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सिद्धबली बाबा के आशीर्वाद से नई ट्रेडिंग कंपनी की शुरुआत, रोजगार सृजन का संकल्प

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भीलवाड़ा का संकट—उत्तराखंड के औद्योगिक तंत्र के लिए चेतावनी

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शनिवार, 4 अप्रैल 2026 का दिन इसी ऐतिहासिक घटना का साक्षी बन रहा है। आसमान में शनिदेव ने अपनी नींद त्याग दी है और उनकी अमृतमयी दृष्टि 12 में से 5 विशेष राशियों पर सीधे पड़ रही है।

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रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जनपद में कानून की अवहेलना करने वाले जनप्रतिनिधियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसी क्रम…

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हिन्दू आस्था पर पहरा: बदरीनाथ में नए नियमों से उठे सवाल!बदरीनाथ धाम में नई व्यवस्था: आस्था पर सवाल या प्रबंधन की सख्ती?

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300 रुपये किलो गैस की लूट पर बड़ा प्रहार! ‘छोटू सिलेंडर’ बना गरीब और प्रवासी मजदूरों की उम्मीद, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खबर से मचा हड़कंप — प्रशासन से लेकर…

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सिद्धबली बाबा के आशीर्वाद से नई ट्रेडिंग कंपनी की शुरुआत, रोजगार सृजन का संकल्प

रुद्रपुर उत्तराखंड।कोटद्वार क्षेत्र के युवा उद्यमी विनय चंद्रा ने आज सिद्धबली बाबा के पावन आशीर्वाद के साथ अपनी नई ट्रेडिंग कंपनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण में…

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भीलवाड़ा का संकट—उत्तराखंड के औद्योगिक तंत्र के लिए चेतावनी

रुद्रपुर उत्तराखंड राजस्थान की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा, जिसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता है, इस समय एक अभूतपूर्व औद्योगिक संकट से गुजर रही है। करीब 80 से 90 हजार करोड़…

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शनिवार, 4 अप्रैल 2026 का दिन इसी ऐतिहासिक घटना का साक्षी बन रहा है। आसमान में शनिदेव ने अपनी नींद त्याग दी है और उनकी अमृतमयी दृष्टि 12 में से 5 विशेष राशियों पर सीधे पड़ रही है।

आज से इन 5 राशियों के जीवन से दरिद्रता और संघर्ष का अंत होगा और महाकल्याण शुरू होगा। आइए पढ़ते हैं इस महाबदलाव की कहानी। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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उत्तराखंड के रुद्रपुर इलाके से हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है जहां बदमाशों ने लोगों के घर के बाहर जमकर उत्पात मचाया. हाथों में तलवार और धारदार हथियार लेकर बदमाश गली में घूम रहे थे.

इससे जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हादसे के दौरान आरोपियों ने तलवार और डंडों से खड़ी कार को तोड़ने की कोशिश की. कहा जा रही […]

उत्तराखंड में आज मौसम बिगड़ा रहेगा। कुमाऊं के ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल व चंपावत जिले के अधिकांश इलाकों में बारिश होने की संभावना है। जबकि, इन जिलों के 2800 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में बर्फबारी होने के आसार हैं।

केंद्र की ओर से 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और ओलावृष्टि के साथ कुछ स्थानों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, […]

उत्तराखंड के सैकड़ों सरकारी स्कूल एक या दो छात्रों के भरोसे चल रहे हैं। यह प्राइवेट स्कूलों के प्रति बढ़ता रुझान है या फिर पलायन का असर, सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।

प्रदेश के 1500 से ज्यादा स्कूलों में छात्रों की संख्या एक से पांच तक ही सिमटी हुई है। प्रदेश में 130 स्कूल ऐसें हैं जहां केवल एक ही छात्र का […]

पुणे में राज्य परिवहन निगम (एसटी) के अत्यंत व्यस्त स्वारगेट बस स्टैंड में खड़ी बस में एक युवती के साथ बलात्कार की घटना ने एक बार फिर समाज के जागरूक लोगों को झकझोर कर रख दिया है.

घटना बुधवार की सुबह करीब पौने छह बजे घटी और उस समय बस अड्डा परिसर में कई लोग मौजूद थे तथा कई बसें भी थीं. क्या कोई ऐसी परिस्थिति में […]

भारत के इतिहास में कई ऐसे नाम दर्ज हैं, जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ और लालच के चलते देश से गद्दारी की. उनकी इस गद्दारी का ही नतीजा था कि भारत पर मुगलों और अंग्रेजों का शासन लगभग दो शताब्दियों तक बना रहा.

इन गद्दारों ने न केवल देश के वीर राजाओं को पराजित कराया, बल्कि विदेशी आक्रांताओं को यहां पांव जमाने का मौका भी दिया. प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल […]

दक्षिण अफ्रीका के शीर्षक्रम के बल्लेबाज रसी वान डर डुसेन ने कहा कि यह जानने के लिए ‘रॉकेट साइंटिस्ट’ होने की जरूरत नहीं है कि भारत को चैंपियंस ट्रॉफी में दुबई में खेलने का फायदा मिल रहा है।

डुसेन को लगता है कि वहां के हालात को भारत अच्छी तरह से पहचान गया है और इससे उनपर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव बन रहा है। प्रिंट मीडिया, शैल […]

भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में अपने अभियान में शानदार तरीके से आगे बढ़ रही है. बांग्लादेश और पाकिस्तान को पटखनी देने के बाद उसका सामना न्यूजीलैंड से है. इससे पहले टीम इंडिया पर साउथ अफ्रीका के स्टार खिलाड़ी रासी वैन डर डुसैं ने बड़ा हमला बोला है.

भारतीय टीम के सभी मैच एक ही जगह (दुबई) में होने के चलते रासी ने कहा है कि इसे समझने के लिए रॉकेट साइंटिस्ट की जरूरत नहीं है कि भारत […]

राशिफल के अनुसार, 28 फरवरी 2025 का दिन सभी राशियों के लिए विशेष रहेगा, खासकर मां लक्ष्मी की कृपा से कुछ राशियों के लिए यह दिन शुभ साबित होगा। आइए जानते हैं कि आज का दिन आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा:

मेष (Aries) आज का दिन मेष राशि के जातकों के लिए बहुत शुभ रहेगा। आप नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं और कोई विशेष व्यक्ति आपके संपर्क में आ […]

28 फरवरी 2025: इस दिन चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करते हुए कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं। इस कारण कुंभ राशि में त्रिग्रह योग बन रहा है।

इसके अलावा, बुध, शुक्र और राहु मीन राशि में मिलकर एक और त्रिग्रह योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की इस विशेष स्थिति के चलते मेष से लेकर मीन […]

महाशिवरात्रि पर मंदिर से घर लौट रही मासूम से कार चालक ने दिनदहाड़े छेड़छाड़ की। वारदात को उस समय अंजाम दिया गया जब बच्ची मां व चाची के संग कार से हल्द्वानी की ओर आ रही थी।

बेटी से छेड़छाड़ करने पर मां ने रास्ते में ही टैक्सी रूकवाई और सीधे थाने पहुंचकर शिकायत की। पुलिस ने कार को पकड़कर सीज किया और आरोपित को गिरफ्तार कर […]