

दिल्ली के किशोर रेहान को उसके ही दोस्तों ने केवल इसलिए चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वह इंस्टाग्राम पर उनके वीडियो पर कमेंट करता था। इस मामूली सी बात को इतनी घातक शक्ल दी गई कि दोस्त, दुश्मन बन बैठे। क्या अब कोई इंस्टाग्राम पर कमेंट करने की भी कीमत अपनी जान देकर चुकाएगा?
सोचिए, 21वीं सदी का युवा जो तकनीक से लैस है, सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय है, वह आज इतनी असहिष्णुता से भर चुका है कि एक टिप्पणी को “अपमान” समझकर हत्या तक करने को तैयार हो जाता है। सोशल मीडिया: अभिव्यक्ति का माध्यम या हत्या का बहाना?
इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अभिव्यक्ति की आज़ादी के प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन आज ये ही मंच “ईगो”, “वर्चुअल पावर” और “फॉलोअर्स की राजनीति” का अखाड़ा बन चुके हैं। किसी के पोस्ट पर टिप्पणी करना, किसी फोटो को लाइक करना या न करना — ये बातें अब ‘इज्ज़त’ और ‘अपमान’ के स्तर तक पहुंच चुकी हैं।
क्या युवाओं में सहनशीलता खत्म हो गई है?रेहान और उसके हत्यारों की उम्र करीब-करीब समान थी। वे एक ही कॉलोनी में रहते थे, साथ खाते-पीते और घूमते थे। लेकिन आभासी दुनिया में एक वर्चुअल कमेंट ने उनके बीच ऐसी खाई पैदा कर दी कि तीनों दोस्तों ने मिलकर हत्या की योजना रची। उन्होंने पहले घूमने का बहाना बनाया, फिर खेत में ले जाकर चाकुओं से वार कर रेहान की निर्ममता से हत्या कर दी। यह क्रूरता सिर्फ अपराध नहीं, समाज के पतन का प्रतीक है।
सोशल मीडिया के दुष्परिणाम:आभासी जीवन का प्रभाव: लोग अपने असली जीवन को छोड़कर सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में जीने लगे हैं।डिजिटल ईगो: लाइक, कमेंट, फॉलोअर्स से बनती है आभासी ‘प्रतिष्ठा’, जिसे कोई नकारे तो लोग बर्दाश्त नहीं कर पाते।गिरता मानसिक स्वास्थ्य: नशे और सोशल मीडिया की लत, दोनों ने युवाओं को संवेदनहीन और हिंसक बना दिया है।अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला: अगर कमेंट करना मौत का कारण बन जाए, तो यह हमारे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला है।
प्रेरणा क्या लें हम?इस घटना से हम सबको आत्ममंथन करना होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि हम किसी की निजी सीमाएं लांघें, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि असहमति या आलोचना को हम हिंसा से जवाब दें।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका:संवेदनशील संवाद: बच्चों को बताएं कि सोशल मीडिया एक मंच है, युद्ध का मैदान नहीं।डिजिटल नैतिकता की शिक्षा: स्कूलों में डिजिटल नागरिकता, सोशल मीडिया शिष्टाचार जैसे पाठ अनिवार्य हों।मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान: युवा पीढ़ी को गुस्से और असहिष्णुता से बाहर निकालना अब जरूरी हो गया है।
पुलिस की तत्परता प्रशंसनीय?पुलिस ने महज 10 घंटे में इस जघन्य अपराध का खुलासा कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। साथ ही हत्या में प्रयुक्त चाकू और घटनास्थल से आलाकत्ल बरामद कर यह साबित किया कि कानून की पकड़ तेज और सजग है। इसके लिए एसीपी सिद्धार्थ गौतम और उनकी टीम प्रशंसा की पात्र है।
रेहान को श्रद्धांजलि:?एक किशोर जिसने सिर्फ इंस्टाग्राम पर प्रतिक्रिया दी थी, वह आज इस दुनिया में नहीं है। यह खबर सिर्फ एक अपराध नहीं, हमारी सामाजिक चेतना पर तमाचा है। रेहान की असमय और अमानवीय हत्या पर पूरा देश शोक में है। हम उसके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।
सोशल मीडिया एक ताकत है — लेकिन अगर इस ताकत का सही दिशा में उपयोग न किया जाए, तो यह नशा, ईगो और हिंसा में बदल सकती है। हमें युवाओं को इस डिजिटल जाल से बचाना होगा और समाज को एक बार फिर से मानवीयता, सहनशीलता और संवाद की ओर ले जाना होगा।
रेहान की मौत एक चेतावनी है — कि अब हमें रुकना होगा, समझना होगा और सिखाना होगा कि सोशल मीडिया ज़िंदगी का विकल्प नहीं, सिर्फ एक माध्यम है।





