ईरान पर इजराइल के हमले का बदला कैसा होगा? ईरान कितनी ताकत से प्रहार करेगा? इन अटकलों के बीच अमेरिका को सीक्रेट जानकारी मिल गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान 4 हजार मिसाइलों से इजराइल को तबाह करने की कोशिश करेगा.

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ये हमला आज रात ही हो सकता है. दूसरी तरफ इजराइल भी थमने वाला नहीं है. अब इजराइल अपने पीएम के घर पर हुए हमले का बदला लेने वाला है. नेतन्याहू ने ईरान के तमाम एटमी ठिकाने को भस्म करने का प्रण लिया है. अमेरिका से इस मिशन के लिए बेहद ताकतवर बम आ रहे हैं.

अमेरिका का एक बेहद ताकतवर बम इजराइल पहुंचने वाला है. इस बम का नाम GBU-43/B है. इसे अमेरिका का मदर ऑफ ऑल बम भी कहा जाता है. इसका धमाका 11 टन TNT का होता है. बम का वजन 9800 किलो है. ये जीपीएस से सटीक निशाने पर प्रहार करता है. अमेरिका का GBU-43/B बहुत भारी बम है लेकिन इजराइल के पास C-130 Hercules कार्गो विमान है, जिससे इस बम को गिराया जा सकता है.

हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट

एटमी ठिकाने को भस्म कर सकता है ये बम

मगर, इसके लिए विमान को ईरान की सीमा में घुसना होगा. इस हमले में ईरान के एयर डिफेंस बड़ी चुनौती होंगे. इस बम से हमले के लिए टारगेट के करीब तक जाना होगा. ये बम GPS से सटीक निशाना लगाकर एटमी ठिकाने को भस्म कर सकता है. ईरान के एटमी ठिकाने जमीन के भीतर हैं. इसलिए ये बम इजराइल को दिया जा रहा है. ये बम जमीन के 200 फीट नीचे जाकर 11 टन का विस्फोट करता है.

इसके अलावा अमेरिका GBU-57 बम भी इजराइल को दे रहा है. ये भी बंकर बस्टर बम है. बम 2400 किलो विस्फोटक से धमाका करता है और इसका वजन 13,600 KG है लेकिन इजराइल के B-2 बॉम्बर नहीं हैं. इसलिए इस बम को F-15 थंडर के जरिए ड्रॉप कराया जा सकता है. अमेरिका ने यमन में मौजूद अंडरग्राउंड मिसाइल डिपो को नष्ट करने के लिए B-2 बॉम्बर से बम गिराया था.

हमें और सैनिकों की जरूरत है

यमन में कामयाबी के बाद ही इजराइल को भी दो घातक बम दिए जा रहे हैं. ताकि ईरान का एटमी ठिकाना नष्ट हो सके. अमेरिका लगातार इजराइल की मदद कर रहा है. इजराइल कितनी बड़ी जंग की तैयारी में है, इसका अंदाजा इसी बात से मिल रहा है कि इजराइल में जल्द सैनिकों की भर्ती शुरू होने वाली है.

इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट का कहना है कि हालात बहुत बदतर हो चुके हैं. कई मोर्चे पर जंग हो रही है. सैनिक जख्मी हो रहे हैं और मारे जा रहे हैं. इसलिए हमें और सैनिकों की जरूरत है. इजराइल किसी भी तरह के हमले का सामना करने के लिए तैयार है. अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी मिलने के बाद ही लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन की शुरुआत की गई थी.

रूस के भरोसे से ईरान के हौसले बुलंद

अब ईरान को लेकर भी अमेरिका से पूरा भरोसा मिल चुका है. दूसरी तरफ रूस के भरोसे से ईरान के हौसले बुलंद हैं. अमेरिका इजराइल के जरिए ईरान का एटमी मिशन रुकवाना चाहता है. ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. अमेरिका बिना जंग में कूदे ईरान में भारी तबाही लाना चाहता है. दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट को लेकर रूस की अपनी प्लानिंग है.

अमेरिका ने इजराइल को थाड एयर डिफेंस दिया तो रूस ईरान में S-400 की तैनाती करवा दी है. एक अनुमान के मुताबिक, ईरान के करीब अमेरिका के 65 हजार सैनिक मौजूद हैं. एयरबेस पर अमेरिकी फाइटर जेट और बॉम्बर मौजूद हैं. पेंटागन से ऑर्डर रिलीज होते ही ईरान को अमेरिकी बेस से अटैक का सामना करना पड़ेगा. दूसरी तरफ रूस खुद युद्ध के लिए नॉर्थ कोरिया से सैनिक मांग रहा है. ऐसे हालात में वो ईरान के लिए क्या कर सकेगा ये बड़ा सवाल है.


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