

📰 हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
मुख्य संपादक : अवतार सिंह बिष्ट

नैनीताल। बेतालघाट ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान हुई फायरिंग और दबंगई के मुख्य आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गए। बुधवार को उत्तराखंड पुलिस ने यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के भीरा कस्बे में फिल्मी अंदाज में कार्रवाई करते हुए अमृतपाल उर्फ पन्नू और उसके दो साथियों को धर दबोचा। गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम ने लखीमपुर पहुंचकर एक संदिग्ध थार गाड़ी का पीछा किया। गाड़ी पंजाब मेडिकल स्टोर पर रुकी तो आरोपी सामान लेने उतरे। इसी बीच सादे लिबास में मौजूद पुलिसकर्मियों ने पिस्टल की नोक पर तीनों आरोपियों को काबू कर लिया। पुलिस ने मौके से 32 बोर की देसी पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए।
गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान अमृतपाल उर्फ पन्नू (30 वर्ष) निवासी रोशनपुर गूलरभोज, गुरमीत सिंह उर्फ पारस (28 वर्ष) निवासी बेरिया दौलत केलाखेड़ा और प्रदीप सिंह उर्फ शॉकर (32 वर्ष) निवासी मुंडिया कला, बाजपुर हाल निवासी पीरूमदारा के रूप में हुई है। इन्हें स्थानीय थाने ले जाने के बाद देर रात पुलिस रामनगर ले आई।
14 अगस्त को हुए ब्लॉक प्रमुख चुनाव में वोटिंग के दौरान प्रतिद्वंद्वी पक्ष के समर्थकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी, जिसमें महेंद्र सिंह बिष्ट उर्फ गोधन गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था।
एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यूपी खीरी के एसपी संकल्प शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस अपने मुकदमे के सिलसिले में यहां पहुंची थी और तीन आरोपियों को अपने साथ ले गई है।
पुलिस टीम में थानाध्यक्ष बेतालघाट अनीश अहमद, उपनिरीक्षक फिरोज, हेड कांस्टेबल मंजीत, कांस्टेबल संदीप सिंह और संदीप दोसाद शामिल रहे।
पृष्ठभूमि : बीडीसी सदस्यों को रोकने पर चली थीं गोलियां
बेतालघाट में 14 अगस्त को चुनाव के दौरान 40-50 लोगों का एक समूह वाहनों को रोककर कांग्रेस समर्थित बीडीसी सदस्यों से खींचतान करने लगा। जब सदस्य काबू में नहीं आए, तो कार से उतरे एक युवक ने तीन राउंड फायरिंग कर दी। घटना के बाद 15 अगस्त को छह लोग गिरफ्तार हुए थे, लेकिन मुख्य आरोपी फरार हो गए थे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस घटना को गंभीर मानते हुए बेतालघाट के थानाध्यक्ष अनीश अहमद को निलंबित करने और सीओ भवाली के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की थी।
पुलिस की इस फिल्मी गिरफ्तारी ने चुनावी गोलीकांड के आरोपियों की दबंगई को ठंडा कर दिया है, लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि उत्तराखंड के पंचायत चुनाव किस हद तक कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।




