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उत्तराखंड में टीबी का विस्फोट: दावों की चमक के पीछे सड़ती हकीकत?पहाड़ों में बीमारी का साम्राज्य: जिम्मेदार कौन? “टीबी मुक्त उत्तराखंड” सिर्फ एक नारा

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हरदा की “खांसी” या कांग्रेस की चेतावनी? उत्तराखंड कांग्रेस में उभरता अंतर्विरोध

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पौड़ी में हिमालय क्रांति पार्टी का जनसंपर्क अभियान तेज, क्षेत्रीय दलों की ओर बढ़ता जनरुझान

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रुद्रपुर में PCPNDT टीम की बड़ी कार्रवाई: 8 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक छापेमारी, अवैध लिंग जांच पर सख्ती

रुद्रपुर, 06 अप्रैल 2026। जनपद में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के…

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रुद्रपुर में भक्ति की गूंज और नानकमत्ता में सियासी शक्ति प्रदर्शन — पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का दोहरा अंदाज़ चर्चा में

अमेरिकी वायुसेना के दूसरे पायलट का रेस्क्यू कर लिया गया है. ईरान ने 3 अप्रैल को अमेरिकी वायुसेना का F-15E मार गिराया था. इसमें दो पायलट थे. एक पायलट को तो उसी दिन सुरक्षित बचा लिया गया था.

पेंशनर्स सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की बैठक में गूंजा वरिष्ठों का दर्द, अग्रसेन ट्रस्ट भी रहा साथ

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं. जानकारी के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था जिसके बाद लापता पायलट को बचाने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने एक हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

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अमेरिकी वायुसेना के दूसरे पायलट का रेस्क्यू कर लिया गया है. ईरान ने 3 अप्रैल को अमेरिकी वायुसेना का F-15E मार गिराया था. इसमें दो पायलट थे. एक पायलट को तो उसी दिन सुरक्षित बचा लिया गया था.

लेकिन दूसरा पायलट दो दिन से लापता था. अब खबर है कि दूसरे पायलट का भी अमेरिकी रेस्क्यू टीम ने…

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पेंशनर्स सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी की बैठक में गूंजा वरिष्ठों का दर्द, अग्रसेन ट्रस्ट भी रहा साथ

रुद्रपुर। आज महाराजा अग्रसेन परिसर में आयोजित बैठक में पेंशनर्स सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी-उत्तराखण्ड के बैनर तले वरिष्ठ नागरिकों की…

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मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं. जानकारी के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था जिसके बाद लापता पायलट को बचाने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने एक हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

रुद्रपुर में शिक्षा नहीं, ‘स्टेटस’ का खेल? डीपीएस के खिलाफ सोमवार से बड़ा आंदोलन, अभिभावकों में उबाल

विशेष संपादकीय (सार): “हरक सिंह रावत—एजेंट का तमगा या सियासत का सच?”

रुद्रपुर/उत्तराखंड | गैस कालाबाजारी पर सख्ती, ‘छोटू सिलेंडर’ समाधान की ओर बढ़ा प्रशासन — हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खबर का बड़ा असर

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उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हरीश रावत (हरदा) केंद्र में हैं—और इस बार वजह कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि उनका एक भावनात्मक लेकिन तीखा फेसबुक पत्र है। यह…

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पौड़ी में हिमालय क्रांति पार्टी का जनसंपर्क अभियान तेज, क्षेत्रीय दलों की ओर बढ़ता जनरुझान

पौड़ी। हिमालय क्रांति पार्टी (HKP) ने विधानसभा क्षेत्र पौड़ी में जनसंपर्क अभियान को गति देते हुए विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की नीतियों और दृष्टिपत्र को जन-जन तक पहुंचाने का…

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रुद्रपुर, 06 अप्रैल 2026। जनपद में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए आज व्यापक स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाया।…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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धनतेरस के दिन के इन मंत्रों का जाप करें होगा लाभ,जानिए कौन कौन से मंत्र है धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जो आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं।

इस दिन विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है ताकि घर में समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि बनी रहे। कुबेर धन के अधिपति यानि धन के राजा हैं। पृथ्वीलोक की समस्त […]

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में मंगलवार रात जमकर बवाल हुआ। दीपावली के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को विरोध को लेकर दो छात्र गुट आमने-सामने आ गए।

गेट नंबर सात पर हुआ बवाल दरअसल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दीपावली उत्सव के उपलक्ष्य में एबीवीपी के राष्ट्रीय कला मंच की ओर से ‘ज्योतिर्मय 2024’ कार्यक्रम का आयोजन किया […]

इस वर्ष रमा या रंभा एकादशी 28 अक्टूबर, दिन सोमवार को मनाई जा रही है।

रंभा एकादशी कब है 2024 में। कब और क्यों मनाई जाती है रमा एकादशी। पंचांग के अनुसार रमा एकादशी व्रत 28 अक्टूबर को। हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह […]

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 30 अक्टूबर को ये पर्व मनाया जाएगा।

हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक दीपावली (Diwali 2024) नजदीक है। यह पर्व भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद […]

अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए हर साल माताएं अहोई मां का व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी का पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, खुशहाली और समृद्धि की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को तारा देखकर अपना व्रत खोलती हैं। अहोई अष्टमी […]

उत्तराखंड,दीपावली महापर्व 1 नवंबर 2024* दीपोत्सव महालक्ष्मी पर्व 1 नवंबर 2024 को ही संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाएगा। सनातन धर्म के लिए अत्यंत विडंबना का विषय है जहां पर संचार सेवाएं अत्यंत सशक्त होने के कारण इसका सदुपयोग होना चाहिए परन्तु दुरुपयोग हो रहा है सनातन धर्म में विघटन की स्थिति उत्पन्न हो गई है हिंदू धर्म के अनुयायी दो गुटों में विघटित हो रहे हैं जो कि हमारे सनातन धर्म के लिए सोचनीय विषय है और हम अन्य धर्म के लिए उपहास के पात्र बनते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इससे पूर्व ऐसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। 1962, 1963 तथा 2013 में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी उस स्थिति में जब दो दिन अमावस्या तिथि पर प्रदोष व्याप्त हो दूसरे दिन ही दीपोत्सव मनाया गया था। दीपावली पर्व के संबंध में यदि इस प्रकार का कोई भी संशय हो तो धर्म शास्त्रों में उसका निर्णय कुछ इस प्रकार दिया हुआ है जिससे मै आपको अवगत करा रही हूं – यदि दो दिन प्रदोष व्यापिनी अमावास्या होती है तो दूसरे दिन दीपावली (महालक्षमी) पर्व मनाना चाहिये- *दिनद्वये प्रदोषसत्त्वे परः।* *दण्डेकरजनीयोगे दर्शः स्यात्तु परेऽहनि ।* *तदा विहायपूर्वेद्युः परेऽह्नि सुखरात्रिका ।।* इस वर्ष 31 अक्टूबर तथा 1 नवम्बर, 2024 को कार्तिक कृष्ण अमावास्या प्रदोषव्यापिनी है। अतः 1 नवम्बर 2024 को ही दीपावली (महालक्ष्मी) पर्व मनाना शास्त्रोक्त है। प्रदोषव्यापिनी (सूर्यास्त के बाद त्रिमुहूर्त्त) कार्तिक अमावस्या के दिन ही दीपावली (महालक्ष्मी-पूजन) मनाने की शास्त्राज्ञा है। इसवर्ष 31 अक्तूबर 2024 के दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समाप्तिकाल अपराह्न 3:53 पर है। अतः चतुर्दशी समाप्ति के साथ ही कार्तिक अमावस्या प्रारंभ होकर अगले दिन 1 नवम्बर2 024 शुक्रवार सायं 06:17 तक व्याप्त है। स्पष्ट है- अगले दिन 1 नवम्बर 2024 प्रदोषकाल में अमावस तिथि की व्याप्ति कम समय के लिए है। (क्योंकि पंजाब, हिमाचल, जम्मू आदि राज्यों में सूर्यास्त लगभग 05:35 पर होगा।), जबकि 31 अक्तूबर, 2024 को अमावस्या पूर्णतया प्रदोष एवं निशीथकाल को व्याप्त कर रही है। परन्तु फिर भी शास्त्रनिर्देशानुसार ‘दीपावली पर्व महालक्ष्मी-पूजन 1 नवम्बर, शुक्रवार, 2024 को ही मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा– यथा शास्त्र वाक्य- *अथाश्विनामावस्यायां प्रातरभ्यंगः प्रदोषे दीपदानलक्ष्मी-पूजनादि विहितम् । तत्र सूर्योदयं व्याप्ति-अस्तोत्तरं घटिकाधिकरात्रिव्यापिनी दर्शे सति न संदेहः* ।।(धर्मसिन्धु) (अर्थात् कार्तिक अमावस्या को प्रदोष के समय लक्ष्मीपूजनादि कहा गया है। उसमें यदि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के अन्तर 1 घड़ी (24 मिनट) से अधिक रात्रि तक (प्रदोषकाल) अमावस्या हो, तो बिना संदेह उसी दिन पर्व मनाए। *उभयदिने प्रदोषव्याप्तौ परा ग्राह्या । ‘दण्डैकरजनीयोगे दर्शः स्यात्तु परेऽहनि।* *तदा विहाय पूर्वेद्यु परेऽह्नि सुखरात्रिकाः ।*’ (तिथितत्त्व) अर्थात् यदि दोनों दिन प्रदोषव्यापिनी होय, तो अगले दिन करें-क्योंकि तिथितत्त्व में ज्योतिष का वाक्य है-एक घड़ी रात्रि (प्रदोष) का योग होय तो अमावस्या दूसरे दिन होती है, तब प्रथम दिन छोड़कर अगले दिन सुखरात्रि होती है।) यद्यपि-दीपावली के दिन निशीथकाल में लक्ष्मी का आगमन शास्त्रों में अवश्य वर्णित है परंतु कर्मकाल (लक्ष्मी पूजन, दीपदान-आदि का काल) तो प्रदोष ही माना जाता है। लक्ष्मीपूजन, दीपदान के लिए प्रदोषकाल ही शास्त्र प्रतिपादित है- *प्रदोषसमये लक्ष्मीं पूजयित्वा ततः क्रमात्।* *दीपवृक्षाश्च दातव्याः शक्त्या देवगृहेषु च ।।* निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु, पुरुषार्थ-चिन्तामणि, तिथि-निर्णय आदि ग्रन्थों में दिए गए शास्त्रवचनों के अनुसार दोनों दिन प्रदोषकाल में अमावस्या की व्याप्ति कम या अधिक होने पर दूसरे दिन ही अर्थात् सूर्योदय से सूर्यास्त (प्रदोषव्यापिनी) वाली अमावस्या के दिन लक्ष्मीपूजन करना शास्त्रसम्मत होगा। *इसके अतिरिक्त दिवाली पर्व पर स्वाति नक्षत्र का होना भी अति आवश्यक है क्योंकि एक नवंबर 2024 को ही पड़ रही है।* अतः सभी शास्त्र-वचनों पर विचार कर हमारे मतानुसार 1 नवम्बर, 2024 शुक्रवार को ही दीपावली पर्व तथा लक्ष्मीपूजन करना शास्त्रसम्मत होगा। सम्पूर्ण भारत में यह पर्व इसी दिन होगा। यही निर्णय भारत के अधिकतर पंचाङ्गकारों को मान्य है। परम्परा अनुसार तथा गत अनेक उदाहरण भी इसी मत को मान्यता देते हैं। (*इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत रूप से व्यावहारिक पहलू पर भी अवश्य विचार करने को कहूंगी उत्तराखंड में जितने भी पंचांग हैं उन सभी में 1 नवंबर 2024 को दीपोत्सव मनाने का निर्णय दिया गया है तो पंचांगकारों के परिश्रम को भी सम्मान देते हुए 1 नवंबर को ही दीपोत्सव मानना शास्त्र सम्मत होगा क्योंकि हर छोटे बड़े धार्मिक अनुष्ठान हेतु हम हमारे प्रदेश में बन रहे पंचांगों का ही प्रयोग करते हैं।)

इसमें ज्योतिष के जानकारों के साथ ही कई मंदिरों के प्रमुख व धार्मिक संगठन के सदस्य शामिल हुए। कई शास्त्रों और पंचांगों का उल्लेख करते हुए कार्तिक अमावस्या के दूसरे […]

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या का मामला सामने आया है। खबर है कि प्रॉपर्टी डीलर को उन्हीं की फॉर्च्यूनर कार में जिंदा जला कर मार दिया गया।

हत्या का शक मृतक के दोस्तों पर है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया है। हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह […]

केदारनाथ उपचुनाव में भाजपा के 40 स्टार प्रचारक चुनाव प्रचार गरमाएंगे। पार्टी नेतृत्व ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। सूची में सीएम पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सरकार के मंत्री, सांसद, व पूर्व सीएम के अलावा पार्टी पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।

महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आशा नौटियाल का भी नाम है। आशा केदारनाथ उपचुनाव से टिकट की दावेदारी कर रही हैं। पार्टी के पैनल में उनका नाम सबसे ऊपर है। […]

लालकुआं: हल्दूचौड़ के दौलिया नंबर एक में सस्ते गल्ले की दुकान को लेकर विवाद हो गया। इसी बीच कार सवार युवकों ने पूर्व सैनिक पर तमंचे से फायरिंग करते हुए पथराव शुरू कर दिया।

माहौल खराब होता देख आसपास की दुकानें भी बंद हो गई, सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से कारतूस के दो खाली खोखे और एक जिंदा कारतूस बरामद किया। इसके […]

साइबर अपराध कितना खतरनाक है इसका अंदाजा प्रदेशवासियों से हो रही ठगी से लगाया जा सकता है। साइबर अपराधी हर दिन प्रदेश की जनता से लगभग 46 लाख रुपये ठग रहे हैं। यह आंकड़ा इस साल अब तक साइबर वित्तीय हेल्पलाइन पर आई शिकायतों के आधार पर है।

जबकि, जो शिकायतें सीधे थाने और जिलों की साइबर सेल के पास पहुंचती हैं, उन्हें मिलाकर यह आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है। हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार […]