

9 नवम्बर 2026 से पूर्व कार्रवाई की मांग: राज्य निर्माण की मूल परिकल्पना पर लौटने का आह्वान
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
रुद्रपुर, 22 फरवरी 2026,रुद्रपुर के नगर निगम सभागार में आयोजित सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड की आत्मा का आत्ममंथन था। Uttarakhand State Formation Movement Council की जिला ऊधम सिंह नगर इकाई द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान से जुड़े छह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
सम्मेलन का केंद्रीय भाव स्पष्ट था—राज्य बने 25 वर्ष बीत गए, पर जिन कंधों पर यह राज्य खड़ा हुआ, वे आज भी उपेक्षा का बोझ ढो रहे हैं।
₹10,000 समान मासिक पेंशन: अधिकार, अनुग्रह नहीं
सम्मेलन का पहला प्रस्ताव था—प्रत्येक चिन्हित राज्य आंदोलनकारी को बिना भेदभाव ₹10,000 प्रतिमाह समान पेंशन दी जाए। वक्ताओं ने कहा, यह दान नहीं, बल्कि अधिकार है।
राज्य निर्माण आंदोलन कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान, जंगल-जमीन और स्वाभिमान की लड़ाई थी। यदि स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्रीय सम्मान मिलता है, तो राज्य निर्माण के सेनानियों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा क्यों नहीं?
राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उपेक्षा: संवेदनहीनता का प्रतीक
दूसरे प्रस्ताव में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आयोजनों—स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और 9 नवम्बर राज्य स्थापना दिवस—में आंदोलनकारियों की उपेक्षा पर गहरी नाराज़गी जताई गई।
वक्ताओं ने कहा कि कई बार उन्हें आमंत्रण तक नहीं मिलता, और यदि मिलता है तो बैठने की समुचित व्यवस्था भी नहीं होती। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मानसिकता का प्रश्न है।
अलग काउंटर और प्राथमिकता व्यवस्था की मांग
तीसरा प्रस्ताव व्यावहारिक समस्याओं से जुड़ा था। वरिष्ठ आंदोलनकारी आज भी अस्पतालों, तहसीलों और शासकीय कार्यालयों में लंबी कतारों में खड़े होने को विवश हैं।
परिषद ने सभी सरकारी एवं अर्धशासकीय संस्थानों में अलग काउंटर या प्राथमिकता व्यवस्था लागू करने की मांग की।
“उत्तराखंड के गांधी” की स्मृति में पार्क और प्रतिमा
सम्मेलन का सबसे भावनात्मक प्रस्ताव था—रुद्रपुर में “उत्तराखंड के गांधी” कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी की स्मृति में पार्क/चौक आवंटन और 9 नवम्बर 2026 से पूर्व प्रतिमा स्थापना।
यह मांग केवल एक प्रतिमा की नहीं, बल्कि इतिहास को जीवित रखने की है। यदि नई पीढ़ी अपने नायकों को सार्वजनिक स्थलों पर देखेगी, तभी वह उनके आदर्शों से प्रेरित होगी।
पहचान से वंचित आंदोलनकारियों को न्याय
पांचवें प्रस्ताव में वर्षों से लंबित आवेदनों पर समयबद्ध निर्णय की मांग की गई। “प्राकृतिक न्याय” का सिद्धांत तभी सार्थक होगा जब पात्र व्यक्तियों को समय पर पहचान मिले।
सूचना पट्ट लगाने का प्रस्ताव
हर विकासखंड और तहसील स्तर पर स्थानीय आंदोलनकारियों के नाम और योगदान का सूचना पट्ट लगाने की मांग की गई। इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं, सार्वजनिक स्थलों पर भी दिखाई देना चाहिए।
जंगल, जमीन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और बेरोजगारी: मूल प्रश्न फिर केंद्र में
सम्मेलन में केवल सम्मान और पेंशन की बात नहीं हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा—उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना जिन मुद्दों पर हुई थी, वे आज हाशिए पर हैं।
जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का अधिकार कमजोर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाएं पहाड़ में बदहाल हैं। शिक्षा व्यवस्था सरकारी स्कूलों में गिरती जा रही है। पलायन थमा नहीं, बल्कि तेज हुआ है। बेरोजगारी युवाओं के आत्मविश्वास को तोड़ रही है।
सवाल उठाया गया—क्या राज्य निर्माण केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित रह गया?

सरकारी सरस मेला पर गंभीर प्रश्न
सम्मेलन में सरकारी “सरस मेला” की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठे। आरोप लगाया गया कि सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
दिल्ली, मुरादाबाद, झारखंड और हिमाचल प्रदेश से आए स्टॉल धारकों को स्थान दिया गया, पर स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को अवसर सीमित रहे।
जब दूसरे प्रदेशों के कलाकारों और गायकों को मंच दिया जा सकता है, तो स्थानीय लोक कलाकारों को क्यों नहीं? क्या उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान केवल दर्शक बनकर रह जाएगी?
वक्ताओं ने कहा कि मेले का स्वरूप पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ है। विपक्षी जनप्रतिनिधियों की एंट्री सीमित, पास व्यवस्था पक्ष विशेष के लोगों तक सीमित—यह लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।
मुख्यमंत्री की घोषणा बनाम जमीनी हकीकत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य आंदोलनकारियों को गेस्ट हाउस सुविधा देने की घोषणा का हवाला देते हुए सम्मेलन में कहा गया कि यह सुविधा व्यवहार में छलावा सिद्ध हो रही है।
रुद्रपुर सम्मेलन के लिए सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस को स्वीकृति न मिलने के कारण बाहर से आने वाले कई आंदोलनकारी ठहर नहीं पाए। इसे प्रशासनिक उदासीनता बताया गया।
यूजीसी और स्वर्ण समाज को लेकर आशंका
सम्मेलन में यह भी आशंका व्यक्त की गई कि भविष्य में यूजीसी से संबंधित प्रावधानों का दुरुपयोग कर सामाजिक संतुलन बिगाड़ा जा सकता है। इस विषय पर व्यापक विमर्श और पारदर्शिता की मांग की गई।
नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों पर प्रश्न
सम्मेलन में कई वक्ताओं ने शीर्ष अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाए। आरोप लगाया गया कि जनभावनाओं को दरकिनार कर निर्णय लिए जा रहे हैं।
यह भी कहा गया कि नौकरशाह और जनप्रतिनिधि दोनों ही राज्य निर्माण की मूल भावना से दूर होते जा रहे हैं।
“स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह”: सेवा का उत्सव
सम्मेलन के बाद आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” ने सकारात्मक संदेश भी दिया।
मुख्य अतिथि दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता रहे। देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, आनंद सिंह धामी सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
सम्मानित व्यक्तित्वों में—
लोकसंस्कृति संरक्षण हेतु कार्यरत रेखा बलूनी
स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले अजय परिहार
खेल जगत से नागेंद्र शर्मा
दिव्यांग सेवा में सक्रिय अधिवक्ता संध्या सक्सेना
पर्वतीय समाज समिति के गिरीश चंद्र जोशी
‘मशरूम लखपति दीदी’ जानकी गोस्वामी
शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले गोपाल सिंह पटवाल
रक्तदान एवं अंगदान जागरूकता से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता
विभिन्न जनपदों से आए समाजसेवी, शिक्षाविद, उद्यमी और सांस्कृतिक कर्मी
यह समारोह इस बात का प्रमाण था कि उत्तराखंड की असली शक्ति उसके कर्मशील नागरिक हैं।
संपादकीय दृष्टि: 9 नवम्बर 2026—एक कसौटी
9 नवम्बर 2026 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता की कसौटी है।
यदि उस तिथि से पूर्व—
समान पेंशन लागू होती है,
प्रतिमा और पार्क का नामकरण होता है,
लंबित प्रकरणों का निस्तारण होता है,
सरकारी मेलों में पारदर्शिता आती है,
स्थानीय कलाकारों और युवाओं को प्राथमिकता मिलती है,
तो यह राज्य और आंदोलनकारियों के बीच विश्वास की नई शुरुआत होगी।
अन्यथा, यह असंतोष एक नए आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना जंगल, जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए हुई थी। यदि ये ही मुद्दे हाशिए पर चले जाएं, तो राज्य निर्माण की आत्मा प्रश्नों के घेरे में आना स्वाभाविक है।
रुद्रपुर का यह सम्मेलन एक स्पष्ट संदेश देकर गया है—
सम्मान केवल माल्यार्पण नहीं, नीति और व्यवहार में दिखना चाहिए।
अब निगाहें सरकार पर हैं।
9 नवम्बर 2026 दूर नहीं है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
राज्य निर्माण में योगदान देने वाले प्रत्येक चिन्हित राज्य आंदोलनकारी को बिना भेदभाव ₹10,000 मासिक समान पेंशन प्रदान की जाए। यह उनका अधिकार और सम्मान है!
रुद्रपुर स्थित नगर निगम सभागार में आयोजित “स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मृति उत्तराखंड गौरव सम्मान समारोह” भावनाओं, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बन गया। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों—पौड़ी, पिथौरागढ़, नैनीताल, उधम सिंह नगर, देहरादून, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा—से आए समाजसेवियों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, सांस्कृतिक कर्मियों और आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता उपस्थित रहे, जबकि देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर, आनंद सिंह धामी सहित अनेक विशिष्टजन मंचासीन रहे।
सम्मानित होने वालों में पौड़ी जनपद की रेखा बलूनी प्रमुख रहीं, जो अपने लोकगीतों और कविताओं के माध्यम से पलायन के विरुद्ध जनजागरण कर रही हैं। अल्मोड़ा के अजय परिहार को ‘परिहार एंटरप्राइज’ के तहत गोट फार्मिंग द्वारा रोजगार सृजन के लिए सराहा गया। ‘श्री तेग बहादुर वेलफेयर ट्रस्ट’, ‘जिंदगी जिंदाबाद’ की लवली लंबा, खेल जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागेंद्र शर्मा, सारथी दिव्यांग वेलफेयर सोसाइटी की एडवोकेट संध्या सक्सेना, पर्वतीय समाज समिति के गिरीश चंद्र जोशी एवं उनकी टीम को समाजसेवा के लिए सम्मान मिला।
‘मशरूम लखपति दीदी’ के रूप में प्रसिद्ध जानकी गोस्वामी, विजडम पब्लिक स्कूल के गोपाल सिंह पटवाल, ईशु डांगी, भारत सिंह डांगी, जवाहर नगर ग्राम प्रधान तारा पांडे, समाजसेवी मोहन पांडे, डॉ. एल.एम. उप्रेती को अंगदान-नेत्रदान जागरूकता के लिए तथा हरविंदर सिंह चुग को रक्तदान शिविरों के लिए प्रेरक भूमिका निभाने पर सम्मानित किया गया। नीलम कांडपाल उद्यमी, ममता जीना, दीपा मटेला, मोहनी बिष्ट, माला देवी स्वयं सहायता समूह, भुवन जोशी (विश्व हिंदू परिषद) और विराट आर्य (गौ रक्षा दल) sardar Bhagat Singh डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रजत बिष्ट और अन्य पदाधिकारी छात्रों एवं छात्र नेताओं का स्वागत सहित अनेक अन्य व्यक्तित्वों को भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम में परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट, प्रदेश महासचिव देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति के अध्यक्ष अनिल जोशी, जिला अध्यक्ष पी.सी. शर्मा, महामंत्री एस.के. नैय्यर और महिला उपाध्यक्ष कांति भाकुनी सहित आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। समारोह ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक नागरिक हैं, जो सेवा, समर्पण और स्वाभिमान की भावना से राज्य के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।




