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ऊधमसिंह नगर में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का ज्ञापन, 18 सूत्रीय मांगों पर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

उत्तराखंड सब जूनियर सेपक टाकरा टीम के चयन ट्रायल संपन्न

भगवान कृष्ण द्वापर युग के अंत में मानव रूप में धरती पर आए थे. हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को भगवान विष्‍णु का अवतार माना गया है. अपने जीवनकाल में श्रीकृष्‍ण ने कई लीलाएं कीं. मथुरा, वृंदावन से लेकर कुरुक्षेत्र की भूमि में गीता ज्ञान तक, कृष्‍ण लीलाओं की अनगनित कथाएं आज भी सुनाई जाती हैं.

नई टिहरी। अपनी मां और अन्य बच्चों के साथ मवेशियों को चराने गए एक सात वर्षीय बालक की कोटेश्वर बांध की झील में डूबने से मौत हो गई।

देश

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विकसित भारत की आधारशिला रख रहा केंद्रीय बजट- अजय भट्ट

रुद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय बजट…

अंदाज़नाम बदला, पहचान मिली, अब सम्मान भी तय!‘मोहम्मद दीपक’ से दीपक कुमार तक का सफ़र—MYOI को भी भा गयाकोटद्वार।जिस देश में अक्सर नाम पूछकर नीयत तय होती हो, वहाँ कोटद्वार के दीपक कुमार ने नाम के आगे एक सवालिया निशान जोड़कर पूरे समाज को आईना दिखा दिया। ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित हुए दीपक अब इतने चर्चित हो चुके हैं कि MYOI ने भी उन्हें सम्मानित करने का मन बना लिया है।बताया जा रहा है कि यह सम्मान “आपसी सद्भाव और मानवीय मूल्यों” के लिए दिया जाएगा। यानी जो काम संविधान, शिक्षा और राजनीति को करना था, वह एक आम युवक ने नाम बदलकर कर दिखाया—और सिस्टम ने ताली बजा दी।पत्रकार सुधांशु थपलियाल के अनुसार दीपक का चयन समाज में भाईचारे की मिसाल पेश करने के लिए हुआ है। सवाल बस इतना है—क्या इस देश में सद्भाव के लिए नाम बदलना अनिवार्य शर्त बन चुका है?फिलहाल दीपक कुमार सम्मान की तैयारी में हैं, और समाज आत्ममंथन की—कि अगला सम्मान पाने के लिए कहीं आधार कार्ड के साथ नाम भी अपडेट तो नहीं करना पड़ेगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

राष्ट्रीय स्तर भारतीय ज्ञान परीक्षा के लिए डीएसबी की छात्रा स्नेहा मुरारी का चयन

नैनीताल। सरोवर नगर नैनीताल स्थित कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर, नैनीताल की शिक्षा विभाग (आईटीईपी)…

हिमाद्री जन सेवा समिति द्वारा सिटी क्षेत्र में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

रुद्रपुर में हिमाद्री जन सेवा समिति (रजि०) के तत्वावधान में सिटी क्षेत्र स्थित सामिया परिसर…

दुनिया

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“घूसखोर पंडित”: अभिव्यक्ति की आज़ादी या सांस्कृतिक उद्दंडता?

भगवान कृष्ण द्वापर युग के अंत में मानव रूप में धरती पर आए थे. हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को भगवान विष्‍णु का अवतार माना गया है. अपने जीवनकाल में श्रीकृष्‍ण ने कई लीलाएं कीं. मथुरा, वृंदावन से लेकर कुरुक्षेत्र की भूमि में गीता ज्ञान तक, कृष्‍ण लीलाओं की अनगनित कथाएं आज भी सुनाई जाती हैं.

नई टिहरी। अपनी मां और अन्य बच्चों के साथ मवेशियों को चराने गए एक सात वर्षीय बालक की कोटेश्वर बांध की झील में डूबने से मौत हो गई।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर आज उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नेताओं का औपचारिक स्वागत किया।

Express News

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भगवान कृष्ण द्वापर युग के अंत में मानव रूप में धरती पर आए थे. हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को भगवान विष्‍णु का अवतार माना गया है. अपने जीवनकाल में श्रीकृष्‍ण ने कई लीलाएं कीं. मथुरा, वृंदावन से लेकर कुरुक्षेत्र की भूमि में गीता ज्ञान तक, कृष्‍ण लीलाओं की अनगनित कथाएं आज भी सुनाई जाती हैं.

परम प्रतापी, तेजस्‍वी, अलौकिक और ईश्‍वर के अवतार श्रीकृष्‍ण की मृत्‍यु के बारे में बहुत कम लोगों को पता है.…

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नई टिहरी। अपनी मां और अन्य बच्चों के साथ मवेशियों को चराने गए एक सात वर्षीय बालक की कोटेश्वर बांध की झील में डूबने से मौत हो गई।

लेकिन, तब तक मासूम की सांसे थम चुकी थी। घटना के बाद से लोगों में टीएचडीसी कोटेश्वर के प्रति आक्रोश…

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर आज उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नेताओं का औपचारिक स्वागत किया।

चंद्रमा पर पानी से लेकर खनिजों की तक की खोज होती रही है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) अपोलो 17 मिशन ने लोगों को चंद्रमा को लेकर कई तरह के तथ्य बताए थे।

लाल सलाम से भगवा तक:कांग्रेस-केन्द्रित ‘लिबरल’ पत्रकारिता जब पत्रकारिता विचारधाराओं की कैदी बन गई(निष्पक्ष पत्रकारिता के पतन का वैचारिक विश्लेषण)

रुद्रपुर में सरस मेले की तैयारियों को लेकर व्यापक बैठक, मुख्यमंत्री धामी करेंगे भव्य

विकसित भारत की आधारशिला रख रहा केंद्रीय बजट- अजय भट्ट

रुद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय बजट की बारीकियों को साझा करते हुए क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट ने इसे देश के कायाकल्प…

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अंदाज़नाम बदला, पहचान मिली, अब सम्मान भी तय!‘मोहम्मद दीपक’ से दीपक कुमार तक का सफ़र—MYOI को भी भा गयाकोटद्वार।जिस देश में अक्सर नाम पूछकर नीयत तय होती हो, वहाँ कोटद्वार के दीपक कुमार ने नाम के आगे एक सवालिया निशान जोड़कर पूरे समाज को आईना दिखा दिया। ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित हुए दीपक अब इतने चर्चित हो चुके हैं कि MYOI ने भी उन्हें सम्मानित करने का मन बना लिया है।बताया जा रहा है कि यह सम्मान “आपसी सद्भाव और मानवीय मूल्यों” के लिए दिया जाएगा। यानी जो काम संविधान, शिक्षा और राजनीति को करना था, वह एक आम युवक ने नाम बदलकर कर दिखाया—और सिस्टम ने ताली बजा दी।पत्रकार सुधांशु थपलियाल के अनुसार दीपक का चयन समाज में भाईचारे की मिसाल पेश करने के लिए हुआ है। सवाल बस इतना है—क्या इस देश में सद्भाव के लिए नाम बदलना अनिवार्य शर्त बन चुका है?फिलहाल दीपक कुमार सम्मान की तैयारी में हैं, और समाज आत्ममंथन की—कि अगला सम्मान पाने के लिए कहीं आधार कार्ड के साथ नाम भी अपडेट तो नहीं करना पड़ेगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

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राष्ट्रीय स्तर भारतीय ज्ञान परीक्षा के लिए डीएसबी की छात्रा स्नेहा मुरारी का चयन

नैनीताल। सरोवर नगर नैनीताल स्थित कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर, नैनीताल की शिक्षा विभाग (आईटीईपी) की छात्रा स्नेहा मुरारी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कैंपस…

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हिमाद्री जन सेवा समिति द्वारा सिटी क्षेत्र में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

रुद्रपुर में हिमाद्री जन सेवा समिति (रजि०) के तत्वावधान में सिटी क्षेत्र स्थित सामिया परिसर में उत्तराखंड की लोक कला, लोक संस्कृति एवं लोक विरासत को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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सांस्कृतिक धरोहर।भू कानून क्यों जरूरी है उत्तराखंड में जानिए हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के साथ

हमारे देश के कई लोग हैं जो उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों का महत्व जानते हैं और आज जब उत्तराखंड जोशीमठ उज्ड रहा है तो कई लोग उसके लिए भी आवाज […]

उत्तराखंड संयुक्त आंदोलनकारी मंच एवं उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के तत्वाधान में किया गया मुख्यमंत्री आवास घेराव

उत्तराखंड संयुक्त राज्य आंदोलनकारी मंच एवं उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद, के संयुक्त तत्वाधान में भू अध्यादेश 1950, लोकायुक्त कानून का गठन ,मूल निवास, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को10% क्षैतिज आरक्षण, […]

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी जगमोहन नेगी परेड ग्राउंड से देहरादून मुख्यमंत्री आवास कुच

आज राज्य आंदोलनकारी मंच के नेतृत्व में सशक्त भू कानून और मूल निवास की माँग को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच में प्रतिभाग किया । राज्य की सम्मानित जनता का धन्यवाद […]

देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति, क्या कहा अध्यक्ष अनिल जोशी ने Hindustan global times

देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति के अध्यक्ष अनिल जोशी ने Hindustan global times इंटरव्यू मैं अपने 3 साल के कार्यकाल का उल्लेख किया उन्होंने बताया कैसे विषम परिस्थितियों में […]

देहरादून वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भुमा रावत मुख्यमंत्री आवास घेराव क्या कहा आप भी सुनिए

हिमाचलकीतर्ज़परहोभूक़ानून… की हमारी लगातार मांग का असर शासन सरकार व सत्ता को अब भलीभांती समझ में आ गया हैं… हम इस बड़ी कार्यवाही के लिए यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह […]

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भू कानून पर बनी सहमति, अगली कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव।

राज्य में सशक्त भू-कानून को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में भू-कानून लागू करने को सरकार पूरी तरह से तैयार […]

परेड ग्राउंड देहरादून से राज्य आंदोलनकारियों की आवाज भू कानून आप भी सुनिए क्या कहा

उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून और मूल निवास की मांग तेज हो गई है। दअरसल राज्य आंदोलनकारियों ने कल सशक्त भू कानून व मूल निवास लागू कराने को लेकर परेड ग्राउण्ड […]

शांति प्रसाद भट्ट भू कानून (अध्यादेश ) क्या कहा आप भी सुनिए हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

भू – कानून लागू करना आवश्यक ही नही बल्कि अति आवश्यक हो गया है।भू – कानून हिमाचल प्रदेश की तरह उत्तराखंड मे भी लाया जाए।

देहरादून शहीद स्मारक पर राज्य आंदोलनकारियों का जमावड़ा जुलूस की शक्ल में राज्य आंदोलनकारी पहुंच रहे हैं परेड ग्राउंड। शहीद स्मारक देहरादून की कुछ तस्वीरें Hindustan Global Times भूअध्यादेश 1950, मूल निवास, लोकायुक्त का गठन, प्रमुख मांगे

भू कानून की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने क्या कहा आज सुनिए।

उत्तराखंड मांगे भू कानून, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स।

इंनरलाइनपरमिट, #मूल_निवास1950, #भूकानून #आर्टिकल371 भू कानून क्यों जरूरी है आईए जानते हैं हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्सJournalist from Uttrakhand groupअवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी 1- #इंनरलाइनपरमिट यह एक […]