

हिंदू मान्यता के अनुसार नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने पर पूरे वर्ष भर सुख-सौभाग्य बना रहता है. यही कारण है कि इस दिन लोग नाग देवता के मंदिर में जाकर पूरे विधि-विधान से पूजा करके उनसे सुख-संपत्ति और आरोग्य का आशीर्वाद मांगते हैं.
उत्तराखंड, देवभूमि के रूप में प्रसिद्ध, नाग देवताओं की पूजा का भी प्रमुख केंद्र है। यहाँ अनेक प्राचीन नाग मंदिर हैं जिनसे जुड़ी लोक मान्यताएं गहराई से जनजीवन में रची-बसी हैं।
1. दूनागिरी नाग मंदिर (अल्मोड़ा): माना जाता है कि यह मंदिर शेषनाग का स्थान है। मान्यता है कि यहाँ नाग देवता की कृपा से सर्पदंश और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है।
2. सेरा नागराजा मंदिर (चमोली): यह मंदिर बदरीनाथ मार्ग पर स्थित है। स्थानीय मान्यता अनुसार नागराजा यहाँ के रक्षक हैं और मंदिर में मनोकामना पूर्ति हेतु दर्शन किए जाते हैं।
3. बासुकी नाग मंदिर (उत्तरकाशी): गंगोत्री मार्ग पर स्थित यह मंदिर बासुकी नाग को समर्पित है। कहा जाता है कि यहाँ पूजा करने से कालसर्प दोष दूर होता है।
4. नागथात (टिहरी): यहाँ नाग देवता को ग्राम देवता माना जाता है। हर वर्ष मेला लगता है जहाँ नाग नृत्य भी होता है।
5. विनसर नाग मंदिर (पौड़ी): यह स्थान शिव और नाग देवता की संयुक्त उपासना का केंद्र है।
नाग देवताओं की पूजा उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक त्योहारों और ग्राम्य जीवन की एक अभिन्न परंपरा है।

कब है नाग पंचमी
देश की राजधानी दिल्ली के समयानुसार इस साल श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पंचमी 28 जुलाई 2025 को रात्रि में 11:24 बजे प्रारंभ होकर 30 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 12:46 बजे तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इस साल नाग पंचमी का पावन पर्व 29 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा. इस साल नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त (Nag Panchami 2025 Date And Shubh Muhurat) प्रात:काल 05:41 से लेकर 08:23 बजे तक रहेगा. आइए जानते हैं कि देश के किन प्रसिद्ध मंदिरों में नाग देवता का पूजन एवं दर्शन आदि करने पर विशेष फल और पुण्य की प्राप्ति होती है.

नागवासुकी मंदिर
नागवासुकी मंदिर में दर्शन के बगैर संगम नगरी प्रयागराज की यात्रा अधूरी मानी जाती है। पापनाशिनी गंगा के किनारे बना यह मंदिर पौराणिक काल का माना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार जब दैत्यों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया तो उसमें मंदराचल पर्वत से मंथन करने के लिए नागवासुकी को रस्सी के रूप में प्रयोग किया था। मान्यता है इस पूरी प्रक्रिया में जब घर्षण के कारण नागवासुकी चोटिल हो गये तो उन्हें आराम करने के लिए भगवान श्री विष्णु ने संगम के किनारे भेज दिया था। मान्यता है कि तब से आज तक वे इसी स्थान पर विराजमान है। मान्यता है नागवासुकी मंदिर (Nag Vasuki Mandir) में नागपंचमी के दिन पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन एवं कुंडली के सारे दोष दूर हो जाते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर
महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर (nagchandreshwar) साल में सिर्फ एक बार नाग देवता के भक्तों के दर्शन के लिए खुलता है. अत्यंत ही प्राचीन यह मंदिर महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थित है. यही कारण है कि इस दिन यहां पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है. मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर भगवान की जो कोई भी व्यक्ति पूजा करता है, उसे जीवन में कभी भी सर्पदंश या अन्य प्रकार का भय नहीं रहता है. महाकाल और नागदेवता की कृपा से उसके कुल की वृद्धि होती है और उसका घर धन-धान्य से भरा रहता है.
तक्षकेश्वर मंदिर
कुंभ नगरी प्रयाग राज में एक और भी नाग देवता (Nag Devta) से जुड़ा बड़ा तीर्थ है, जिसे तक्षकेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार पाताल लोक में रहने वाले आठ प्रमुख नागों का उन्हें स्वामी माना जाता है. तक्षकेश्वर मंदिर यमुना (Yamuna) किनारे दरियाबाद में स्थित है. इस पावन नाग मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर नागपंचमी पर्व पर पूजा करने पर कुंडली से जुड़े कालसर्प दोष से होने वाली समस्याएं दूर हो जाती हैं. हालांकि यहां पर हर मास के शुक्लपक्ष की पंचमी पर भी विशेष पूजा होती है. इस पावन स्थान पर पूरे श्रावण मास शिव और नाग देवता की पूजा चलती रहती है.
कर्कोटक नाग मंदिर
सनातन परंपरा में कर्कोटक को प्रमुख नाग देवता (Naag Devta) के रूप में माना गया है. इन्हें नागों का राजा भी माना जाता है. कर्कोटक नाग मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल शहर के भीमताल स्थान पर है. मान्यता है कि नागपंचमी पर इस मंदिर में जाकर विधि-विधान से पूजा करने साधक को सुख, संपति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कुंडली में कालसर्प दोष की शांति के लिए भी यहां पर विशेष पूजा की जाती है.
मन्नाारशाला सर्प मंदिर
नाग देवता से जुड़ा यह अद्भुत मंदिर दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित है. मन्नाारशाला सर्प मंदिर (mannarasala snake temple) में नाग देवता की कई हजार प्रतिमाएं हैं. विशाल प्रांगण में फैले इस मंदिर में आपको चारों तरफ नाग देवता की प्रतिमाएं ही नजर आती हैं. यही कारण है कि लोग इसे स्नेक टेंपल (snake temple in india) के नाम से बुलाते हैं. नाग देवता पर आस्था रखने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में विशेष पूजा करने के लिए पहुंचते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार नाग देवता के आशीर्वाद से कुल की वृद्धि होती है. यही कारण है कि नि:संतान दंपत्ति संतान सुख की प्राप्ति के लिए यहां पर विशेष पूजा करने के लिए जाते हैं.




