महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि, नेताओं ने किया सत्य–अहिंसा के मार्ग पर चलने का आह्वान

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रुद्रपुर,नई दिल्ली/देहरादून, 30 जनवरी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को देशभर में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर नेताओं ने बापू के सत्य, अहिंसा और सेवा के आदर्शों को याद करते हुए उन्हें नमन किया और उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प दोहराया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि पूज्य बापू का स्वदेशी पर बल विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का आधारस्तंभ है। उन्होंने कहा कि गांधीजी का व्यक्तित्व और कृतित्व देशवासियों को सदैव कर्तव्य पथ पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अहिंसा में वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है और मानवता की रक्षा कर सकती है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने संदेश में कहा कि सत्य, अहिंसा और सद्भाव के गांधीवादी आदर्श आज भी न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व को मानवता का मार्ग दिखाते हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गांधीजी को सत्य और करुणा का अग्रदूत बताते हुए कहा कि पूज्य बापू ने स्वच्छता को स्वराज की आधारशिला माना था और उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए स्वच्छ भारत के संकल्प को आगे बढ़ाना होगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधीजी को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने सत्य, अहिंसा और एकता के संदेश से मानवता की सेवा का मार्ग दिखाया। उनका जीवन लोककल्याण के पावन ध्येय की प्राप्ति का अनुकरणीय अध्याय है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि बापू का जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा का अमर संदेश है, जो न्याय, समरसता और शांति के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है।
गौरतलब है कि महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों के माध्यम से देश को आज़ादी की दिशा में एकजुट किया। उनका जीवन सादगी, सत्याग्रह और स्वदेशी के सिद्धांतों पर आधारित रहा, जिसने दुनिया को बिना हिंसा के परिवर्तन का मार्ग दिखाया।
30 जनवरी को राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए देशवासियों ने उनके पदचिह्नों पर चलने और उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।


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