जयनगर की जमीन पर कब्ज़े का आरोप, 150 शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं – पीड़ित ने उठाए गंभीर सवाल

Spread the love



रुद्रपुर/उधम सिंह नगर।ग्राम जयनगर से जुड़ा एक पुराना भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा में है। वार्ड नंबर 21, रामपुरा, रुद्रपुर निवासी रामकुमार (पुत्र स्व. उमेश कुमार) ने आरोप लगाया है कि उनके पिता के नाम दर्ज कृषि भूमि को कथित रूप से गलत तरीके से किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया। दस्तावेजों में उनके दादा स्व.चेतराम नाम है । को “फरार” दर्शाया गया, जबकि परिवार का दावा है कि ऐसा कोई आधार नहीं था।
पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने खेत पर अपना अधिकार जताने का प्रयास किया तो कुछ दबंगों ने मारपीट कर उन्हें भगा दिया और हथियारों से धमकी दी। ग्रामीणों ने भी भयवश हस्तक्षेप नहीं किया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद


रामकुमार के अनुसार, उन्होंने एसडीएम, डीएम, तहसीलदार और पटवारी को लगभग 150 प्रार्थना पत्र दिए, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि 99 वर्ष की लीज पर जमीन किस आधार पर दर्ज की गई, जबकि जमीन चेत्तराम के नाम भी दर्ज बताई जा रही है।
साल 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद परिवार ने आरटीआई के माध्यम से रिकॉर्ड मांगे, लेकिन संबंधित विभाग पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जमीन का नामांतरण संशोधित कर वैधानिक उत्तराधिकार के आधार पर कब्जा दिलाने की मांग की है। मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

संपादकीय:जयनगर की जमीन विवाद का मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि राजस्व तंत्र की संवेदनहीनता का आईना है। जब कोई नागरिक 150 से अधिक प्रार्थना पत्र दे और फिर भी सुनवाई न हो, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। यदि अभिलेखों में किसी को “फरार” दिखाकर भूमि हस्तांतरण हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के बाद भी स्पष्ट जानकारी न मिलना व्यवस्था की पारदर्शिता पर संदेह पैदा करता है। शासन को चाहिए कि पीड़ित को न्याय दिलाए, अन्यथा जनता का विश्वास तंत्र से पूरी तरह उठ जाएगा।


Spread the love