पत्नी को तलाक, जमीन बेची… और अंत में प्रेमिका को गोली?ऋषिकेश महिला हत्याकांड: जब प्रेम जिद बन गया और जिद ने जान ले ली

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ऋषिकेश।प्रेम अगर समझ और सहमति से बाहर निकल जाए, तो वह आस्था नहीं—आसक्ति बन जाता है। और जब आसक्ति जिद में बदल जाए, तो उसका अंजाम अक्सर हिंसा होता है। ऋषिकेश में 35 वर्षीय महिला प्रीति रावत की हत्या इसी खतरनाक मनोवृत्ति की भयावह मिसाल बन गई है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


दून पुलिस ने इस सनसनीखेज महिला हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी सुरेश गुप्ता को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले चार वर्षों से मृतका के साथ प्रेम संबंध में था और जब शादी से साफ इनकार हुआ, तो उसने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
कोरोनाकाल में शुरू हुआ प्रेम, जुनून में बदला रिश्ता
पुलिस जांच में सामने आया है कि कोरोनाकाल के दौरान प्रीति रावत और सुरेश गुप्ता के बीच नजदीकियां बढ़ीं। बातचीत, सहारा और भावनात्मक जुड़ाव धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गया। लेकिन यह रिश्ता सामान्य नहीं रहा—यह एकतरफा जुनून में तब्दील हो गया।
आरोपी सुरेश गुप्ता इस कदर शादी को लेकर जुनूनी हो गया कि उसने
अपनी पत्नी से आपसी सहमति से तलाक ले लिया
बच्चों से दूरी बना ली
और यहां तक कि अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी
उसका पूरा जीवन अब एक ही लक्ष्य पर टिक गया था—प्रीति से शादी।
शादी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि सुरेश गुप्ता ऋषिकेश में मकान तलाश रहा था ताकि शादी के बाद वहीं बस सके। उसने अपनी जमा पूंजी प्रीति पर खर्च की, भविष्य के सपने बुने और खुद को पूरी तरह इस रिश्ते में झोंक दिया।
शुरुआत में प्रीति और उसके परिजनों की ओर से शादी को लेकर संकेत और आश्वासन दिए गए, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। प्रीति ने साफ शब्दों में शादी से इनकार कर दिया।
यहीं से यह प्रेम कहानी टूटने लगी, और आरोपी के भीतर असंतुलन गहराता चला गया।
अस्वीकृति ने तोड़ा मानसिक संतुलन
पत्नी से अलगाव, बच्चों से दूरी, समाज में पहचान का संकट और अब प्रेमिका का इनकार—इन सबने आरोपी को मानसिक रूप से तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, वह अंदर ही अंदर घुटता रहा और अपनी असफलताओं का दोष प्रीति पर डालने लगा।
यही वह मोड़ था, जहां प्रेम ने हिंसक रूप ले लिया।
अवसाद की रात, घर पहुंचा और चला दी गोली
31 जनवरी 2026 की रात, सुरेश गुप्ता प्रीति के घर पहुंचा। एक बार फिर उसने शादी की बात उठाई। प्रीति ने दो टूक शब्दों में इनकार कर दिया।
बस इसी पल, आरोपी ने अपनी जेब से तमंचा निकाला और प्रीति को गोली मार दी।
मौके पर ही प्रीति की मौत हो गई, और आरोपी फरार हो गया।
एक जिद्दी प्रेमी पल भर में हत्यारा बन चुका था।
पुलिस की तेज कार्रवाई, सहारनपुर से गिरफ्तारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून स्वयं मौके पर पहुंचे। कई पुलिस टीमें गठित की गईं।
सीसीटीवी फुटेज
सर्विलांस
मुखबिर तंत्र
की मदद से आरोपी को छुटमलपुर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
सवाल जो समाज से पूछता है यह हत्याकांड
यह सिर्फ एक हत्या नहीं है—यह चेतावनी है।
क्या प्रेम के नाम पर किसी की जिंदगी पर अधिकार जताया जा सकता है?
क्या शादी से इनकार करना किसी के लिए मौत की सजा बन सकता है?
और क्या समाज अब भी ऐसे जुनूनी रिश्तों को समय रहते पहचानने में असफल रहेगा?
प्रेम नहीं, यह स्वामित्व की मानसिकता थी
ऋषिकेश महिला हत्याकांड यह साफ कर देता है कि यह लव स्टोरी नहीं थी, बल्कि स्वामित्व, जिद और अहंकार की कहानी थी।
जहां “ना” को स्वीकार करने की क्षमता नहीं थी, और उसी अस्वीकार्यता ने एक निर्दोष महिला की जान ले ली।
प्रीति अब वापस नहीं आएगी, लेकिन यह घटना समाज, परिवार और कानून—तीनों के लिए एक कड़ा सबक जरूर छोड़ गई है।


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