अमेरिका का में कोई भी युद्ध सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं रहता, वह जल्दी ही घरेलू राजनीति का बड़ा मुद्दा बन जाता है। इस समय यही स्थिति Donald Trump के साथ देखने को मिल रही है।

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ईरान पर हमला करने से पहले कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी न लेना अब उनके लिए राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। विपक्ष तो पहले से ही उन पर बिना जनसमर्थन के देश को नए संघर्ष में झोंकने का आरोप लगा रहा है, लेकिन अब उनके अपने समर्थक भी असहज नजर आने लगे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

‘अमेरिका फर्स्ट’ बनाम युद्ध की हकीकत

ट्रंप की सबसे बड़ी ताकत उनका MAGA समर्थक वर्ग रहा है, जिसने उन्हें इसलिए चुना था क्योंकि वे लंबे और अंतहीन युद्धों के खिलाफ थे। लेकिन अब वही समर्थक सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिका एक और इराक जैसे हालात में फंस रहा है। युद्ध के बढ़ने और लंबा खिंचने की आशंका ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। जो नेता खुद को शांति का पक्षधर बताते थे, वे अब एक जटिल संघर्ष में उलझे दिख रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

Iran के साथ संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तेल आपूर्ति प्रभावित है और वैश्विक बाजार पर इसका असर साफ दिख रहा है। ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। Qatar के रास लाफान गैस प्लांट पर हमले, Abu Dhabi में गैस ऑपरेशंस का रुकना और Saudi Arabia द्वारा ड्रोन हमलों को रोकना ये सभी घटनाएं तनाव की गंभीरता को दिखाती हैं। ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि Israel के साउथ पार्स फील्ड पर हमले की उन्हें पहले जानकारी नहीं थी। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान कतर पर हमले जारी रखता है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।

घरेलू राजनीति में बढ़ता दबाव

आगामी मिड-टर्म चुनावों के चलते ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी चिंता है, क्योंकि अमेरिकी मतदाता अब युद्ध से ज्यादा महंगाई और आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान हैं। पूर्व काउंटरटेररिज्म अधिकारी Joe Kent ने इस्तीफा देते हुए कहा कि ईरान से तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं था, जिससे इस हमले की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।

इतिहास से सबक और भविष्य की चुनौती

ईरान के संदर्भ में अमेरिका का इतिहास भी विवादों से भरा रहा है। 1953 के तख्तापलट से लेकर 1979 की क्रांति तक, कई घटनाएं आज की स्थिति को प्रभावित करती हैं। अब 2026 में फिर से तनाव बढ़ रहा है और ट्रंप की लोकप्रियता पर इसका असर पड़ रहा है।


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