रुद्रपुर में बनेगा भव्य शिव कॉरिडोर, मुख्यमंत्री की पांच घोषणाओं से बदलेगी शहर की तस्वीर: विकास शर्मा

Spread the love


रुद्रपुर आज एक नए आध्यात्मिक मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास और आस्था का संगम दिखाई दे रहा है। महापौर विकास शर्मा द्वारा प्रस्तावित भव्य शिव कॉरिडोर केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं के साथ यह पहल शहर को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर सकती है। त्रिशूल चौक से डमरू चौक तक की परिकल्पना रुद्रपुर को शिवमय पहचान देने की दिशा में कदम है। यदि यह संकल्प पारदर्शिता और समर्पण से साकार हुआ, तो इसे नगर इतिहास में आध्यात्मिक युगारंभ के रूप में याद किया जाएगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

रुद्रपुर। शहर में आस्था और विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। महापौर विकास शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई पांच प्रमुख घोषणाएं रुद्रपुर के लिए ऐतिहासिक साबित होंगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शिव कॉरिडोर शहर को प्रदेश स्तर पर नई पहचान दिलाएगा और इसे धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
सोमवार को महापौर ने गंगापुर रोड स्थित नीलकंठ धाम में रुद्राभिषेक कर शिव कॉरिडोर की रूपरेखा को लेकर नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय एवं नगर निगम टीम के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। इस कॉरिडोर के अंतर्गत नीलकंठ धाम, गोल्ज्यू मंदिर, शिव मंदिर तथा गुरुचांद मंदिर परिसर को त्रिभुजाकार स्वरूप में जोड़ा जाएगा। परिसर में नीलकंठ भवन के साथ 51 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और अलग मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
महापौर ने बताया कि हाल ही में नीलकंठ धाम के पास छह एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जहां शिव कॉरिडोर का विकास होगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में इस भूमि को लेकर लगाए गए आरोप निराधार थे और अब यह क्षेत्र शहर की आस्था का बड़ा केन्द्र बनेगा।
मुख्यमंत्री की अन्य घोषणाओं में खेड़ा क्षेत्र में पर्यावरण मित्रों के लिए आधुनिक सरकारी आवास निर्माण, भूरारानी रोड व गंगापुर रोड का चौड़ीकरण, अटरिया मोड़ से इंदिरा कॉलोनी तक मिनी बाईपास निर्माण तथा किच्छा रोड पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की स्थापना शामिल है। प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बास्केटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन और इंडोर जिम सहित विभिन्न खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
महापौर ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में 100.03 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है। इनमें मुख्य कार्यालय भवन का पुनर्निर्माण, हॉटमिक्स सड़कें, वार्डों में विकास कार्य, आरोग्य मंदिर, वेंडिंग जोन, फ्रेश वेस्ट प्लांट, स्ट्रीट लाइट, गौशाला निर्माण, पार्कों का सौंदर्यीकरण और विभिन्न चौकों का विकास शामिल है।
इसी क्रम में इंदिरा चौक पर त्रिशूल स्थापना के बाद अब डीडी चौक को 24 लाख रुपये की लागत से “डमरू चौक” के रूप में विकसित किया जाएगा। महापौर ने कहा कि रुद्रपुर को भगवान शिव की नगरी का स्वरूप देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण कदम है।
पत्रकार वार्ता में नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय, महंत प्रकाश जी, शिव कुमार राय, पार्षद सुशील चौहान, चिराग कालरा, हरि अधिकारी, एमपी मौर्या सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार को गोली मारकर की गई हत्या के बाद उसका स्टोन क्रशर काफी चर्चा में है। बाजपुर स्थित इस स्टोन क्रशर की अनुमति को लेकर भी तरह-तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अब इसका जवाब के आदेश के रूप में बाहर आया है। यह आदेश विक्रम के भाई अरविंद शर्मा की कंपनी को स्टोन क्रशर की अनुमति देने का है। जिसके संचालन का जिम्मा विक्रम की पत्नी सोनिया शर्मा के पास है।

स्टोन क्रशर की अनुमति का आदेश वर्ष 2013 का है, जो विजय बहुगुणा सरकार के दौरान का है। जिसमें कहा गया है कि विभिन्न शर्तों के साथ अमृत स्टोन क्रशर प्रा. लि. को अनुमति दी जाती है।

बताया जा रहा है कि यह वही दौर है, जब झारखंड में कई कांड करने और पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद विक्रम ने उत्तराखंड की राह पकड़ी। ताकि नए सिरे और सुरक्षित ढंग से अपने पांव पसार सके। संभव है कि इसी तरह के धंधों के लिए अनुमति प्राप्त करके विक्रम में उत्तराखंड और राजधानी देहरादून में भी अपनी जड़ें गहरी की। वर्तमान में वह परिवार के साथ सहस्रधारा रोड स्थित ग्रीन व्यू रेजिडेंसी में रह रहा था।

विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास
विक्रम शर्मा को झारखंड के गैंगस्टर अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु माना जाता था। अपराध जगत में विक्रम दिमाग था और अखिलेश उसकी ताकत। विक्रम योजनाकार था, जबकि अखिलेश उन योजनाओं को अंजाम देता था। 2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या के बाद विक्रम का नाम खुलकर सामने आया। इसके बाद पुलिस का शिकंजा कसता गया और वह भूमिगत हो गया। उसने अखिलेश को गिरोह का चेहरा बनाकर खुद पर्दे के पीछे से संचालन शुरू कर दिया।

2008 का खूनी दौर
2008 में जमशेदपुर में सिलसिलेवार अपराधों ने शहर में दहशत फैला दी थी। टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या कई कारोबारियों और नेताओं पर फायरिंग पूर्व जज आरपी रवि पर हमला इन घटनाओं के पीछे गुरु-शिष्य की जोड़ी का नाम जुड़ता रहा। विरोध करने वालों को रास्ते से हटाना इस गिरोह की रणनीति बन चुकी थी।


Spread the love