संपादकीय ;अल्मोड़ा जिला अस्पताल में आयुर्वेदिक व्यवस्था सुदृढ़ — आरटीआई कार्यकर्ता संजय पाण्डे की जिद ने बदली तस्वीर

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हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की भूमिका,अल्मोड़ा के पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में बीते कुछ महीनों में जो परिवर्तन देखने को मिला है, वह प्रशासनिक ईमानदारी, जनदबाव और आरटीआई (सूचना का अधिकार) की शक्ति का ज्वलंत उदाहरण है। यह परिवर्तन किसी सरकारी घोषणा या राजनीतिक भाषण का परिणाम नहीं, बल्कि एक आम नागरिक — सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता संजय पाण्डे — की अथक कोशिशों का नतीजा है।

कक्ष संख्या-9 बना जनविश्वास का प्रतीक

अल्मोड़ा जिला अस्पताल के परिसर में स्थित कक्ष संख्या-9, जहां जिला आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित है, अब अपने नए रूप में दिखाई दे रहा है। पहले जहां मरीजों को आयुर्वेदिक दवाइयों के अभाव में निराश लौटना पड़ता था, वहीं अब दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता और नियमित ओपीडी व्यवस्था ने मरीजों का भरोसा लौटाया है। वरिष्ठ आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. गीता पुनेठा इस कक्ष में प्रतिदिन मरीजों का समर्पित भाव से उपचार कर रही हैं, और आंकड़े बताते हैं कि हाल के दिनों में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

🔹 आरटीआई और जनशिकायतों का असर

इस सुधार के पीछे एक लम्बा संघर्ष छिपा है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने जिला अस्पताल की आयुर्वेदिक व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी और दो चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दस्तावेज़ी प्रमाण भी पेश किए। इन शिकायतों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी — मामला न केवल जिलाधिकारी कार्यालय, बल्कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, आयुष सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया।

परिणामस्वरूप, संबंधित जिलाधिकारी का स्थानांतरण हुआ और दो चिकित्सकों पर विभागीय जांच प्रारंभ की गई। यह सब कुछ बिना किसी राजनीतिक समर्थन या मंचीय शोर के — एक सामान्य नागरिक की वैधानिक कोशिशों से संभव हुआ।

‘सचिव का खास आदमी’ — व्यवस्था की विडंबना

यह भी उल्लेखनीय है कि जिन चिकित्सकों पर अनियमितताओं के आरोप लगे, वे स्वयं को “सचिव का खास आदमी” बताकर प्रभाव दिखाने की कोशिश करते रहे। लेकिन इस बार यह सत्ता-संरक्षित जाल ज्यादा देर नहीं टिक सका। आयुष निदेशालय ने अब अल्मोड़ा के लिए नए आयुर्वेदिक अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ कर दी है, जिससे स्पष्ट है कि फाइलों में अब ठहराव नहीं, बल्कि कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की भूमिका

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स ने इस पूरे मामले को लगातार मुद्दा बनाए रखा। जब बाकी मीडिया संस्थान खामोश थे, तब हमारे संवाददाताओं ने संजय पाण्डे की शिकायतों को जनता के बीच रखा। यही निरंतरता प्रशासन पर जनदबाव का कारण बनी। आज जब अस्पताल में दवाइयाँ भरपूर मात्रा में हैं, मरीज संतुष्ट हैं और नई नियुक्तियाँ हो रही हैं — तब यह कहना गलत नहीं होगा कि पत्रकारिता के हस्तक्षेप से जनसरोकारों को फिर से दिशा मिली है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा का पुनर्जागरण

आधुनिक युग में जहाँ एलोपैथिक उपचार को ही मुख्यधारा माना जाता है, वहाँ आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का इस तरह सशक्त होना एक शुभ संकेत है। यह न केवल भारतीय चिकित्सा परंपरा का सम्मान है, बल्कि स्थानीय जनमानस के लिए सुलभ, सस्ती और प्रभावी चिकित्सा का विकल्प भी है। संजय पाण्डे का यह संघर्ष केवल एक कमरे या दवा आपूर्ति तक सीमित नहीं — यह जनहित में पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल है।

नागरिकों के लिए प्रेरणा

संजय पाण्डे ने अपने वक्तव्य में कहा है —

“मैंने सिर्फ वही किया जो एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम चुप रहेंगे तो व्यवस्था भ्रष्टाचार की जड़ में समा जाएगी।”

उनका यह कथन इस दौर में अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ शिकायतें अक्सर ‘कानूनी उलझनों’ में दम तोड़ देती हैं। परंतु आरटीआई के सही प्रयोग और मीडिया की सक्रियता ने साबित कर दिया कि एक सच्चे इरादे वाला नागरिक भी व्यवस्था बदल सकता है।


अवतार सिंह बिष्ट,अल्मोड़ा जिला अस्पताल का यह परिवर्तन हमें यह सिखाता है कि बदलाव सरकारें नहीं, साहसी नागरिक लाते हैं। कक्ष संख्या-9 आज सिर्फ एक कमरा नहीं, बल्कि जनसंकल्प, पारदर्शिता और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक बन चुका है।

– अवतार सिंह बिष्ट
वरिष्ठ संपादकीय लेखक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स



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