

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस तरह के प्रयास डेमोग्राफी चेंज की साजिश हैं, जिसे किसी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। पूरे प्रकरण की सघन जांच की जा रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
यह पता लगाया जा रहा है कि शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट ने यह जमीन किन लोगों को और कैसे बेची। भू-नियमों का कहां-कहां उल्लंघन हुआ। कहा, सैन्य क्षेत्र के पास अवैध कालोनी काटकर सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
पहले 15 व्यक्तियों को बेचे बड़े भूखंड, फिर 80 खरीदारों को छोटे प्लाट
उधर शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ कृषि भूमि को अवैध तरीके से बेचने के प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शेखुल हिंद ट्रस्ट ने 20 एकड़ कृषि भूमि को 15 व्यक्तियों को बड़े भूखंड के रूप में बेच दिया। इन 15 व्यक्तियों ने कृषि भूमि पर कालोनी काटकर लगभग 80 खरीदारों को छोटे साइज के प्लाट बेच दिए।
डीएम सविन बंसल की ओर से प्रकरण में जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 166/167 के तहत जमीन खरीदने-बेचने वालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
डीएम सविन बंसल ने कहा, इस अधिनियम के तहत ही संपूर्ण जमीन को सरकार में निहित करने की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
धारा 166-167 में शून्य हो जाता अवैध भूमि हस्तांतरण
उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 166 और 167 अवैध भूमि हस्तांतरण से संबंधित है। धारा 166 के तहत यदि कोई भूमि नियमों के विरुद्ध बेची गई है, तो वह हस्तांतरण स्वतः ही शून्य मान लिया जाता है।
वहीं धारा 167 के अंतर्गत, ऐसी शून्य घोषित भूमि राज्य सरकार में निहित कर ली जाती है। इसके तहत जिलाधिकारी को अधिकार है कि ऐसी भूमि को कब्जे में ले सकते हैं।
यह है पूरा मामला
ग्राम हरियावाला धौलास पछुवादून परगना विकासनगर में 20 एकड़ कृषि भूमि पर मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान स्थापित होना था। इसमें अवरोध आने पर जमीन को बेचने की अनुमति हाइकोर्ट ने सशर्त दी थी।
इसमें उल्लेखित था कि भूमि का प्रयोग कृषि के अलावा किसी कार्य के लिए नहीं हो सकेगा। इसके बावजूद भूमि पर आबादी बसाने के लिए प्लाटिंग की गई। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार इससे सुरक्षा को खतरा हो सकता था।




