

उसे गंभीर हालत में उसे एम्स-ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। पुलिस कस्टडी में विनय त्यागी की हत्या के बाद उसके परिजनों ने पुलिस पर ही सवाल खड़े किए हैं। विनय त्यागी की बेटी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उन्हें पिता से मिलने तक नहीं दिया जा रहा था।

विनय त्यागी की बेटी तन्वी त्यागी ने बताया कि गोली उनके पिता की आंतों में लगी थी जिसे अंदरूनी नुकसान बेहद गंभीर था। तीन दिनों से पुलिस उन्हें अपने पिता से ठीक से मिलने तक नहीं दे रही थी। सिर्फ एक दो बार दूर से देखने को दिया गया।
इसी बीच विनय त्यागी की बहन सीमा त्यागी ने एक सनसनीखेज दावे से मामले में चौंका देने वाला मोड़ आ गया है। सीमा के मुताबिक, देहरादून से करीब 750 करोड़ रुपए की चोरी हुई थी जिसमें नकदी, जेवर और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज शामिल थे। यह माल ठेकेदार सुभाष त्यागी का था जिसे उसने ईडी से बचने के लिए छिपाया था।
सीमा ने आगे बताया कि विनय को इसकी जानकारी मिली तो उसने पूरा माल ईडी को सौंपने की तैयारी कर ली। सीमा ने आरोप लगाते हुए कहा इसी वजह से विनय को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई ताकि वह किसी एजेंसी के सामने 750 करोड़ का सच सामने ना ला सके। उन्होंने यह भी दावा किया इस पूरे खेल में उत्तराखंड पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।
विनय त्यागी का भी आपराधिक इतिहास रहा है। मेरठ से उसका पुराना नाता था। वह बदन सिंह बद्दो, भूपेंद्र बाफर और नीरज भाटी जैसे कुख्यात गिरोह के संपर्क में रहा। साल 2015 में अपहरण के बाद दो युवकों की हत्या के मामले में उसका नाम पहली बार बड़े स्तर पर सामने आया। उसके खिलाफ हत्या, डकैती, अपहरण जैसे 58 से ज्यादा संगीत मुकदमे दर्ज थे। विनय काफी समय तक दुबई में फरार रहा। फिर भारत लौटा तो चोरी छिपे दिल्ली में किराए के फ्लैट में रहने लगा।
उसे जून 2022 में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, त्यागी को 24 दिसंबर को रुड़की जेल से लक्सर अदालत में पेशी के लिए ले जाया जा रहा था। वह पुलिस कस्टडी में था, रास्ते में लक्सर फलाइओवर के पास दो बदमाशों ने पुलिस वाहन पर कथित रूप से ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी। इसमें विनय त्यागी गंभीर रूप से घायल हो गया। विनय त्यागी को तीन गोलियां लगी थीं। उसे गंभीर हालत में एम्स-ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था जहां शनिवार को सुबह के वक्त उसकी मौत हो गई।
वहीं विनय त्यागी की बेटी तन्वी त्यागी ने कहा कि हमें पता था कि उनकी जान को खतरा है। हमें परेशान किया जा रहा था। हमें मना किया जा रहा था कि उनसे मिलने मत जाओ। उन्हें अकेला छोड़ दो जेल में। हमें उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। उनकी रिमांड की डेट थे। हमें लग रहा था कि उनके साथ कुछ होने वाला है। इस वजह से हमने उनकी सुरक्षा को लेकर कोर्ट में अप्लिकेशन डाली थी।
तन्वी त्यागी ने आगे बताया कि सुरक्षा को लेकर डाली गई अप्लिकेशन कोर्ट ने अप्रूव कर दी थी। जज ने ऑर्डर दिए थे। जज ने मेल भेजा और कॉल भी की थी कि विनय की जान को खतरा है, उसे अतिरिक्त सुरक्षा दिए जाने को कहा था। उनकी जान को किससे खतरा था यह वह जानते थे। जज ने यह भी पूछा था कि क्या उनका मजिस्ट्रेटी बयान लिया जा सकता है तो पुलिस ने मना कर दिया था। जबकि मैं उनसे मिली थी तो वह बोलने की स्थिति में थे लेकिन बयान तक नहीं लेने दिया गया।
तन्वी त्यागी ने यह भी कहा कि उनको तीन गोलियां लगी होने के बावजूद दोपहर साढ़े 12 बजे से लेकर शाम छह बजे तक 3 अस्पतालों में इधर से उधर घुमाया गया। एम्स ट्रामा सेंटर में भी इलाज में देरी हुई। ऑपरेशन के लिए 11 बजे करने की बात कही गई। इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका है। मेरे माता-पिता को झूठे केस में फंसाया गया था।
तन्वी ने आगे एक और खुलासा करते हुए कहा कि हमें बताया गया कि मेरी मां ने उनको देहरादून से रुड़की शिफ्ट करने के लिए अप्लिकेशन दिया है जबकि मेरी मां ने ऐसा कोई आवेदन नहीं दिया था। मेरे पिता देहरादून में ही सुरक्षित थे लेकिन उनको रुड़की शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच पुलिस का कहना है कि हमले में दो लोगों को पकड़ा गया है। एक का नाम शनी यादव उर्फ शेरा है और दूसरे का नाम अजय है जबकि दोनों काशीपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं और दोनों का आपराधिक इतिहास रहा है।




