ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा. इजरायल ने अपने हमले थामने के बजाय और तेज कर दिए हैं. खासतौर पर दक्षिणी लेबनान में लगातार एयरस्ट्राइक जारी हैं, जिससे हालात और ज्यादा संवेदनशील बन गए हैं.

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इसी बीच इजरायली सेना ने हालिया सैन्य कार्रवाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया है. सेना की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के दौरान 40 दिनों में बड़े पैमाने पर हमले किए गए. इस ऑपरेशन में करीब 18,000 बम गिराए गए और 4,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये हमले रणनीतिक और सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित थे, जिनका मकसद ईरान की क्षमताओं को कमजोर करना था. हालांकि, इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. इजरायली सेना ने अपने हालिया सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ को लेकर बड़े दावे किए हैं. सेना के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन के दौरान वायु सेना ने 8,500 से अधिक उड़ानें भरीं, जिनमें 1,000 से ज्यादा मिशन सीधे ईरान की सीमा के भीतर जाकर अंजाम दिए गए. आईडीएफ (IDF) का कहना है कि इस अभियान में करीब 4,000 ठिकानों को निशाना बनाया गया. हवाई हमलों की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल मिलाकर 10,800 से ज्यादा स्ट्राइक पॉइंट्स पर हमले किए गए. इनमें से 6,700 से अधिक लक्ष्य ईरान के सैन्य ढांचे से जुड़े अहम ठिकाने बताए गए हैं.

‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ में IDF ने गिराए 18,000 बम

इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि इस अभियान के दौरान ईरान में 18,000 से ज्यादा बम गिराए गए. इन आंकड़ों को पेश करते हुए सेना ने ऑपरेशन को अपनी बड़ी रणनीतिक कार्रवाई बताया है, जिसने दुश्मन के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम मोड़ आया है. बुधवार को दोनों देशों ने 2 हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति जताई, जिससे फिलहाल टकराव पर अस्थायी विराम लग गया है. इस कदम को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक शुरुआती कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी निगाहें

अब निगाहें शनिवार पर टिकी हैं, जब पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीद है. अगर ये बातचीत आगे बढ़ती है, तो लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. सीजफायर के दौरान ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने उसकी 10 प्रमुख शर्तों को मान लिया है. इसी आधार पर तेहरान खुद को इस टकराव में मजबूत स्थिति में और अपनी जीत के करीब बता रहा है. वहीं, दूसरी तरफ इजरायल का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. उसका कहना है कि हालिया हमलों में ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है. खासकर मिसाइल निर्माण, रक्षा ढांचे और सैन्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है.

मौजूदा सीजफायर स्थायी समाधान नहीं- IDF

इजरायली अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा सीजफायर स्थायी समाधान नहीं, बल्कि एक अस्थायी विराम है. उनके मुताबिक, यह दोनों पक्षों को हालात संभालने और आगे की रणनीति तय करने का समय देता है. इसी दौरान इजरायल अपने इंटरसेप्टर सिस्टम को मजबूत करने और हथियारों के भंडार को फिर से भरने में जुटा हुआ है. साथ ही, इजरायल ने साफ संकेत दिया है कि उत्तर दिशा में हिज़्बुल्लाह से मिलने वाली चुनौतियों को लेकर उसकी कार्रवाई रुकेगी नहीं. यानी सीजफायर के बावजूद, सुरक्षा के मोर्चे पर उसकी तैयारी और सतर्कता लगातार जारी रहेगी.


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