
रुद्रपुर,ई-रिक्शा के खिलाफ अभियान इसलिए चलाया जाय क्योंकि प्रदेश में बड़ी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना परमिट के ई-रिक्शा और ऑटो चल रहे हैं। इनकी वजह से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। कई मामलों में देखा गया है कि बिना लाइसेंस वाले लोग ई-रिक्शा चला रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।


प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
उत्तराखंड में अनधिकृत ई-रिक्शा पर सख्त कानून की आवश्यकता
उत्तराखंड में भी अनधिकृत ई-रिक्शा की संख्या बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में ई-रिक्शा के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। बिना लाइसेंस और बिना रजिस्ट्रेशन के ई-रिक्शा चलने से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि अपराधों में भी वृद्धि हो रही है।
उत्तराखंड सरकार को इस समस्या पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और सख्त कानून लागू करने चाहिए। प्रत्येक ई-रिक्शा चालक का सत्यापन अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि किसी भी अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
ई-रिक्शा और ऑटो का चलन पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है। हालांकि, बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना किसी वैध दस्तावेज के चल रहे हैं। सरकार के नियमों के अनुसार, हर ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन कई चालक बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन चला रहे हैं। इसके अलावा, कई ई-रिक्शा मुख्य सड़कों और हाईवे पर भी चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सरकार को जारी करनी चाहिए गाइडलाइन
उत्तराखंड सरकार को भी ई-रिक्शा संचालन के लिए सख्त गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। प्रत्येक ई-रिक्शा चालक का सत्यापन किया जाना चाहिए और बिना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाले ई-रिक्शा को जब्त किया जाना चाहिए। इस तरह की कार्रवाई से यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी और दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी आएगी।
ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन पर पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पुलिस को न केवल यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को बिना उचित दस्तावेजों के ई-रिक्शा चलाने की अनुमति न मिले।
