औद्योगिक विकास को नई रफ्तार: सिडकुल भूमि उप-पट्टे की राह हुई साफ

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उत्तराखंड में औद्योगिक विकास की राह में वर्षों से चली आ रही भूमि की कमी अब दूर होने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा शासनादेश में संशोधन को मंजूरी दिए जाने के बाद ऊधमसिंह नगर जनपद के प्राग फार्म क्षेत्र में 1354.14 एकड़ भूमि पर औद्योगिक गतिविधियों का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। यह क्षेत्र औद्योगिक कॉरिडोर के समीप स्थित होने के कारण यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण की प्रबल संभावनाएं हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


उल्लेखनीय है कि औद्योगिक आस्थान विकसित करने के उद्देश्य से यह भूमि पहले ही राज्य औद्योगिक विकास निगम (सिडकुल) को हस्तांतरित की जा चुकी थी, जिसका शासनादेश 25 मार्च 2025 को जारी हुआ था। हालांकि, उस समय की शर्तों के अनुसार सिडकुल को यह भूमि किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन को बेचने, पट्टे पर देने या किसी अन्य रूप में हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं था। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया था कि तीन वर्षों के भीतर भूमि का उपयोग न होने की स्थिति में आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा।
औद्योगिक भूमि की कमी बनी थी बड़ी बाधा
राज्य में उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ने और निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते औद्योगिक भूमि की भारी कमी सामने आ रही थी। उधमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जैसे मैदानी जनपद उद्योगपतियों की पहली पसंद बने हुए हैं। वर्तमान में उत्तराखंड में कुल 93,883 उद्योग स्थापित हैं, जिनमें 330 बड़े उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों के माध्यम से अब तक लगभग 55,588 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है।
इसके बावजूद नए उद्योगों की स्थापना के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध न होने से औद्योगिक विकास की गति प्रभावित हो रही थी। इसी वास्तविकता को स्वीकार करते हुए सरकार ने शासनादेश में आवश्यक संशोधन किया है।
अब सिडकुल को मिलेगा उप-पट्टे का अधिकार
संशोधित प्रविधान के तहत अब औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से, राजस्व विभाग की सहमति लेकर, सिडकुल को आवंटित भूमि को समान प्रयोजन के लिए उप-पट्टे (सब-लीज) पर देने का अधिकार मिल गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद सिडकुल अपनी विकसित औद्योगिक भूमि पर नए उद्योगों की स्थापना कर सकेगा।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
इस फैसले से ऊधमसिंह नगर में 1300 एकड़ से अधिक भूमि पर सुनियोजित औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने का मार्ग खुलेगा। इससे न केवल राज्य में निवेश को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह निर्णय उत्तराखंड को औद्योगिक दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम साबित होगा।


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