

मान्यता है कि होलाष्टक में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक नहीं करने चाहिए ऐसा करने से कष्ट उठाना पड़ सकता है। पंचांग के अनुसार इस साल होलाष्टक का आरंभ 7 मार्च यानी आज से हो चुका है और समापन 13 मार्च यानी होली से एक दिन पहले होलिका दहन पर हो जाएगा। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि होलाष्टक के दिनों में किन कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए तो आइए जानते हैं।

मान्यता है कि होलाष्टक में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक नहीं करने चाहिए ऐसा करने से कष्ट उठाना पड़ सकता है। पंचांग के अनुसार इस साल होलाष्टक का आरंभ 7 मार्च यानी आज से हो चुका है और समापन 13 मार्च यानी होली से एक दिन पहले होलिका दहन पर हो जाएगा। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि होलाष्टक के दिनों में किन कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए तो आइए जानते हैं।
होलाष्टक में करें इन नियमों का पालन-
आपको बता रहे हैं कि होलाष्टक के दिनों में किसी भी तरह का शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश आदि नहीं करना चाहिए। इसे अच्छा नहीं माना जाता है ऐसा करना अशुभ होता है। होलाष्टक के दौरान नया कारोबार भी शुरू नहीं करना चाहिए ऐसा करना अच्छा नहीं होता है।

होलाष्टक के दिनों में लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए और सकारात्मक रहना चाहिए। होलाष्टक के दिनों में क्रोध नहीं करना चाहिए इस दौरान मन को शांत रखें। साथ ही इस समय किसी का अपमान भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मकता बढ़ती है।
इस बार होलाष्टक 7 मार्च यानी आज से शुरू हो रहे हैं और इसका समापन 13 मार्च होलिका दहन के दिन होगा और 14 मार्च को होली मनाई जाएगी.
आखिर होलाष्टक होता क्या है?
मान्यताओं के अनुसार अगर कोई व्यक्ति होलाष्टक के दौरान कोई मांगलिक काम करता है तो उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इतना ही नहीं व्यक्ति के जीवन में कलह, बीमारी और अकाल मृत्यु का साया भी मंडराने लगता है. इसलिए होलाष्टक के समय को शुभ नहीं माना जाता है.
होलाष्टक के दौरान न करें ये काम
1. इस दौरान शादी, विवाह, भूमि पूजन, गृह प्रवेश या कोई नया बिजनेस खोलना वर्जित माना जाता है.
2. शास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक शुरू होने के साथ 16 संस्कार जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्यों पर भी रोक लग जाती है.
3. किसी भी प्रकार का हवन, यज्ञ कर्म भी इन दिनों में नहीं किया जाता है.
4. इसके अलावा नव विवाहिताओं को इन दिनों में मायके में रहने की सलाह दी जाती है.
होलाष्टक का महत्व (Holashtak Significance)
ये आठ दिनों का समय जिसे होलाष्टक कहते हैं वो भक्ति की शक्ति का प्रतीक माना गया है. कहते हैं कि इस समय के दौरान यदि तप किया जाये तो बहुत शुभ होता है. होलाष्टक पर पेड़ की एक शाखा काटकर उसे जमीन में लगाने का रिवाज़ हैं. उसके बाद इस शाखा पर रंग-बिरंगे कपड़े बांधे जाते हैं. बता दें कि इसी शाखा को प्रह्लाद का रूप माना जाता है.
होलाष्टक कथा(Holashtak katha)
होलाष्टक पर एक प्रचलित कथा है कि होलाष्टक के दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था. कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने की कोशिश की थी जिसके चलते महादेव क्रोधित हो गए थे. इसी दौरान उन्होंने अपने तीसरे नेत्र से काम देवता को भस्म कर दिया था. हालांकि, कामदेव ने गलत इरादे से भगवान शिव की तपस्या भंग नहीं की थी. कामदेव की मृत्यु के बारे में पता चलते ही पूरा देवलोक शोक में डूब गया. इसके बाद कामदेव की पत्नी देवी रति ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की और अपने मृत पति को वापस लाने की मनोकामना मांगी जिसके बाद भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया था.





