

भारतीय वायुसेना ने पहले ही सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत राफेल विमानों की एक बड़ी खेप खरीदने का प्रस्ताव पेश किया है। खास बात यह है कि इन विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। हालांकि, कितने विमानों की खरीद होगी, इस पर अभी बातचीत जारी है, लेकिन वायुसेना को कम से कम 114 अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
रक्षा अधिग्रहण परिषद से मंजूरी जरूरी
सूत्रों के अनुसार, राफेल विमानों की खरीद के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद से औपचारिक मंजूरी प्राप्त करनी होगी। इसके बाद मूल्य पर बातचीत होगी और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होगी। इसके साथ ही, वार्षिक बजट में आवश्यक प्रावधान भी किए जाने की आवश्यकता होगी।
अरबों यूरो में डील
पिछले साल, भारत ने नौसेना के लिए 24 राफेल विमानों की खरीद के लिए एक अनुबंध किया था, और अब वायुसेना के लिए होने वाली इस डील का एक तय मूल्य भी हो सकता है, जो लगभग 10 अरब यूरो तक हो सकता है।
भारत में राफेल का निर्माण
राफेल विमानों का निर्माण भारत में होने से देश के औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीकी लाभ मिलेगा। पिछले साल जून में, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के साथ भारत में राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य ढांचा) बनाने के लिए समझौता किया था।
TASL हैदराबाद में एक विशेष निर्माण सुविधा स्थापित कर रहा है, जहां भारतीय वायुसेना की जरूरतों के साथ-साथ डसॉल्ट के वैश्विक ऑर्डरों के लिए भी फ्यूजलेज के चार मुख्य हिस्से बनाए जाएंगे। इस संयंत्र से वित्तीय वर्ष 2028 तक पहले विमानों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है, और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 24 फ्यूजलेज बनाने की होगी।
भारत में 60% निर्माण संभव
सूत्रों के मुताबिक, हैदराबाद में इंजन निर्माण संयंत्र और उत्तर प्रदेश के जेवर में मेंटेनेंस, रिपेयर्स और ओवरहॉल (MRO) हब जैसी मौजूदा परियोजनाओं के जरिए राफेल के निर्माण का 60% मूल्य भारत में ही बनेगा।




