अक्षय तृतीया को धन-वैभव समृद्धि का देवता भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन कुछ खास उपाय करके आप भगवान कुबेर को प्रसन्न कर सकते हैं अपने जीवन में धन-समृद्धि ला सकते हैं.

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भगवान कुबेर हिन्दू धर्म में धन, ऐश्वर्य, समृद्धि के देवता के रूप में पूजे जाते हैं. वे धन के संरक्षक संचालक माने जाते हैं उन्हें ‘लोकपाल’ के रूप में भी जाना जाता है, जो धन के निर्धारण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं. कुबेर को अलकापुरी का राजा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘अजर नगर’ या ‘अजर स्थान’, जो कि धन की अविनाशी अमरता को संकेत करता है. वे हिमालय के राजा विश्रवा भूमि देवी के पुत्र हैं लंका के राजा रावण के भाई हैं.

1. कुबेर यंत्र की पूजा- अक्षय तृतीया के दिन कुबेर यंत्र की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. यदि आपके पास कुबेर यंत्र नहीं है, तो आप इसे अक्षय तृतीया के दिन ही खरीद सकते हैं. कुबेर यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें भगवान कुबेर का ध्यान करें.

2. श्री यंत्र की पूजा– श्री यंत्र भी धन-समृद्धि का प्रतीक है. अक्षय तृतीया के दिन श्री यंत्र की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है. श्री यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें माँ लक्ष्मी का ध्यान करें.

3. गोल्डन तांबे का कलश– अक्षय तृतीया के दिन गोल्डन तांबे का कलश स्थापित करना भी बहुत शुभ माना जाता है. कलश में जल भरकर उसमें लाल रंग का सुपारी इलायची डालें. कलश को पूजा स्थान पर स्थापित करें भगवान कुबेर का ध्यान करें.

4. पीले रंग का वस्त्र– अक्षय तृतीया के दिन पीले रंग का वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है. पीला रंग धन-समृद्धि का प्रतीक है. इस दिन पीले रंग का वस्त्र धारण करके भगवान कुबेर की पूजा करें.

5. दान-पुण्य– अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है. इस दिन गरीबों जरूरतमंदों को दान करें. दान में अन्न, वस्त्र, धन दे सकते हैं.

6. कुबेर मंत्र का जाप– अक्षय तृतीया के दिन कुबेर मंत्र का जाप करना बहुत लाभकारी माना जाता है. कुबेर मंत्र का जाप 108 बार करें.

7. भगवान शिव की पूजा– अक्षय तृतीया के दिन भगवान शिव की पूजा भी करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव को बेल पत्र, दूध, घी, दही, शहद अर्पित करें.

इन उपायों को करके आप भगवान कुबेर को प्रसन्न कर सकते हैं अपने जीवन में धन-समृद्धि ला सकते हैं. कुबेर का ध्यान करने से धन, संपत्ति, समृद्धि की प्राप्ति होती है, उनकी पूजा करने से व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि, सुख, शांति मिलती है. वे धन के देवता के रूप में माने जाते हैं उन्हें धन की प्राप्ति के लिए पूजा जाता है. कुबेर की पूजा करने से लोग धन की संवृद्धि, आर्थिक समृद्धि, समाज में सम्मान की प्राप्ति करते हैं. वे धन के निर्धारक, संरक्षक, वितरक के रूप में प्रार्थना किए जाते हैं, ताकि वे धन के संरक्षण प्रबंधन में मदद कर सकें.

इसी के साथ ही अगर अक्षय तृतीया की तिथि पर धन के देवता भगवान कुबेर जी की विधिवत पूजा कर उनकी प्रिय चालीसा का पाठ भक्ति भाव से किया जाए तो गरीबी व दरिद्रता का नाश हो जाता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलता है तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं भगवान कुबेर चालीसा पाठ।

श्री कुबेर चालीसा पाठ-

दोहा

जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर ।

ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर ॥

विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर ।

भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर ॥

चौपाई

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।

धन माया के तुम अधिकारी ॥

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।

पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।

सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥

यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।

सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।

युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥

सदा विजयी कभी ना हारैं ।

भगत जनों के संकट टारैं ॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।

पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥

विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।

विभीषण भगत आपके भ्राता ॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।

घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥

शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।

अमृत पान करी अमर हुई काया ॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।

देवी देवता सब फिरैं साथ में ।

पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ॥

बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।

त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥

शंख मृदंग नगारे बाजैं ।

गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।

ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं ॥

दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।

यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।

देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥

पुरुषोंमें जैसे भीम बली हैं ।

यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।

पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥

नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।

वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।

गले फूलों की पहनी माला ॥

स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।

दूर दूर तक होए उजाला ॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।

सदा विजय हो कभी न हारे ।।

बिगड़े काम बन जाएं सारे ।

अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।

कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥

कुबेर भगत के संकट टारैं ।

कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।

क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥

यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।

दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।

अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥

रोग शोक को कुबेर नशावैं ।

कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।

कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥

कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।

कुबेर भूले को राह बता दे ॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।

भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥

रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।

दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।

कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥

कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।

चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।

जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥

चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।

मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।

उसकी कला हो सदा सवाई ॥

जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।

उसका जीवन चले सुखदाई ॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।

उसका बेड़ा पार लगावै ॥

उजड़े घर को पुन: बसावै ।

शत्रु को भी मित्र बनावै ॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।

सब सुख भोद पदार्थ पाई ।

प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।

मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥

दोहा

शिव भक्तों में अग्रणी, श्री यक्षराज कुबेर ।

हृदय में ज्ञान प्रकाश भर, कर दो दूर अंधेर ॥

कर दो दूर अंधेर अब, जरा करो ना देर ।

शरण पड़ा हूं आपकी, दया की दृष्टि फेर ।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/ प्रिंट मीडिया :शैल ग्लोबल टाइम्स/ अवतार सिंह बिष्ट, रूद्रपुर, उत्तराखंड

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