राष्ट्रभक्ति, चिकित्सा और युवा संकल्प का संगम बना चंदोला होम्योपैथिक कॉलेजगणतंत्र दिवस पर तिरंगे के नीचे विकसित भारत का संदेश

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रुद्रपुर,भारत का गणतंत्र केवल एक संवैधानिक व्यवस्था नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा गया वह नैतिक उत्तरदायित्व है, जो हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की निरंतर याद दिलाता है। इसी भाव के साथ 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रुद्रपुर स्थित चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा वसुंधरा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज का परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


आजादी के अमृत काल के इस ऐतिहासिक चरण में आयोजित समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर, युवाओं को उनके सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों से जोड़ने का प्रेरक मंच बना। संस्थान के मार्गदर्शक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. केसी चंदोला द्वारा किए गए ध्वजारोहण के साथ ही परिसर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गूंज उठा। लहराता तिरंगा मानो यह संदेश दे रहा था कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों से नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और संकल्प से भी तय होती है।
अपने विचारोत्तेजक संबोधन में डॉ. केसी चंदोला ने गणतंत्र की आत्मा को युवाओं से जोड़ते हुए कहा कि स्वतंत्रता केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य का संकल्प है। उन्होंने विशेष रूप से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को यह स्मरण कराया कि राष्ट्र सेवा का सबसे प्रभावी रूप मानव सेवा है। बीमार, पीड़ित और वंचित वर्ग के प्रति करुणा ही सच्ची देशभक्ति का आधार बनती है।
उनके शब्दों में यह स्पष्ट झलकता रहा कि यदि युवा शक्ति स्वस्थ विचारों और मजबूत चरित्र के साथ आगे बढ़े, तो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
गणतंत्र दिवस समारोह में विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। देशभक्ति गीतों पर आधारित नृत्य, स्वतंत्रता संग्राम की झलक दिखाती लघु नाटिकाएं और विविध भारतीय संस्कृतियों का समावेश—इन सबने यह सिद्ध किया कि भारत की एकता उसकी विविधता में ही निहित है। यह सांस्कृतिक अभिव्यक्ति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी की राष्ट्रचेतना का सशक्त प्रदर्शन थी।
इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ. अजय विश्वकर्मा, प्रबंधक सागर तिवारी सहित वरिष्ठ चिकित्सकों, शिक्षकों और स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को सामूहिक उत्तरदायित्व का स्वरूप दिया। यह सहभागिता इस बात का संकेत थी कि शिक्षा संस्थान केवल डिग्रियों के वितरण केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशालाएं होते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मिष्ठान वितरण के साथ समारोह का समापन हुआ, लेकिन राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश सभी के मन में गहराई से अंकित हो गया।
चंदोला होम्योपैथिक कॉलेज में मनाया गया यह गणतंत्र दिवस एक बार फिर यह याद दिलाने में सफल रहा कि जब शिक्षा, सेवा और राष्ट्रभक्ति एक मंच पर आती हैं, तब गणतंत्र केवल मनाया नहीं जाता—वह जिया जाता है।


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