पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नजूल नीति के लिए समय सीमा को बढ़ाने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने नजूल नीति 2021 को फिर से लागू कर दिया है। दरअसल कैंट बोर्ड के नागरिक क्षेत्रों को स्थानीय निकाय को सौंपने, हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के कार्य को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नजूल नीति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नजूल नीति के लिए समय सीमा को बढ़ाने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने नजूल नीति 2021 को फिर से लागू कर दिया है। दरअसल कैंट बोर्ड के नागरिक क्षेत्रों को स्थानीय निकाय को सौंपने, हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के कार्य को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नजूल नीति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।त्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नजूल नीति के लिए समय सीमा को बढ़ाने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने नजूल नीति 2021 को फिर से लागू कर दिया है। दरअसल कैंट बोर्ड के नागरिक क्षेत्रों को स्थानीय निकाय को सौंपने, हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के कार्य को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नजूल नीति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।

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इसके साथ ही इन तमाम जगहों पर एक साल तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक के दौरान कई अहम निर्णय लिए।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /प्रिंट न्यूज़ शैल ग्लोबल टाइम्स। अवतार सिंह बिष्ट, रूद्रपुर उत्तराखंड। (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

बैठक के दौरान नजूल नीति-2021 को फिर से लागू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक में लिए गए अहम फैसलों की मुख्य सचिव डॉक्टर एसएस संधु ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नजूल की भूमि पर बसे परिवारों को मालिकाना हक देने के लिए सरकार ने गैरसैंड में हुए बजट सत्र विधेयक को पास कर दिया है। इस विधेयक को राजभवन के माध्यम से राष्ट्रपति भवन के जरिए गृह मंत्रालय को भेजा गया है। लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है।

गौर करने वाली बात है कि 11 दिसंबर को नजूल नीति 2021 की समय सीमा खत्म हो चुकी थी। ऐसे में प्रदेश सरकार ने नियमितीकरण के काम को जारी रखने के लिए फिलहाल इस नीति को आगे बढ़ा दिया है। इसके अलावा प्रदेश के सात कैंड बोर्डों के सिविल क्षेत्र को पास करने के नगर निकायों को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव ने बताया कि इस फैसले को लागू करने से पहले कार्मिकों और भूमि संबंधित कुछ अहम मुद्दों को सुलजाने की जरूरत है। इस दिशा में प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को सूचित करने जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /प्रिंट न्यूज़ शैल ग्लोबल टाइम्स। अवतार सिंह बिष्ट, रूद्रपुर उत्तराखंड। (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

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