नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। नेपाल के प्रभावित क्षेत्र में यदि कोई उत्तराखंड निवासी फंसा है या किसी परिचित के संबंध में जानकारी चाहिए तो प्रशासन ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

Spread the love

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने लोगों से अपील की है कि नेपाल में फंसे किसी उत्तराखंड निवासी की जानकारी होने पर तत्काल अधिकृत हेल्पलाइन पर संपर्क करें। संबंधित व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, नेपाल में संभावित स्थान और उपलब्ध अन्य जानकारी देने से राहत एवं बचाव के लिए त्वरित समन्वय किया जा सकेगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

6 हेल्पलाइन और एक टोल फ्री नंबर जारी

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के हेल्पलाइन नंबर 0135-2710334, 0135-2710335, 0135-2664314, 0135-2664315, 0135-2664316 और 8218867005 जारी किए गए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1070 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आपदा संबंधी सूचना केवल अधिकृत माध्यमों से साझा करने की अपील की है। जिला प्रशासन राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

नेपाल से आने वाली संभावित फ्लैश फ्लड वेव को लेकर बिहार में गंडक नदी के किनारे बसे 8 जिलों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। नेपाल में अचानक बढ़े जलप्रवाह का असर बिहार तक पहुंचने की आशंका के मद्देनजर पश्चिम चंपारण से लेकर गोपालगंज, मोतिहारी, सारण, सीतामढ़ी, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और सीवान तक प्रशासन को अलर्ट मोड में रखा गया है।

पश्चिम चंपारण प्रशासन ने नेपाल सीमा और गंडक नदी के तटवर्ती गांवों में एहतियाती कदम तेज करने के निर्देश दिए हैं। लोगों से साफ कहा गया है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नदी और निचले इलाकों में पूरी सावधानी बरतें।जानकारी के मुताबिक बुधवार रात करीब 8 बजे के बाद गंडक बराज पर पानी आना शुरू हुआ। देर रात 12 बजे तक जलस्राव बढ़कर करीब 1.50 लाख क्यूसेक पहुंच गया।हालांकि इसके बाद राहत की तस्वीर सामने आई। रात करीब 12:30 बजे जलस्राव घटकर 1.42 लाख क्यूसेक और रात 2 बजे तक करीब 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। विभाग का आकलन है कि बराज पर जलस्राव में अब और कमी आ सकती है।फिर भी संभावित फ्लैश फ्लड वेव को देखते हुए प्रशासन किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

पश्चिम चंपारण में 10 प्रखंड हाई अलर्ट पर हैं।बाढ़ की आशंका को देखते हुए पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी की जा रही है।गंडक किनारे स्थित चकदहवा, झंडूवा टोला और बिन टोली समेत आसपास के इलाकों में पानी प्रवेश करने की सूचना है। गंडक बराज के पास नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ कुछ वाहन बहकर आने की भी जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में सिलेंडर और घरेलू सामान भी पानी में बहते दिखाई दिए।प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने और किसी भी अफवाह पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।

पश्चिम चंपारण में कंट्रोल रूम नंबर जारी किया गया है।संभावित आपात स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम नंबर भी जारी किए हैं। किसी भी आपात स्थिति में लोग 06254-247003 और 06254-247002 पर संपर्क कर सकते हैं।संबंधित अधिकारियों और कार्यपालक अभियंताओं को नेपाल सीमा से लगे गांवों और गंडक के तटवर्ती इलाकों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गोपालगंज में भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। दियारा इलाकों में माइकिंग कर लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।गंडक नदी के जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।स्थानीय प्रशासन ने नदी में नाव के परिचालन को रोकने और पशुपालकों को मवेशियों के साथ नदी पार नहीं करने की हिदायत दी है।

मुजफ्फरपुर में गंडक से सटे इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। नदी किनारे माइकिंग कर लोगों को संभावित जलवृद्धि के प्रति आगाह किया जा रहा है।सरैया, पारू और साहेबगंज के कुछ हिस्सों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बच्चों और मवेशियों को निचले इलाकों से निकालकर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर रखने की अपील की जा रही है।

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर आउटबर्स्ट और वाल्मीकिनगर बराज से गंडक में बढ़े जलप्रवाह की आशंका को देखते हुए सीवान प्रशासन भी अलर्ट मोड में है।जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्चस्तरीय आपात समीक्षा बैठक हुई। बैठक में वर्ष 2020 के अनुभव को देखते हुए बसंतपुर, लकड़ी नबीगंज, गोरेयाकोठी, भगवानपुर हाट और बड़हरिया अंचलों में 24 घंटे सतर्कता रखने के निर्देश दिए गए।दरअसल, 2020 में सारण तटबंध में रिसाव और टूटने से इन इलाकों पर असर पड़ा था। इसी अनुभव को देखते हुए प्रशासन इस बार पहले से तैयारी में जुट गया है।सीवान में जल संसाधन विभाग और अभियंताओं को गोपालगंज प्रशासन तथा तटबंधीय अभियंताओं के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। सारण तटबंध की स्थिति और बैकवाटर के प्रभाव पर लगातार नजर रखने के निर्देश हैं।बीडीओ और सीओ को सरकारी व निजी नाव, गोताखोर और ऊंचे स्थानों पर चिन्हित आपदा शरण स्थलों की स्थिति अपडेट रखने को कहा गया है। निचले और दियारा क्षेत्रों में माइकिंग कर ग्रामीणों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा है कि नेपाल की फ्लैश फ्लड के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से राज्य के कई जिलों में हाई अलर्ट है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क और तैयार रहने की अपील की है।स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों को अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहने तथा आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।सीवान के सिविल सर्जन को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश की दवा, ORS, हैलोजन टैबलेट और ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है। पशुपालन विभाग को पशु चारा और टीकाकरण की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड स्थित ब्रह्मोत्तर बांध पर भारी बा³रिश के कारण खतरा बढ़ गया है। बांध में कई जगह मिट्टी का कटाव होने के साथ करीब 15 मीटर तक मिट्टी कट जाने की सूचना सामने आई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर समाहरणालय की जिला आपदा प्रबंधन शाखा ने बांध की तत्काल मरम्मत कराने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।

नेपाल की कई नदियां आगे चलकर भारत में प्रवेश करती हैं। भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र से आने वाला अतिरिक्त पानी नारायणी और फिर गंडक नदी प्रणाली से जुड़ता है। यही वजह है कि नेपाल में अचानक भारी बाढ़ आने पर बिहार के सीमावर्ती और गंडक तटवर्ती जिलों में पहले से एहतियाती तैयारी शुरू कर दी जाती है।फिलहाल प्रशासन का जोर जलस्तर की निगरानी, तटबंधों की सुरक्षा, निचले इलाकों से लोगों की सुरक्षित निकासी और राहत संसाधनों की उपलब्धता पर है।गंडक का पानी बढ़ा जरूर है, लेकिन फिलहाल प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। संदेश साफ है घबराएं नहीं, नदी से दूरी रखें और सिर्फ आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।


Spread the love