नजूल भूमि पर ‘नीलकंठ धाम’ का विवाद बना बारूद—हत्या की आशंका, मेयर-विधायक पर गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप

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रुद्रपुर से सनसनीखेज रिपोर्ट:रुद्रपुर शहर में नजूल भूमि पर बने धार्मिक स्थल ‘नीलकंठ धाम’ को लेकर अब विवाद खतरनाक मोड़ ले चुका है। भाईचारा एकता मंच के अध्यक्ष के पी गंगवार ने एक प्रेस नोट जारी कर मेयर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा पर न सिर्फ अवैध कब्जे और पक्षपात के आरोप लगाए हैं, बल्कि अपनी हत्या की साजिश तक रचे जाने का सनसनीखेज दावा कर दिया है।
गंगवार का कहना है कि नगर निगम ने स्वयं माननीय न्यायालय में शपथ पत्र देकर स्वीकार किया है कि शैलजा फार्म, गंगापुर रोड स्थित नीलकंठ धाम नजूल भूमि पर अवैध रूप से निर्मित है। इसके बावजूद वर्षों से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


मेयर ने झाड़ा पल्ला, फिर भी कार्रवाई ठप!
दस्तावेजों के अनुसार, 23 जून 2021 को जारी नोटिस के जवाब में मेयर विकास शर्मा ने लिखित रूप से स्पष्ट किया था कि उनका नीलकंठ धाम से कोई संबंध नहीं है और नोटिस मंदिर समिति को दिया जाए। इसके बाद जांच में मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में सचिन खुराना का नाम सामने आया और उन्हें 8 जुलाई 2021 को नोटिस भी जारी हुआ।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतने स्पष्ट तथ्यों के बावजूद आज तक अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना?
गंगवार ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार के 2016 के शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नजूल भूमि पर बने धार्मिक स्थलों को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। जहां एक ओर नीलकंठ धाम जैसे मामलों में चुप्पी साध ली गई, वहीं दूसरी ओर उनके किच्छा रोड स्थित 1980 से बने मंदिर और कमरों को बिना नोटिस तोड़ने की कोशिश की गई।
कोर्ट ने दिया संरक्षण, फिर भी मंडरा रहा खतरा
गंगवार ने बताया कि 4 अक्टूबर 2025 को न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश देते हुए किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, नगर निगम के अधिकारी और अज्ञात लोग लगातार उनके मंदिर परिसर के आसपास संदिग्ध गतिविधियां कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि तीन बार रात में उनके कमरों के ताले तोड़कर चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
“अगर मेरी हत्या हुई तो जिम्मेदार कौन?”
प्रेस नोट में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि के पी गंगवार ने अपनी जान को खतरा बताते हुए साफ कहा है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम के अधिकारी, मेयर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा की होगी।
पुलिस रिपोर्ट ने भी बढ़ाई चिंता
कोतवाली रुद्रपुर की रिपोर्ट में भी इस पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद और तनाव की बात सामने आई है। पुलिस ने माना है कि जमीन और पूजा अधिकार को लेकर झगड़ा कभी भी बड़ा रूप ले सकता है। हालांकि, सुरक्षा की मांग पर पुलिस ने हाथ खड़े करते हुए गंगवार को उच्च स्तर से सुरक्षा मांगने की सलाह दी है।
शहर में चर्चा—धर्म या दबंगई?
यह मामला अब सिर्फ एक मंदिर या जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सत्ता, प्रशासन और कथित दबंगई का खतरनाक मिश्रण नजर आ रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों एक ही शहर में कानून का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है?

रुद्रपुर का यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक निष्पक्षता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह विवाद किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।


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