रुद्रपुर की राजनीति में बदलती धारा: फोटोशूट बनाम जनसमर्थन का संदेश? शिव अरोड़ा बनाम राजकुमार ठुकराल: रुद्रपुर की सियासत में जनसमर्थन और दिखावे की टकराहट

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रुद्रपुर की राजनीति में बदलती धारा: फोटोशूट बनाम जनसमर्थन का संदेश
रुद्रपुर की सियासत इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां एक ओर सत्ता पक्ष विकास कार्यों के निरीक्षण और प्रेस वार्ताओं के माध्यम से अपनी उपलब्धियां गिनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर जनसमर्थन और धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में भागीदारी के जरिए एक नेता लगातार जनता के दिलों में अपनी जगह मजबूत करता नजर आ रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का कांग्रेस में वापसी के बाद पहला जनसंपर्क दौरा जिस प्रकार ऐतिहासिक जनसैलाब में बदल गया, उसने रुद्रपुर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ग्राम दुर्गापुर (ग्राम सभा बुक्सौरा) में उनके स्वागत में उमड़ी भीड़ केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभावनाओं का उफान थी। युवाओं, किसानों और मातृशक्ति की भारी उपस्थिति, फूल-मालाओं की वर्षा और गूंजते नारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ठुकराल आज भी क्षेत्र की राजनीति में एक मजबूत जनाधार रखते हैं।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान गगन रंधावा, करन रंधावा, रेशम रंधावा, अनमोल रंधावा, गुरवंत सिंह, हैप्पी सिंह, विक्रम जीत सिंह, गुरमुख सिंह संधू, हरभजन सिंह संधू, हरी सरकार, प्रदीप मिस्त्री, प्रदीप राय, अशोक विश्वास, अशोक राय, हरिप्रसाद सरकार, हरिपद रॉय, भुवनचंद्र जोशी, महेंद्र शर्मा, जसपाल सिंह बिष्ट, मुकेश ढाली, सतपाल सिंह, प्रकाश चंद जोशी, निषित विश्वास, नरेश विश्वास, रतन डाली, आकाश बठला, अंकित बटला, अक्षय मदान, विशाल, रोहित, पूनम, रिया, सुनील चुग, अजय नारायण सिंह, संजय ठुकराल, केरू मंडल, रूद्रा सिंह, राजीव गुप्ता, गुरफाल सिंह, विश्वाल सिंह, गुरनीत सिंह, बाबू मंडल, सुकुमार साना, गोरफर साना, समीर मंडल, राकेश मंडल, गौरव विश्वास, तारकेश्वर मल्लिक, वरुण सरकार, अविनाश मण्डल, नेहाल सिंह, अमृत सिंह, इंदरपाल सिंह, सुक्का भुसरी, अभिजीत हालदार, अभिषेक ढाली, तेज प्रताप सिंह, संजय कुमार, रणजीत कुमार, देव विश्वास और वरुण हालदार सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
इसी क्रम में ग्राम खटोला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन समारोह में भी ठुकराल की उपस्थिति ने धार्मिक और सामाजिक प्रभाव को और मजबूत किया। कथा व्यास पंडित नवीन चन्द्र उपाध्याय शास्त्री के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में राम सिंह मेहरा, त्रिलोक सिंह मेहरा, गोविंद सिंह, चंदन सिंह गडिया, नारायण सिंह कार्की, विशन सिंह कार्की, दिनेश जोशी, पप्पू मेहरा, रामदत्त जोशी, धर्मानंद जोशी, उमेद सिंह कार्की, नंदन सिंह कार्की, दिवस सिंह, राम सिंह, जीवन सिंह, नंदाबल्लभ, खुशाल सिंह, किशन दत्त जोशी, त्रिलोक सिंह, विजय सिंह, डिगर सिंह और पूरन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। यहां भी भीड़ और श्रद्धा का माहौल चरम पर रहा।
इसके ठीक विपरीत, उसी दिन रुद्रपुर में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा द्वारा रिंग रोड परियोजना का निरीक्षण और प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान एनएच पीडी अंचल जिंदल, एडीएम कौस्तुभ मिश्रा, विपिन जल्होत्रा, प्रीत ग्रोवर सहित भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गाड़ियों का काफिला और मीडिया कवरेज तो भरपूर रहा, लेकिन जनसहभागिता के स्तर पर यह आयोजन अपेक्षाकृत फीका नजर आया।
यही वह बिंदु है जहां से राजनीतिक विश्लेषण शुरू होता है। एक ओर सत्ता पक्ष विकास परियोजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ठुकराल जनभावनाओं, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से अपनी स्वीकार्यता को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या “हिंदूवादी छवि” केवल किसी पार्टी विशेष की पहचान रह गई है, या अब यह व्यक्तिगत जननेताओं की पहचान बन चुकी है? रुद्रपुर में जिस प्रकार धार्मिक आयोजनों में ठुकराल की बढ़ती उपस्थिति दिख रही है, वह इस धारणा को चुनौती देती है कि धार्मिक नेतृत्व केवल भाजपा के पास ही है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह स्पष्ट संकेत है कि मिशन 2027 की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। कांग्रेस के लिए यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है कि उसका एक नेता जमीनी स्तर पर इतनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है, जबकि भाजपा को यह आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि केवल विकास कार्यों के प्रचार से क्या जनसमर्थन सुनिश्चित किया जा सकता है।
अंततः रुद्रपुर की जनता के सामने दो तस्वीरें हैं—एक विकास के दावों और फोटोशूट की, और दूसरी जनसंपर्क, आस्था और भीड़ के वास्तविक समर्थन की। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे चुनती है—दिखावटी विकास या जमीनी जुड़ाव।
रुद्रपुर की राजनीति फिलहाल एक स्पष्ट संदेश दे रही है: जनता अब केवल सुनना नहीं, महसूस करना चाहती है।


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