

आगामी मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के मद्देनज़र उत्तराखंड शासन के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर गहन तैयारी की जा रही है। सचिवालय में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही, जिसमें राज्य के विभिन्न विभागों को अपने-अपने एजेंडे स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और तर्कसंगत रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
मुख्य सचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे सभी विभाग जिनका एजेंडा अब तक अप्राप्त है, वे तुरंत अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि हर प्रस्ताव में उस विषय का संक्षिप्त किन्तु सटीक विवरण हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि केंद्र सरकार से किस बिंदु पर सहयोग या संशोधन अपेक्षित है। यह निर्देश केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को सशक्त करने की एक रणनीतिक पहल कही जा सकती है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस दिशा-निर्देश दिए गए। समाज कल्याण विभाग को “जौनसारी/जेनसारी” शब्द की वर्तनी से जुड़े प्रकरण पर अनुसूचित जनजाति मंत्रालय से संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। यह मामला केवल एक भाषाई सुधार नहीं, बल्कि जनजातीय पहचान और अस्मिता से जुड़ा संवेदनशील विषय है। साथ ही, यदि विधायिका स्तर पर संशोधन आवश्यक हो तो विधिक राय लेने की बात भी कही गई — यह प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है।
मुख्य सचिव ने आगे समाज कल्याण विभाग को भोटिया और राजी जनजाति के लिए पिथौरागढ़ जनपद में एक-एक एकलव्य आदर्श विद्यालय की स्थापना का एजेंडा तैयार करने को कहा। जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का सशक्तिकरण राज्य के सामाजिक संतुलन के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल करने के निर्देश दिए गए — यह समाज के कमजोर तबके के प्रति सरकार की जिम्मेदारी का द्योतक है।
ग्राम्य विकास विभाग को SECC (Socio-Economic and Caste Census) डेटा के स्थान पर नए और अधिक व्यवहारिक मानक तैयार करने का सुझाव तैयार करने को कहा गया। इस पहल से राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा और सटीकता दोनों बढ़ सकेंगी।
बैठक में आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, पेयजल और सिंचाई विभागों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गईं। आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के मानक और धनराशि में बढ़ोतरी का विषय एजेंडे में प्रमुख रहेगा। यह उत्तराखंड जैसे संवेदनशील भूगोल वाले राज्य के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जहां हर वर्ष प्राकृतिक आपदाएं जनजीवन और बुनियादी ढांचे पर गंभीर प्रभाव डालती हैं।
परिवहन विभाग को RRTS (Regional Rapid Transit System) को मोदीनगर-Meerut से हरिद्वार तक विस्तारित किए जाने का एजेंडा तैयार करने के निर्देश मिले — यह कदम हरिद्वार, देहरादून, और ऋषिकेश जैसे धार्मिक-पर्यटन केंद्रों के आर्थिक जीवन में नई गति ला सकता है। साथ ही, टनकपुर-बागेश्वर और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं में सड़क निर्माण प्रावधान को भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
इसी क्रम में कृषि विभाग को मंडी शुल्क से संबंधित प्रकरण का एजेंडा तैयार करने के निर्देश दिए गए, जो राज्य के किसानों और व्यापारिक मंडियों की आर्थिक स्थिति से सीधा जुड़ा मुद्दा है।
बैठक में सचिव श्री सचिन कुर्वे, श्री विनोद कुमार सुमन, श्री वी.वी.आर. पुरुषोत्तम और श्री बृजेश संत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह बैठक केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य के विकास, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय समानता की दिशा में एक सामूहिक सोच का प्रतीक रही। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की नेतृत्व शैली में समन्वय, प्राथमिकताओं की स्पष्टता और परिणामपरकता झलकती है।
आगामी मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में यदि उत्तराखंड अपने इन एजेंडों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है, तो यह राज्य के भौगोलिक सीमाओं से परे, नीति निर्माण के केंद्रों में भी उसकी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएगा — यही किसी उत्तरदायी शासन की असली पहचान है।




