नर सेवा ही नारायण सेवा” का जीवंत उदाहरण: रुद्रपुर के महाराजा अग्रसेन चौक से प्रतिदिन प्रस्फुटित होती मानवता, संस्कार और निःस्वार्थ सेवा की प्रेरक गाथा

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संपादकीय :देवभूमि उत्तराखंड की औद्योगिक नगरी रुद्रपुर के हृदयस्थल महाराजा अग्रसेन चौक पर प्रतिदिन प्रातःकाल 7:00 am से एक ऐसा दृश्य उपस्थित होता है, जो केवल सामाजिक सेवा की आध्यात्मिक साधना का जीवंत उदाहरण है। “नर सेवा ही नारायण सेवा” की भावना से प्रेरित होकर यहां निशुल्क चाय और जलपान की व्यवस्था की जाती है—बिना किसी प्रचार, बिना किसी अपेक्षा, केवल मानवता के भाव से।
इस पुनीत कार्य के मूल प्रेरणास्रोत श्रद्धेय श्री धर्मवीर मित्तल हैं, जो वर्षों से रुद्रपुर में मधुमेह (शुगर) रोगियों को निःशुल्क औषधि और परामर्श प्रदान कर रहे हैं। आयुर्वेदिक ज्ञान और अनुभव के आधार पर उन्होंने हजारों लोगों को स्वस्थ जीवन की राह दिखाई है। वे केवल दवाई नहीं देते, बल्कि जीवनशैली सुधारने का मार्ग भी बताते हैं—कैसे संयम, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या से शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। यह सेवा किसी संस्था के बैनर तले नहीं, बल्कि आत्मिक संकल्प से संचालित होती है।
उन्हीं की प्रेरणा से उनके सुपुत्र प्रमोद मित्तल ने इस “निशुल्क प्रातःकालीन जलपान सेवा” का संकल्प लिया। युवा ऊर्जा और संस्कारों का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है। प्रमोद मित्तल, जो भारतीय जनता पार्टी के एक कर्मठ, सैद्धांतिक और सक्रिय युवा नेता के रूप में पहचान बना रहे हैं, उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाजसेवा का पथ माना है। उम्र के अनुपात में उनकी लोकप्रियता जिस प्रकार बढ़ी है, वह इस बात का प्रमाण है कि जनता केवल भाषण नहीं, कर्म देखती है।
धर्मग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है—“अन्नदानं महादानम्।” जो व्यक्ति भूखे को भोजन कराता है, वह केवल पेट नहीं भरता, बल्कि आत्मा को तृप्त करता है। शास्त्रों के अनुसार अन्नदान से दरिद्रता का नाश होता है, पाप क्षीण होते हैं और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। जो प्रातःकाल उठकर दूसरों के लिए चाय बनाता है, भोजन परोसता है, वह वस्तुतः अपने भीतर के अहंकार का विसर्जन करता है। ऐसी सेवा से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का वास होता है। ईश्वर ऐसे सेवाभावी जनों को दीर्घायु, यश और लोक-परलोक में कल्याण का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इस सेवा कार्य में एडवोकेट भाजपा नेता प्रमोद मित्तल,कुशल अग्रवाल, जितेंद्र साहनी, राजेश कैमरा, रवि अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, श्री ओम अग्रवाल, सुधीर डागर, अशोक सिंह नेगी, राजीव चावला,अनुज अग्रवाल सहित अनेक सज्जनों का योगदान उल्लेखनीय है। ये सभी समाज के वे स्तंभ हैं, जो चुपचाप मानवता की इमारत को मजबूत कर रहे हैं। समाज की ओर से इन सभी सेवाभावी आत्माओं के लिए यही संदेश है कि आपका यह कार्य केवल आज की भूख नहीं मिटा रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा की प्रेरणा भी बन रहा है।
श्रद्धेय श्री धर्मवीर मित्तल के लिए समाज की ओर से कोटि-कोटि नमन—आपने यह सिद्ध किया कि सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि सेवा से अर्जित आशीर्वाद है। प्रमोद मित्तल के लिए विशेष शुभकामनाएं—युवा नेतृत्व जब संस्कारों की जड़ों से जुड़ा हो, तो वह केवल राजनीतिक भविष्य नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी निर्माण करता है। आशा है कि वे इसी प्रकार सेवा, सादगी और सिद्धांतों के मार्ग पर चलते हुए जनविश्वास को और सुदृढ़ करेंगे।
आज जब समाज में स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा की प्रवृत्ति बढ़ रही है, ऐसे समय में यह “नर सेवा नारायण सेवा” का अभियान एक प्रकाश स्तंभ है। यह संदेश देता है कि परिवर्तन बड़े मंचों से नहीं, छोटे-छोटे करुणा के कार्यों से आता है। यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति सप्ताह में एक दिन भी किसी जरूरतमंद को भोजन कराने का संकल्प ले ले, तो किसी को भूखा सोना न पड़े।

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद की ओर से समस्त राज्य आंदोलनकारियों का संदेश—देवभूमि उत्तराखंड की परिकल्पना केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित है। हमें ऐसे ही सेवाभावी “देव तुल्य” नागरिकों की आवश्यकता है, जो समाजहित को सर्वोपरि रखें। नर सेवा ही सच्ची राष्ट्र सेवा है। यही भावना राज्य आंदोलन की आत्मा थी और रहेगी।
— Hindustan Global Times, अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी।


यह सेवा  चाय और नाश्ते साथ  संस्कारों की है। यह आयोजन चाय नाश्ते के साथ दिल जोड़ने का है। देवभूमि की इस पावन धरती पर ऐसे सेवाकार्यों की निरंतरता बनी रहे, यही कामना है। ईश्वर इन सभी सेवाभावी जनों को स्वास्थ्य, सम्मान और अखंड यश प्रदान करें—और उनकी प्रेरणा से समाज में सेवा की यह ज्योति और प्रज्वलित होती


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