


रुद्रपुर, 08 नवम्बर 2025।
उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती इस बार प्रशासनिक सीमाओं के भीतर एक औपचारिक आयोजन बनकर रह गई, परंतु सनातन धर्म कन्या इण्टर कॉलेज, रुद्रपुर की छात्राओं ने अपने लोकनृत्य से इस औपचारिकता में भी भावनाओं का रंग भर दिया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
कु. दीपमाला के निर्देशन में संदीपा, शगुन, शिवानी, दिव्या, सिम्मी, कोमल, राहेमीन, सानिया और हेमा ने “जय हो कुमाऊँ, जय हो गढ़वाला” गीत पर जब मंच पर कदमताल की, तो पूरे प्रांगण में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति गूंज उठी। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को याद दिलाया कि यह पर्व केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा का उत्सव है।
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने इस समूह नृत्य की सराहना करते हुए कहा कि “लोकसंस्कृति ही हमारी पहचान है, और ऐसी प्रस्तुतियाँ हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती हैं।” उन्होंने उत्तराखंड की धरती को “सरस्वती की भूमि” बताते हुए छात्राओं को अपनी सांस्कृतिक चेतना बनाए रखने की प्रेरणा दी।

गौर करने योग्य तथ्य यह भी रहा कि पहले जहाँ पुलिस लाइन में इस दिवस पर भव्य समारोह आयोजित होते थे — हजारों की भीड़, जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के साथ — वहीं इस बार कार्यक्रम कलेक्टरेट परिसर के बरामदे तक सिमट कर रह गया। यह न केवल भौगोलिक सीमितता थी, बल्कि कहीं न कहीं उत्सव की आत्मा पर भी इसका असर दिखाई दिया।
फिर भी, इस सीमित स्थल पर जब बालिकाओं ने अपने नृत्य से पर्व की गरिमा को पुनर्जीवित किया, तो लगा मानो देवभूमि की मिट्टी, संगीत और संस्कृति ने मिलकर प्रशासनिक दीवारों को भी लांघ लिया हो।
महापौर विकास शर्मा, जिलाधिकारी नितिन भदौरिया, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, एसपी उत्तम सिंह नेगी तथा राज्य आंदोलनकारियों ने दीप प्रज्वलन के साथ शहीदों को नमन किया।
इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा उत्कृष्ट कर्मियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण वही रहा जब छात्राओं की लोकनृत्य प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से सभागार गूंजा दिया — मानो उत्तराखंड की रजत जयंती का असली उत्सव वहीं जीवंत हुआ हो।
इस रजत जयंती के बरामदे में सिमटे समारोह ने एक गहरी सीख दी — कि जब मंच छोटा हो जाए, तो संस्कृति ही उसे विशाल बना देती है।




