उत्तराखण्ड

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क्राइम और उत्तराखंड: क्या देवभूमि की पहचान पर लग रहा प्रश्नचिह्न?

त्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. 11 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है. इनमें आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के अलावा सचिवालय सेवा के अधिकारी भी शामिल हैं. 6 आईएएस,3 पीसीएस और दो सचिवालय सेवा के अधिकारियों के तबादले और उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया हैं.

बांग्लादेश की राजनीति ने बड़ा मोड़ ले लिया है. शेख हसीना अब सत्ता में नहीं हैं और लगभग डेढ़ साल बाद हुए संसदीय चुनाव में जनता ने नया विकल्प चुन लिया है. नतीजों से साफ है कि लोगों ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत देकर सत्ता सौंपने का फैसला किया है.

पेंशन वृद्धि स्वागतयोग्य, पर सम्मान की अंतिम रेखा अभी शेषउत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद का संपादकीय दृष्टिकोण

देश

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महाशिवरात्रि कावड़ यात्रा और वीवीआईपी कार्यक्रम के मद्देनज़र रुद्रपुर में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू

रुद्रपुर, 13 फरवरी 2026।महाशिवरात्रि कावड़ यात्रा और प्रस्तावित वीवीआईपी कार्यक्रम को देखते हुए 14 फरवरी…

मोहनपुर नंबर दो में शमशान घाट सुदृढ़ीकरण कार्य का शुभारंभ

रुद्रपुर। क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में शुक्रवार…

ऊधम सिंह नगर में ‘सरस मेला 2026’ की तैयारी तेज, स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा मंच

ऊधम सिंह नगर। जनपद में प्रस्तावित ‘सरस मेला 2026’ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां…

वैलेंटाइन डे, प्रेम और धोखे का सच: जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

14 फरवरी को दुनिया भर में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। इस दिन को संत…

दुनिया

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क्राइम और उत्तराखंड: क्या देवभूमि की पहचान पर लग रहा प्रश्नचिह्न?

त्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. 11 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है. इनमें आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के अलावा सचिवालय सेवा के अधिकारी भी शामिल हैं. 6 आईएएस,3 पीसीएस और दो सचिवालय सेवा के अधिकारियों के तबादले और उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया हैं.

बांग्लादेश की राजनीति ने बड़ा मोड़ ले लिया है. शेख हसीना अब सत्ता में नहीं हैं और लगभग डेढ़ साल बाद हुए संसदीय चुनाव में जनता ने नया विकल्प चुन लिया है. नतीजों से साफ है कि लोगों ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत देकर सत्ता सौंपने का फैसला किया है.

पेंशन वृद्धि स्वागतयोग्य, पर सम्मान की अंतिम रेखा अभी शेषउत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद का संपादकीय दृष्टिकोण

Express News

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पेंशन वृद्धि स्वागतयोग्य, पर सम्मान की अंतिम रेखा अभी शेषउत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद का संपादकीय दृष्टिकोण

रुद्रपुर उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में वृद्धि का निर्णय निस्संदेह एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक कदम है। मुख्यमंत्री…

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राजधानी दिल्ली में एक बड़ी प्रॉपर्टी डील होने जा रही है. इतनी बड़ी की देशभर में उसकी चर्चा हो रही है. इस डील में महाराजा साहब की हवेली शामिल है. दिल्ली के लुटियन जोन में 3.2 एकड़ में बने टिहरी गढ़वाल के महाराजा मनुजेंद्र शाह की कोठी बिकने जा रही है.

5 भगवान दास रोड पर बनी इस कोठी के लिए 1000 करोड़ रुपये की कीमत तय हुई है. जितनी चर्चा…

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दून में सनसनीखेज खुलासाशहीद कर्नल के बेटे अर्जुन शर्मा हत्याकांड का पर्दाफाश12 लाख की सुपारी, मां समेत पांच आरोपी गिरफ्तार – दो शूटर पुलिस मुठभेड़ में घायल

हल्द्वानी गल्ला मंडी डबल मर्डर का खुलासा: 4 आरोपी गिरफ्तार, पत्थरों से कुचलकर की गई थी शुभम और लक्ष्मी की हत्या

गल्ला मंडी में दोहरा हत्याकांड: लक्ष्मी पोखरिया और शुभम टम्टा की निर्मम हत्या से दहला हल्द्वानी, कई एंगल पर जांच तेज

चमोली में ‘हिम ऊर्जा पावर परियोजना’ पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सानियमों की अनदेखी, जनसुनवाई के अभाव और मुआवजे में भेदभाव के गंभीर आरोप

महाशिवरात्रि कावड़ यात्रा और वीवीआईपी कार्यक्रम के मद्देनज़र रुद्रपुर में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू

रुद्रपुर, 13 फरवरी 2026।महाशिवरात्रि कावड़ यात्रा और प्रस्तावित वीवीआईपी कार्यक्रम को देखते हुए 14 फरवरी 2026 को रुद्रपुर शहर में व्यापक यातायात एवं डायवर्जन व्यवस्था लागू की गई है। Uttarakhand…

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मोहनपुर नंबर दो में शमशान घाट सुदृढ़ीकरण कार्य का शुभारंभ

रुद्रपुर। क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में शुक्रवार को मोहनपुर नंबर दो में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिला पंचायत निधि से स्वीकृत…

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ऊधम सिंह नगर में ‘सरस मेला 2026’ की तैयारी तेज, स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा मंच

ऊधम सिंह नगर। जनपद में प्रस्तावित ‘सरस मेला 2026’ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित होने वाला यह मेला…

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वैलेंटाइन डे, प्रेम और धोखे का सच: जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

14 फरवरी को दुनिया भर में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। इस दिन को संत वेलेंटाइन की स्मृति से जोड़ा जाता है। परंपरा के अनुसार, तीसरी शताब्दी में रोमन साम्राज्य…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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उत्तराखंड में 17 अगस्त को घी त्यार,घी संक्रांति । सिंह संक्रांति ,ओगली संक्रांति , पर्वतीय आंचल में देसी घी से बनाए जाएंगे पकवान, किसी न किसी रूप में घी खाना होता है अनिवार्य।

किसी न किसी रुप में घी खाना अनिवार्य माना जाता है। ऐसी भी पीखाता वह अगले जन्म में गण्याल(घोंघा) बनता है। गाय के घी को प्रसाद स्वरुप सिर पर रखा […]

15 अगस्त ध्वजारोहण के क्या है नियम , (हिंदुस्तान Global Times) अवतार सिंह बिष्ट

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या अंतर है ? 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले […]

9 अगस्त 2023 परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास कुच,, भू अध्यादेश 1950

अखण्ड उत्तराखंड, सशक्त लोकायुक्त,रोजगार ,स्वास्थ्य, शिक्षा, जल_जंगल जमीन महिलाओं की सुरक्षा बिधर्मीयों से उत्तराखंड की सुरक्षा, सशक्त भू कानून, मूल निवास, 70% मुल निवासियों को सरकारी एवं गैर-सरकारी रोजगार मे […]

रक्षाबंधन ज्योतिष गणना के अनुसार

रक्षाबंधन महापर्व 31 अगस्त 2023सभी सनातन धर्म प्रेमियों को सादर प्रणाम।विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म पर्व को लेकर संशय (भ्रम) की स्थिति बनी हुई है। […]

शैल सांस्कृतिक समिति के द्वारा शैल पावन धाम में स्वच्छता अभियान

शैल सांस्कृतिक समिति के द्वारा शैल पावन धाम , स्थित नेशनल हाईवे अटरिया रोड मोड़, पर आज सफाई अभियान किया गया। आपको अवगत करा दें, समय-समय पर स्वच्छता अभियान के […]

भ्रष्टाचार के दलदल में उत्तराखंड ,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगाएंगे नैया पार लोगों को है उम्मीद। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

म ताकि सनद रहे।हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद अवतार सिंह बिष्ट।भ्रष्टाचारमुक्तउत्तराखंड हम उत्तराखंड में संगठित लूट का विरोध करते हैं। जिस प्रकार से नेताओं मंत्रियों के […]

ताकि सनद रहे उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ,Hindustan Global Times, अवतार सिंह बिष्ट ,ताकि सनत रहे, उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनउत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन, उत्तराखण्ड राज्य के बनने से पहले की वे घटनाएँ हैं जो […]

9 अगस्त को गर्जेगी राज्य आंदोलनकारियों की आवाज ,परेड ग्राउंड देहरादून से मुख्यमंत्री आवास कुच,

उत्तराखंड राज्य आंदोलन की एक अवधारणा थी ।हमारे मूल अधिकार सुरक्षित होंगे ।पहाड़ी राज्य अस्तित्व में आएगा। जल, जंगल, जमीन, स्वास्थ, शिक्षा, नौकरी, संस्कृति, पौराणिक अध्यात्मिक केंद्रों पर हमारा एकाधिकार […]

भारतीय वायु सेना ने पहली बार पाकिस्तान पर ऐसा हमला किया है, जिसका जिक्र इतिहास की किताबों में किया जाएगा। भारत के साथ साथ दुनिया भी इस बात से हैरान है कि कैसे पांच घंटे के अंदर डिनर में पूरा पाकिस्तान भारतीय सेना प्लेट में रखकर खा गई।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान केवल 180 मिनट में पाकिस्तानी वायु सेना के 20 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने वाली भारतीय वायुसेना ने एक ऐसा खेल कर दिया है जो हर […]