महिला से गैंगरेप की साजिश में शामिल था देवर, तीन अभियुक्त गिरफ्तार

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रुद्रपुर। शहर को झकझोर देने वाले विवाहिता से गैंगरेप प्रकरण में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस जघन्य वारदात में पीड़िता का देवर भी साजिश का हिस्सा निकला। पुलिस ने तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एक अन्य आरोपी विषाक्त पदार्थ का सेवन करने के बाद जिला चिकित्सालय में भर्ती है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


घटना 22 फरवरी की है। पीड़िता अपने देवर के साथ गांधी पार्क में लगे सरस मेले से घर लौट रही थी। आरोप के अनुसार रात लगभग 9 बजे मोदी मैदान के पास देवर के परिचित युवक दो मोटरसाइकिलों से पहुँचे। महिला को ठंडी सड़क क्षेत्र के सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और घटना का वीडियो भी बनाया गया।
पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने रिश्तों की मर्यादा पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। विवेचना में पाया गया कि देवर करन स्वयं पीड़िता को पैदल मोदी मैदान तक ले गया, जहाँ पहले से मौजूद उसके परिचितों से उसकी मुलाकात हुई। इसके बाद अभय सक्सेना उर्फ चाइना, राजा रस्तोगी और विशाल गुप्ता के साथ मिलकर महिला को 15 एकड़ मैदान की ओर ले जाया गया। आरोप है कि पहले अभय और फिर राजा ने दुष्कर्म किया, जबकि करन और विशाल मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने कोई विरोध नहीं किया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) एवं 115(2) की वृद्धि की गई है।
अजय गणपति ने बताया कि 25 फरवरी को मुखबिर की सूचना पर जिला चिकित्सालय के पास से स्प्लेंडर प्लस बाइक सहित तीनों आरोपियों — राजा रस्तोगी, विशाल गुप्ता उर्फ बिट्टू और करन सिंह — को गिरफ्तार किया गया। चौथे आरोपी अभय सक्सेना उर्फ चाइना द्वारा विषाक्त पदार्थ सेवन किए जाने की सूचना है। चिकित्सकीय अनुमति मिलते ही उसके विरुद्ध भी अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
सवाल जो उठते हैं
यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और पारिवारिक रिश्तों के विघटन की भयावह तस्वीर है।
क्या सार्वजनिक आयोजनों के बाद महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पर्याप्त व्यवस्था है?
क्या रिश्तों के भीतर पनपती आपराधिक मानसिकता को पहचानने में समाज विफल हो रहा है?
क्या युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति और डिजिटल ब्लैकमेल की प्रवृत्ति पर कठोर नियंत्रण की आवश्यकता नहीं?
रुद्रपुर की यह घटना पूरे समाज को आत्ममंथन के लिए विवश करती है। महिला सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रश्न है।
यदि आप चाहें तो मैं इसे और अधिक आक्रामक संपादकीय शैली में, या महिला सुरक्षा पर तीखे राजनीतिक प्रश्नों के साथ भी विकसित कर सकता हूँ।


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