अल्मोड़ा में नंदा देवी मेले में झूला टूटा, युवक के दोनों पैर फ्रैक्चर—NOC और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

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अल्मोड़ा। ऐतिहासिक मां नंदा देवी मेले के दौरान बुधवार रात एडम्स इंटर कॉलेज मैदान में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मेले में संचालित एक झूले का हिस्सा अचानक टूट गया। हादसे में एक युवक और एक महिला घायल हुए हैं। युवक के दोनों पैरों में फ्रैक्चर होने की सूचना है और उसे बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी रेफर किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झूला नीचे की ओर आ रहा था, तभी उसका एक हिस्सा अचानक टूट गया और सवार नीचे जा गिरे। देखते ही देखते मेले में चीख-पुकार मच गई। मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने हादसे वाले झूले को सील कर दिया है तथा झूला संचालक से लाइसेंस और फिटनेस प्रमाणपत्र समेत आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। झूले की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल—झूला चला कैसे?
यह हादसा केवल दो लोगों के घायल होने की घटना नहीं है, बल्कि मेले में सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर किसी झूले को संचालन की अनुमति दी गई थी तो क्या उसकी तकनीकी जांच और फिटनेस प्रमाणपत्र की विधिवत जांच की गई थी?
क्या झूला संचालक के पास सभी आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा प्रमाणपत्र मौजूद थे?
NOC किस विभाग अथवा सक्षम अधिकारी ने दी थी?
क्या अनुमति देने से पहले झूले की मौके पर तकनीकी जांच की गई थी?
और यदि जांच हुई थी तो उसके कुछ ही समय बाद झूले का हिस्सा टूटने की नौबत कैसे आई?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
समापन के बाद भी झूले चलते रहे तो किसकी जिम्मेदारी?
स्थानीय रिपोर्टों में हादसे को मेले के अंतिम दिन की घटना बताया गया है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि धार्मिक कार्यक्रम और शोभायात्रा के समापन के बाद मनोरंजन के साधनों का संचालन किस अनुमति और किस समय तक किया जा रहा था।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेले में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। यदि झूला अधिक ऊंचाई पर या भीड़ के ऊपर टूटता, तो परिणाम और गंभीर हो सकते थे।
इंदर आर्य का कार्यक्रम भी रद्द
हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से मेले में प्रस्तावित गायक इंदर आर्य का कार्यक्रम भी रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।
उत्तराखंड के लोगों की जिंदगी कितनी सस्ती?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है?
क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन को झूले की फिटनेस, लाइसेंस और तकनीकी सुरक्षा याद आती है?
अगर झूले को NOC या अनुमति मिली थी तो उस अनुमति की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
और सबसे अहम सवाल—
क्या उत्तराखंड में आम लोगों की जिंदगी इतनी सस्ती हो गई है कि सुरक्षा जांच में लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान या गंभीर चोट के रूप में चुकानी पड़े?
यह आरोप नहीं, बल्कि इस हादसे के बाद उठने वाले वे सवाल हैं जिनका जवाब प्रशासन, संबंधित विभाग और झूला संचालक—तीनों को जांच के सामने देना होगा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स इस मामले में यह जानने की कोशिश करेगा कि झूले को किस विभाग से अनुमति मिली, फिटनेस प्रमाणपत्र किसने जारी किया और हादसे से पहले सुरक्षा मानकों की जांच कब की गई थी।
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