अप्रैल से उत्तराखंड में ‘डबल अटैक’—बिजली और पानी दोनों महंगे, मध्यमवर्ग पर बढ़ेगा बोझ

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रुद्रपुर,देहरादून। उत्तराखंड के मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अप्रैल का महीना महंगाई का नया झटका लेकर आ रहा है। 1 अप्रैल से प्रदेश में बिजली और पानी की दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होने जा रही है, जिससे आम आदमी के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ेगा। रसोई से लेकर बाथरूम तक खर्च बढ़ने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


पानी की दरों में वृद्धि तय, हर वर्ग प्रभावित
जल संस्थान ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पानी के बिल में 9 प्रतिशत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 15 प्रतिशत तक वृद्धि का निर्णय लिया है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। शहरी क्षेत्रों में जहां औसतन 360 रुपये मासिक बिल अब बढ़कर करीब 373 रुपये हो जाएगा, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह राशि 117 रुपये से बढ़कर 121 रुपये प्रति माह हो जाएगी। विभाग के अनुसार यह बढ़ोतरी 2013 के बेस रेट पर आधारित वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा महंगाई के दौर में इसका असर ज्यादा महसूस किया जाएगा।
बिजली दरों में भी बढ़ोतरी के संकेत
पानी के बाद बिजली उपभोक्ताओं को भी झटका लग सकता है। ऊर्जा निगम (UPCL) ने नियामक आयोग के समक्ष करीब 16.23 प्रतिशत टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। 31 मार्च को नई दरों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि चुनावी वर्ष को देखते हुए सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत देने की कोशिश कर सकती है, लेकिन पूरी तरह बढ़ोतरी टलने की संभावना कम है।
सरचार्ज और FPPCA का अतिरिक्त भार
बिजली दरों के साथ-साथ ‘फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजेस्टमेंट’ (FPPCA) के तहत अतिरिक्त शुल्क भी लागू हो सकता है। इसके अलावा ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं पर 1.05 रुपये प्रति यूनिट सरचार्ज लगाने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में भी बिजली दरों में 5.62 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी।
आम आदमी पर सीधा असर
बिजली और पानी दोनों की दरों में एक साथ बढ़ोतरी से मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यक सेवाओं के महंगे होने से घरेलू खर्चों में कटौती की नौबत आ सकती है।
नियामक आयोग की अंतिम मुहर बाकी
फिलहाल सभी की निगाहें नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं। आयोग द्वारा दरों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आम जनता को कितनी राहत मिलेगी या कितना अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।


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