

रुद्रपुर के आवासीय क्षेत्र में स्थित Wisdom Public Senior Secondary School परिसर में आयोजित होली मिलन समारोह इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र बना। समाजसेवी गोपाल सिंह पटवाल और श्रीमती सुधा पटवाल के सौजन्य से आयोजित यह कार्यक्रम रंगों की मस्ती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। देर रात तक चले इस आयोजन में महिलाओं, बच्चों और होल्यारों की टीम ने एक से एक प्रस्तुति देकर फागुन के उल्लास को सजीव कर दिया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
फागुन की बयार और पहाड़ी स्वर
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पहाड़ी होली गीतों से हुई। जैसे ही होल्यारों की टीम ने ढोल, दमाऊ, मंजीरा और हुड़का की थाप पर फाग गाना आरंभ किया, पूरा वातावरण झंकृत हो उठा। ढोल की गूंजती ताल, दमाऊ की गंभीर ध्वनि, मंजीरे की मधुर झंकार और हुड़के की लयबद्ध थाप ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गोल घेरा बनाकर झूमती रहीं, जबकि बच्चे उत्साह के साथ मंच के सामने थिरकते नजर आए।
पारंपरिक पहाड़ी गीतों के साथ-साथ लोकप्रिय फिल्मी होली गीतों ने भी माहौल को रंगीन बनाए रखा। युवा पीढ़ी ने आधुनिक संगीत पर नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखते हुए आधुनिकता के साथ तालमेल बैठा रही है।
समाज की सक्रिय भागीदारी
इस होली मिलन समारोह में आसपास की कॉलोनियों के प्रतिष्ठित नागरिक, समाजसेवी, शिक्षाविद और संस्कृति के प्रति सजग परिवार सपरिवार उपस्थित रहे। हर आयु वर्ग की भागीदारी ने कार्यक्रम को सामूहिक उत्सव का रूप दिया। बुजुर्गों ने पारंपरिक फाग गाकर अपनी स्मृतियों को ताजा किया, तो बच्चों ने रंग और संगीत के माध्यम से उत्सव का आनंद लिया।
गोपाल सिंह पटवाल ने हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स में कहा कि होली आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। उन्होंने पहाड़ी समाज की एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि प्रवासी जीवन में सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। श्रीमती सुधा पटवाल ने महिलाओं और बच्चों की सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
स्वाद और स्नेह का संगम
कार्यक्रम में पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध ने उत्सव को और मधुर बना दिया। गुजिया, नमकीन, मिठाइयों और सामूहिक भोज की व्यवस्था ने लोगों को एक साथ बैठकर संवाद का अवसर दिया। रंगों से सराबोर बच्चे जब हाथों में गुजिया लेकर इधर-उधर दौड़ते दिखाई दिए, तो माहौल और भी जीवंत हो उठा। बुजुर्गों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और सामूहिक हंसी-ठिठोली से वातावरण में आत्मीयता घुल गई।
सांस्कृतिक चेतना का संदेश
“जय पहाड़, जय पहाड़ी” सांस्कृतिक स्वाभिमान की अभिव्यक्ति था। पहाड़ी समाज की एकजुटता और अपनी जड़ों के प्रति गर्व इस आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
रुद्रपुर की विजय लक्ष्मी बस्ती, गंगापुर रोड “अपनी संस्कृति, अपनी पहचान के नेतृत्व में होली गीत गायक संस्था ने पारंपरिक फाग और कुमाऊँनी होली की मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनकी मंडली ने शास्त्रीय रंग, लोकधुन और भक्तिरस को ऐसे पिरोया कि पूरा वातावरण उल्लास से भर उठा। सुर, ताल और शब्दों की गरिमा ने संस्कृति की जड़ों को जीवंत कर दिया। यह लोकपरंपरा के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण रही।
गोपाल सिंह पटवाल और श्रीमती सुधा पटवाल के प्रयासों ने यह संदेश दिया कि यदि सामाजिक नेतृत्व सकारात्मक दिशा में पहल करे तो सांस्कृतिक परंपराएं स्वतः सशक्त होती हैं। विद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।
डिजिटल युग में सामाजिक दस्तावेज
पूरे कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के माध्यम से पर्वतीय समाज के इस उत्सव की निरंतर कवरेज दी जा रही है। जो लोग किसी कारणवश कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, वे वीडियो के माध्यम से इस सांस्कृतिक आयोजन की झलक देख सकते हैं। यह डिजिटल दस्तावेज आने वाले समय में सामाजिक एकता की स्मृति के रूप में संजोया जाएगा।
संपादकीय हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट का दृष्टिकोण एक संपादकीय परिप्रेक्ष्य में यह आयोजन सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है। आज के समय में शहरी जीवन की व्यस्तता के बीच सामूहिक उत्सवों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं, संवाद के अवसर प्रदान करते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
रुद्रपुर जैसे तेजी से विकसित होते शहर में सांस्कृतिक पहचान को सहेजना आवश्यक है। गोपाल सिंह पटवाल और श्रीमती सुधा पटवाल द्वारा आयोजित यह होली मिलन समारोह इस दिशा में सार्थक पहल है। इससे समाज को यह प्रेरणा मिलती है कि परंपराएं तभी जीवित रहती हैं जब उन्हें उत्साह और सहभागिता के साथ निभाया जाए।
अंततः, विजडम पब्लिक स्कूल का यह होली मिलन समारोह रंगों के माध्यम से रिश्तों को मजबूत करने, संस्कृति को संजोने और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने का संदेश देता है। फागुन की इस मधुर संध्या ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर उत्सव मनाता है, तब हर रंग में अपनापन झलकता है और हर स्वर में संस्कृति की गूंज सुनाई देती है।
जय पहाड़, जय पहाड़ी — यही रहा इस होली मिलन का सार और संदेश।




