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जीन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, उनमें केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी अकेले और सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सभी राज्यों में पार्टी किसी न किसी गठबंधन के साथ चुनावी रण में है, फिर भी ये सस्पेंस बना हुआ है कि पार्टी के सबसे बड़े चेहरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं?

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और कांग्रेस ही ऐसी इकलौती पार्टी है…

“मानवता की मौत या सिस्टम की नाकामी? किच्छा की घटना ने दोनों पर खड़े किए सवाल

किच्छा की सड़कों पर हुई यह दर्दनाक घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह…

मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

पिथौरागढ़।उत्तराखंड में सत्तारूढ़ दल के बहुप्रचारित “मिशन 2027” के बीच पिथौरागढ़ से आई एक सनसनीखेज…

#फेक_काउंटर_की_कहानी : रणवीर सिंह से मिशन 2027 तक, सिस्टम की सच्चाई का काला आईना

उत्तराखंड,साल 2009…देहरादून की सड़कों पर सामान्य दिन जैसा माहौल था। पहाड़ की शांति, राजधानी की…

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कुमाऊं की शांत वादियों में आतंकी साया! सितारगंज से पकड़े गए असलहा तस्करों का अलबदर कनेक्शन उजागर

रुद्रपुर,उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की शांत फिजाओं में एक बार फिर आतंकी गतिविधियों की दस्तक ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता…

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“पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी, मैदानी इलाकों में खिली धूप—उधम सिंह नगर में मौसम साफ”

उत्तराखंड में मौसम ने हल्का करवट लेना शुरू कर दिया है। पर्वतीय जिलों में जहां हल्की बारिश और ऊंचाई वाले…

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मानव शृंखला से जनशक्ति तक: देहरादून में मोदी का रोड शो—राजनीति, संदेश और 2017 की पुनरावृत्ति”देहरादून में ऐतिहासिक स्वागत, रुद्रपुर में विकास पर सवाल—रिंग रोड बना राजनीतिक मुद्दा”

“नासिक से सिडकुल तक: उद्योगों में ‘सुरक्षा’ का दावा या शोषण का अघोषित तंत्र?”

महाराष्ट्र के चर्चित मालेगांव ब्लास्ट 2008 केस में पहले फंसे फिर बरी हुए कर्नल श्रीकांत पुरोहित को प्रमोशन मिल गया है। भारतीय सेना ने उन्हें ब्रिगेडियर पद पर पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी है।

“कलम का योद्धा मौन हुआ: भास्कर पोखरियाल नहीं रहे, पत्रकारिता का एक युग हुआ समाप्त”

जीन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, उनमें केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी अकेले और सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सभी राज्यों में पार्टी किसी न किसी गठबंधन के साथ चुनावी रण में है, फिर भी ये सस्पेंस बना हुआ है कि पार्टी के सबसे बड़े चेहरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं?

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और कांग्रेस ही ऐसी इकलौती पार्टी है जिसके उम्मीदवार सभी सीटों पर चुनाव मैदान में हैं. जिन उम्मीदवारों पर पार्टी ने दांव…

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“मानवता की मौत या सिस्टम की नाकामी? किच्छा की घटना ने दोनों पर खड़े किए सवाल

किच्छा की सड़कों पर हुई यह दर्दनाक घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक संवेदनहीनता का आईना है, जो आज धीरे-धीरे हमारी व्यवस्था और मानसिकता दोनों में…

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मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

पिथौरागढ़।उत्तराखंड में सत्तारूढ़ दल के बहुप्रचारित “मिशन 2027” के बीच पिथौरागढ़ से आई एक सनसनीखेज खबर ने सरकार की कानून-व्यवस्था और जवाबदेही के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।…

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#फेक_काउंटर_की_कहानी : रणवीर सिंह से मिशन 2027 तक, सिस्टम की सच्चाई का काला आईना

उत्तराखंड,साल 2009…देहरादून की सड़कों पर सामान्य दिन जैसा माहौल था। पहाड़ की शांति, राजधानी की हलचल, रोजगार की तलाश में आए युवा, भविष्य के सपनों से भरी आंखें… इसी भीड़…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (ट्रेड फेयर) में इस बार सभी राज्यों ने मेले के विषय ‘विकसित भारत एट 2047’ को परिभाषित करते हुए अपने थीम पवेलियन का निर्माण किया है। साथ ही अपने राज्य की कला संस्कृति व विविधता को भी खूबसूरत तरीके से प्रदर्शित किया है।

इसके अलावा दिल्ली सरकार के कुछ विभागों जैसे दिल्ली जेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पर्यटन, उद्योग, दिल्ली एम्पोरियम, समाज कल्याण विभाग के स्टालों में गतिविधियों सहित उपलब्धियों व भविष्य की कार्ययोजनाओं […]

मार्गशीर्ष का महीना शुरू हो चुका है. हिन्दू धर्म में इस महीने का विशेष महत्व होता है. मार्गशीर्ष माह भगवान कृष्ण व माता लक्ष्मी की अराधना के लिए बहुत अच्छा माना जाता है.

मार्गशीर्ष महीने का व्रत 2024 इस महीने कई महत्वपूर्ण व्रत भी होंगे जो इस प्रकार हैं… 16 नवंबर को वृश्चिक संक्रांति, 18 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी, 22 नवंबर कालभैरव जयंती, 23 […]

आधार कार्ड भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। बैंक में खाता खुलवाना हो, लोन लेना हो या फिर सरकारी सुविधाओं का लाभ लेना हो, हर जगह आपसे आधार कार्ड मांगा जाएगा। आधार कार्ड से कई काम आसानी से हो जाते हैं लेकिन अगर इसे इस्तेमाल करने में सावधानी नहीं बरती, तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता है।

ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें आधार कार्ड के जरिए धोखाधड़ी की गई है। दरअसल, आधार कार्ड से हमारे बायोमैट्रिक समेत कई पर्सनल डेटा जुड़ा होता है और […]

नामी गिरामी कंपनियों के नाम पर आने वाले मैसेज में शामिल लिंक साइबर अपराधियों का हथियार भी हो सकते हैं. इसके बावजूद मोबाइल उपभोक्ता भ्रमित होते हैं और लिंक पर क्लिक कर गाढ़ी कमाई गवां बैठते हैं.

इसके चलते सरकार ने सभी कंपनियों से कहा है कि वो कोई भी लिंक या मैसेज एंक्रिप्टेड ऐप के जरिए भेजें. ऐसे में आने वाले दिनों में कंपनियां मैसेज में […]

कार्तिक पूर्णिमा के बाद अब सबसे बड़ा हिंदू त्योहार काल भैरव जयंती है. और काल भैरव जयंती हर साल मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भैरव का अवतरण हुआ था.

कालभैरव जयंती का दूसरा नाम कालाष्टमी है और इस दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार कालभैरव की पूजा और व्रत करने की परंपरा है. मान्यता के अनुसार काल भैरव का […]

हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है वही रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा को समर्पित होता है इस दिन भक्त भगवान श्री सूर्यदेव की विधिवत पूजा करते हैं और दिनभर उपवास भी रखते हैं

लेकिन इसी के साथ ही अगर इस दिन पूजा पाठ के दौरान आदित्य स्तोत्र का पाठ श्रद्धा भाव से किया जाए तो मनचाही नौकरी की इच्छा पूरी हो जाती है […]

वैदिक पंचांग के अनुसार 17 नवंबर 2024 को मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और दिन रविवार है। इस तिथि पर शिव योग और रोहिणी नक्षत्र का निर्माण हो रहा है।

ज्योतिर्विद डॉ. संजीव शर्मा द्वारा 17 नवंबर, रविवार का राशिफल बताया गया है, साथ ही 12 राशियों के लिए उपाय भी बताए गए हैं। आइए आज का राशिफल और उपाय […]

उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के आठ खिलाड़ियों का चयन आइपीएल आक्शन के लिए हुआ है। एसोसिएशन के सचिव महिम वर्मा ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों में आकाश मधवाल, राजन सिंह, स्वप्निल सिंह, युवराज चौधरी, संस्कार रावत, अखिल सिंह रावत, प्रशांत चौहान और अवनीश सुधा शामिल हैं।

ऊधम सिंह नगर के गढ़ीनेगी निवासी अवनीश सुधा ने उत्तराखंड प्रीमियर लीग में 60 गेंदों पर 196.67 की स्ट्राइक रेट से 118 रनों की नाबाद पारी खेली। यूपीएल में शानदार […]

ईरान के न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर पर हुए हमले की खबर जंगल में आग की तरह फैल रही है. ये न्यूक्लियर विकास कार्यक्रम ही तो है, जिसे लेकर ईरान प्रतिबंधों की मार झेल रहा है. ऐसी मार कि कुछ साल और ऐसे ही चला तो भीख का कटोरा पाकिस्तान से ईरान ट्रांसफर हो सकता है.

ये न्यूक्लियर पावर बनने की ही तो ज़िद है, जिसने चौधरी अमेरिका को ईरान के खिलाफ खड़ा कर दिया है. ये न्यूक्लियर पावर वाली सनक ही तो है जिसकी वजह […]

फिल्मों में कई बार एलियन पर आधारित कहानी को दर्शाया जाता हैं. लेकिन क्या सच में इस दुनिया में एलियन होते हैं? क्या फिल्म वाला ‘जादू’ इस धरती पर मौजूद हैं? क्या आसमान में कभी-कभी दिखाई देने वाली संदिग्ध गतिविधि UFO तो नहीं?

ये सवाल हर किसी के ज़हन में आते होंगे लेकिन शायद ही इसका सटीक जवाब कभी मिल पाया है. हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट दुनियाभर में कुछ […]