प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगे लगाम: ट्यूशन फीस बढ़ोतरी से अभिभावकों की बढ़ी चिंता

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संपादकीय;प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: ट्यूशन फीस में भारी बढ़ोतरी से अभिभावक परेशान

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड) में

उत्तराखंड में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही कई प्राइवेट स्कूलों ने मनमानी करनी शुरू कर दी है। शिक्षा के नाम पर हर साल फीस बढ़ोतरी का जो खेल चलता है, वह इस बार और भी आक्रामक हो गया है। कई स्कूलों ने ट्यूशन फीस में 40% तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

फीस बढ़ोतरी का बोझ अभिभावकों पर

महंगाई की मार पहले से ही आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही है, ऐसे में स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाना अभिभावकों के लिए एक नई चिंता बन गया है। कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूलों ने फीस बढ़ा दी, जिससे वे मानसिक और आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

स्कूल प्रशासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है, बावजूद इसके ट्यूशन फीस में अचानक इतनी वृद्धि कर देना सवाल खड़े करता है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण लगातार बढ़ रहा है और सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं किया जा रहा।

नियमों की अनदेखी और प्रशासन की चुप्पी

राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत स्कूलों पर विभिन्न नियम लागू किए गए हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल अक्सर इन नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करते हैं। कई स्कूल बिना सरकार की मंजूरी के ही फीस बढ़ा रहे हैं, जबकि नियम यह कहता है कि किसी भी प्रकार की फीस बढ़ोतरी के लिए उचित कारण और औचित्य बताना आवश्यक होता है।

अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। इससे साफ होता है कि स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना है।

शिक्षा के नाम पर व्यापार कब तक?

सरकार और प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए अनिवार्य और सुलभ होना चाहिए, लेकिन जब निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाई जाती है, तो यह शिक्षा को केवल अमीरों तक सीमित करने का काम करता है।

अभिभावकों की मांग है कि—

  1. फीस वृद्धि पर सख्त नियम बनाए जाएं और बिना अनुमति के फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  2. सरकार एक निगरानी तंत्र स्थापित करे, जिससे स्कूलों की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
  3. शिक्षा का व्यवसायीकरण रोका जाए और हर बच्चे को समान अवसर मिले।

यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो शिक्षा का निजीकरण और महंगाई अभिभावकों की परेशानी को और बढ़ा देगा। सरकार को चाहिए कि वह इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और एक ऐसी नीति बनाए जो शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाए रखे।


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