देहरादून। प्रदेश सरकार नए साल में राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ा रही है। इसके साथ ही आंदोलनकारियों को राज्य अतिथि गृह व गेस्ट हाउस में रहने पर भी छूट प्रदान की जाएगी।

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मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री घोषणा विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। अब गृह विभाग इसके विधिवत आदेश जारी करेगा। सचिव गृह शैलेश बगौली के अनुसार नए साल में आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री घोषणा के क्रम में बढ़ी हुई पेंशन व अन्य सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बलिदानी राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों की सम्मान पेंशन तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये करने, घायल आंदोलनकारियों को छह हजार से बढ़ाकर सात हजार रुपये पेंशन देने और शैय्या ग्रस्त दो अंदोलनकारियों की पेंशन 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की घोषणा की थी।

इसके साथ ही उन्होंने शहीद स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं रखरखाव व सभी जिलों में सरकारी भवनों व मार्ग का नाम राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के नाम पर रखने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री घोषणा विभाग ने इससे संबंधित आदेश सभी संबंधित विभागों को जारी कर दिया है। जो इसका विधिवत आदेश जारी करेंगे।

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकार की बड़ी घोषणाएं, पेंशन वृद्धि से लेकर शहीद स्मारकों के सौंदर्यीकरण तक कई फैसले
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को लेकर प्रदेश सरकार ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण और भावनात्मक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की पेंशन में बढ़ोतरी की है, बल्कि शहीद स्मारकों के सौंदर्यीकरण, आश्रितों को अतिरिक्त लाभ और रोजगार में प्राथमिकता जैसी घोषणाओं से यह संदेश दिया है कि राज्य निर्माण के संघर्ष को सरकार सम्मान के साथ स्मरण कर रही है।
सरकार द्वारा की गई प्रमुख घोषणा के तहत राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में 1,000 रुपये की वृद्धि की गई है। जेल गए अथवा आंदोलन के दौरान घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन अब 6,000 से बढ़कर 7,000 रुपये कर दी गई है। वहीं, अन्य पात्र आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इसके साथ ही दिव्यांग राज्य आंदोलनकारियों के लिए विशेष राहत देते हुए उनकी पेंशन में बड़ा इजाफा किया गया है, जो अब 20,000 रुपये से बढ़कर 30,000 रुपये प्रतिमाह हो गई है।
सरकार ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों के लिए भी संवेदनशील निर्णय लिया है। शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इस फैसले को आंदोलनकारी परिवारों के लिए आर्थिक संबल के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा प्रदेश के सभी शहीद स्मारकों के सौंदर्यीकरण और नियमित रखरखाव की योजना भी बनाई गई है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि राज्य निर्माण के लिए बलिदान देने वाले शहीदों की स्मृतियों को संरक्षित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। इसी क्रम में शहीद आंदोलनकारियों के नाम पर सरकारी भवनों, संस्थानों और सुविधाओं का नामकरण भी किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को राज्य आंदोलन के इतिहास और संघर्ष से जोड़कर रखा जा सके।
लंबे समय से लंबित पड़े राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण आवेदनों को लेकर भी सरकार ने राहत दी है। वर्ष 2021 तक के लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए छह महीने की अतिरिक्त समय-सीमा बढ़ाई गई है, जिससे अनेक आंदोलनकारियों को पात्रता का लाभ मिल सकेगा।
रोजगार के क्षेत्र में भी आंदोलनकारियों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था पर सरकार काम कर रही है। औद्योगिक इकाइयों में नौकरी के अवसरों में राज्य आंदोलनकारियों को प्राथमिकता देने के लिए नीति स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर पहुंचकर राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान को नमन किया और इन सभी घोषणाओं को दोहराया।
कुल मिलाकर, सरकार के ये निर्णय राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और ऐतिहासिक योगदान को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि नए साल में राज्य आंदोलनकारियों की न सिर्फ पेंशन बढ़ेगी, बल्कि अतिथि गृहों में छूट की सुविधा भी मिलेगी। इसके लिए उन्होंने धामी सरकार का आभार जताया।
उत्तराखंड राज्य के जनक काशीसिंह एरी, वरिष्ठ आंदोलनकारी पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष देवभूमि व्यापार मंडल के केंद्रीय अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर, उक्रांद नेता भुवन जोशी, पूर्व राज्य मंत्री भाजपानेता सुरेश परिहार, कमलेंद्र सेमवाल किच्छा मंडी समिति अध्यक्ष पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष ,पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, संरक्षक धीरेंद्र प्रताप व परिषद अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री द्वारा राज्य आंदोलनकारीयो के पक्ष में की गई घोषणा का स्वागत किया।

1 सितंबर 2021 को शहीद स्मारक खटीमा से की गई घोषणा को लगातार दोहराने और धरातल पर उतारने के प्रयास सराहनीय हैं। यह उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों की दिशा में सकारात्मक पहल है।
— अवतार सिंह बिष्ट
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद


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