भरोसे दिए हैं.

किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल को लेकर 9727772 याचिकाएं आई थी, आज तक कभी भी इससे ज्यादा संख्या में किसी भी बिल को लेकर याचिकाएं नहीं आई हैं. 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी है. इस बिल का पॉजिटिव सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे.

सरकार ने मुसलमानों को दिए ये 5 ‘भरोसे’

1. किरेन रिजिजू ने संसद में बिल पेश करने के दौरान मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी मस्जिद पर कोई कार्रवाई का प्रावधान इस बिल में नहीं है. ये सिर्फ संपत्ति का मामला है धार्मिक संस्थानों से इस बिल का कोई लेना देना नहीं है.

2. सरकार ने बताया कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक स्थल-मस्जिद की व्यवस्था में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. इसमें कोई बदलाव न ही कोई हस्तक्षेप किया जाएगा.

3. वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्य कलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे हैं.वक्फ बोर्ड कानून के दायरे में होगा, इसमें कुछ भी कानून के उलट नहीं किया जाएगा.

4. रिजिजू ने कहा कि कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा। जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते हैं. यह बदलाव अहम है. किसी भी मस्जिद को कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. सरकार ने बताया कि इस बिल में मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे हैं.

5. सरकार ने वादा किया कि Centre of council में कुल 22 सदस्यों में 4 सदस्य गैर-मुसलमानों से ज्यादा नहीं हो सकते हैं. पूर्व अधिकारियों सहित संसद के 3 सदस्य चुने जाएंगे. संसद के सदस्य किसी भी धर्म के हो सकते हैं.


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