

22 फरवरी 2026 को नगर निगम सभागार, रुद्रपुर में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” आत्ममंथन का अवसर भी बना। इंद्रमणि बडोनी के सपनों का उत्तराखंड आज 25 वर्षों बाद कई गंभीर प्रश्नों के बीच खड़ा है।

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट द्वारा आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान” समारोह में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाजसेवा, गौ रक्षा, खेल, पर्यावरण और राज्य की मूल अवधारणा को सशक्त करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस समारोह का उद्देश्य उत्तराखंड राज्य आंदोलन के पुरोधा इंद्रमणि बडोनी की स्मृति को नमन करते हुए राज्य की मूल भावना को जीवित रखना है। परिषद का मानना है कि उत्तराखंड की अवधारणा केवल भौगोलिक राज्य नहीं, बल्कि शिक्षा, सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था, समाज सेवा, गौ संरक्षण, खेल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित थी। सम्मान समारोह के माध्यम से उन व्यक्तियों और संस्थाओं को मंच दिया गया जिन्होंने अपने कार्यों से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, लोक विद्या और जनकल्याण को आगे बढ़ाया। यह आयोजन नई पीढ़ी को भी राज्य निर्माण के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास है।
राज्य निर्माण का मूल मंत्र था—जल, जंगल, जमीन पर पहाड़ का हक, स्थायी राजधानी, पलायन पर रोक, स्थानीय युवाओं को रोजगार और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन। परंतु आज भी पहाड़ खाली हो रहे हैं, बेरोजगारी चरम पर है और शिक्षा माफिया, भू माफिया तथा खनन माफिया के नेटवर्क ने जनविश्वास को आहत किया है। सशक्त भू-अध्यादेश की मांग इसलिए उठ रही है ताकि बाहरी अतिक्रमण और तथाकथित “लैंड जिहाद” जैसे विवादों पर स्पष्ट नीति बने और भूमि संरक्षण सुनिश्चित हो।
राज्य में बढ़ता नशा, यूजीसी, यूसीसी,अवैध खनन और तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार यह संकेत देते हैं कि केवल घोषणाएँ पर्याप्त नहीं। एक सशक्त लोकायुक्त का गठन समय की मांग है, जो उच्च स्तर तक जवाबदेही तय करे। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को मुनाफाखोरी से मुक्त कर जनहित केंद्रित बनाना होगा।
पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा ही राज्य आंदोलन की आत्मा थी। यदि इन मूल उद्देश्यों से विचलन होता है, तो गौरव समारोह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे।
आज आवश्यकता है कि आंदोलन की विरासत को राजनीतिक भाषणों से निकालकर ठोस नीतियों में बदला जाए—तभी 25 वर्षों का सफर सार्थक कहलाएगा और उत्तराखंड सच मायनों में आंदोलनकारियों के सपनों का राज्य बन सकेगा।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारियों ने ₹10,000 मासिक पेंशन लागू करने, अंकित भंडारी व कशिश हत्याकांड में सख्त कार्रवाई, बढ़ती आपराधिक गतिविधियों पर रोक और बाहरी हिस्ट्रीशीटरों को संरक्षण बंद करने की मांग उठाई। नौकरशाही व नेताओं पर भ्रष्टाचार तथा स्थानीय युवाओं के रोजगार में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए।
आंदोलनकारियों ने चेताया कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठे तो प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन होगा। सरकार से सशक्त लोकायुक्त गठन, पुलिस के दुरुपयोग पर रोक, उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। उन्होंने कहा कि राज्य की अस्मिता, सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रुद्रपुर स्थित नगर निगम सभागार में आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” भावनाओं, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बन गया। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों—पौड़ी, पिथौरागढ़, नैनीताल, उधम सिंह नगर, देहरादून, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा—से आए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, सांस्कृतिक कर्मियों और आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता उपस्थित रहे, जबकि देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, आनंद सिंह धामी सहित अनेक विशिष्टजन मंचासीन रहे।
सम्मानित होने वालों में पौड़ी जनपद की रेखा बलूनी प्रमुख रहीं, जो अपने लोकगीतों और कविताओं के माध्यम से पलायन के विरुद्ध जनजागरण कर रही हैं। अल्मोड़ा के अजय परिहार को ‘परिहार एंटरप्राइज’ के तहत गोट फार्मिंग द्वारा रोजगार सृजन के लिए सराहा गया। ‘श्री तेग बहादुर वेलफेयर ट्रस्ट’, ‘जिंदगी जिंदाबाद’ की लवली लंबा, खेल जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागेंद्र शर्मा, सारथी दिव्यांग वेलफेयर सोसाइटी की एडवोकेट संध्या सक्सेना, पर्यावरण संरक्षण के लिए आशुतोष पंत, पर्वतीय समाज समिति के गिरीश चंद्र जोशी एवं उनकी टीम को समाजसेवा के लिए सम्मान मिला।
‘मशरूम लखपति दीदी’ के रूप में प्रसिद्ध जानकी गोस्वामी, विजडम पब्लिक स्कूल के गोपाल सिंह पटवाल, निशानेबाजी में प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले में ईशु डांगी, भारत सिंह डांगी, जवाहर नगर ग्राम प्रधान तारा पांडे, समाजसेवी मोहन पांडे, डॉ. एल.एम. उप्रेती को अंगदान-नेत्रदान जागरूकता के लिए तथा हरविंदर सिंह चुग को रक्तदान शिविरों के लिए प्रेरक भूमिका निभाने पर सम्मानित किया गया। नीलम कांडपाल उद्यमी समाजसेविका, नर सेवा नारायण सेवा एडवोकेट प्रमोद मित्तल, स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी के आंदोलन के साथी स्वर्गीय डीडी मिश्रा की पुत्री रेखा जोशी को दिया गया उत्तराखंड गौरव सम्मान।
ममता जीना, दीपा मटेला, मोहनी बिष्ट, माला देवी स्वयं सहायता समूह, भुवन जोशी (विश्व हिंदू परिषद) और विराट आर्य (गौ रक्षा दल) sardar Bhagat Singh डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रजत बिष्ट और अन्य पदाधिकारी छात्रों एवं छात्र नेताओं का स्वागत सहित अनेक अन्य व्यक्तित्वों को भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट, अनिल जोशी, जिला अध्यक्ष पी.सी. शर्मा, महामंत्री एस.के. नैय्यर और महिला उपाध्यक्ष कांति भाकुनी जानकी जोशी, हेमा बीनवाल ,जानकी गोस्वामी, माधवानंद पांडे, अंबादत जोशी, हीराबल्लभ पांडे, आनंद सिंह कपकोटी पंकज सुयाल, सुदामा प्रसाद बलूनी, आशुतोष पंत दिनेश बम, भुवन चंद्र जोशी विश्व हिंदू परिषद, राधे सनातनी, राजेंद्र प्रसाद, धैर्य, कुलदीप चंद्र, विजय ढौंडियाल , सौरभ गरजोला, गिरीश सिंह तड़ियाल, रेखा जोशी, हरीश मिश्रा, दीपा पटेल, दीपक कुमार चराया, माला देवी, पंकज खर्कवाल, रेनू शर्मा,सहित आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। समारोह ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक नागरिक हैं, जो सेवा, समर्पण और स्वाभिमान की भावना से राज्य के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।




