पितरों के तर्पण और पिंडदान के साथ ही भोज का भी बहुत महत्व होता है। इसलिए आपका पंचबलि कर्म के बारे में जानना जरूरी है। पंचबलि कर्म पितृ पक्ष में इसलिए विशेष है, क्योंकि यह पूर्वजों सहित समस्त प्राणियों को अर्पण और संतुष्टि देने का कार्य है।

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यह कर्म न केवल धार्मिक है, बल्कि मानवता, कृतज्ञता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जो पंचबलि करता है, वह सभी ऋणों से मुक्त होकर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करता है। आइये यहां से इसके बारे में समझते हैं।

पंचबलि कर्म क्या है?

पंचबलि एक विशेष वैदिक कर्मकांड है, जिसमें भोजन का एक अंश पांच प्रकार के जीवों को समर्पित किया जाता है। पंचबलि का मतलब होता है पितरों के लिए पांच लोगों को भोज खिलाना। पंचबलि की विधि में पांच लोगों के लिए पांच स्थान पर भोज रखा जाता है।

कैसे करें पंचबलि कर्म? (Panchbali Karm Vidhi)-

1. गौ बलि – पंचबलि कर्म में सबसे पहले गाय माता को खाना खिलाय जाता है। घर की पश्चिम दिशा में पलाश के पत्तों पर रखकर गाय को भोजन करवाया जाता है और इस दौरान ‘गौभ्यो नम:’ मंत्र का जप करके गाय माता को प्रणाम किया जाता है।

2. श्वान बलि – पंचबली कर्म में श्वान बलि अर्थात कुत्ते को पत्ते पर भोजन करवाने का विधान है। माना जाता है कि इस कर्म को करने से जातक आकस्मिक संकटों से बचा रहता है।

3. काक बलि – पंचबली कर्म में कौओं को भी भोजन कराया जाता है। इसके लिए छत पर या भूमि पर पत्तल में कौओं के लिए भोजन रखा जाता है। यह मान्यता है कि अगर कौआ आपका भोजन ग्रहण कर लेता है, तो इसका अर्थ है कि पितृ आपसे प्रसन्न हैं।

4. देवादि बलि – इस दौरान घर के अंदर पत्तों पर देवताओं के लिए भोजन का कुछ हिस्सा निकाला जाता है। बाद में इसे उठाकर घर से बाहर रख दिया जाता है। माना गया है कि इस कर्म को करने से कुलदेवता और कुलदेवी का भी आशीर्वाद जातक को प्राप्त होता है।

5. पिपलिकादि बलि – आखिर में चींटी, कीड़े-मकौड़ों आदि के लिए खाना निकाला जाता है। इस कर्म को करने के लिए जहां भी चींटी आदि के बिल हों, खासकर पीपल के वृक्ष के नीचे, चूरा कर भोजन डाला जाता है।

पितृ पक्ष में पंचबलि कर्म का महत्व

पितृ पक्ष में पंचबलि के माध्यम से पितृबलि करना उन्हें श्रद्धा और अन्न अर्पित करने का तरीका है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष शांत होता है। पंचबलि कर्म से मनुष्य देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण, भूत ऋण और मानव ऋण को चुकाता है। यह जीवन के संतुलन को बनाए रखने का आध्यात्मिक तरीका है। ये सिखाता है कि हमारा जीवन अकेला नहीं है, हम समाज, प्रकृति और पूर्वजों से जुड़े हुए हैं। पंचबलि विशेष रूप से श्राद्ध कर्म के समय किया जाना चाहिए, ताकि पितरों के साथ-साथ अन्य शक्तियाँ भी तृप्त हों और श्राद्ध का फल पूर्ण मिले।


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