संपादकीय एसटीएफ अधिकारी बनकर आरपीएफ भर्ती के नाम पर 6.35 लाख की ठगी: सिस्टम की कमजोरी या जनता की मजबूरी?

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रुद्रपुर सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर ठगी करने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामला रुद्रपुर के फुलसुंगा क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ खुद को एसटीएफ अधिकारी बताने वाले एक शातिर जालसाज ने आरपीएफ में भर्ती कराने का झांसा देकर 6 लाख 35 हजार रुपये की ठगी कर ली। यह घटना न सिर्फ साइबर अपराधियों की बढ़ती हिम्मत को उजागर करती है, बल्कि हमारी व्यवस्था और जागरूकता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


गणेश गार्डन फुलसुंगा निवासी रामेश्वर सिंह के अनुसार, 3 फरवरी 2025 को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल कर स्वयं को “एसटीएफ अधिकारी नीरज यादव” बताया। प्रभाव जमाने के लिए उसने यह भी दावा किया कि उसका भाई दिल्ली में आरपीएफ का महानिदेशक है। सरकारी ओहदे और रिश्तों की आड़ में उसने भर्ती दिलाने का भरोसा दिलाया और दस्तावेज़ मंगवा लिए। इसके बाद पंजीकरण, फाइल आगे बढ़ाने और विभागीय प्रक्रियाओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रकम ऐंठता रहा।
पीड़ित ने विश्वास में आकर गूगल पे के माध्यम से कुल 6.35 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब महीनों बाद भी नौकरी नहीं लगी और आरोपी ने फिर से पैसों की मांग की, तब ठगी का एहसास हुआ। अब साइबर सेल में तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक खाते की ट्रेसिंग की जा रही है।
यह मामला बताता है कि कैसे फर्जी पहचान, सरकारी पदों का नाम और डिजिटल भुगतान का दुरुपयोग कर आम लोगों को ठगा जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक बेरोजगारी की मजबूरी का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह फलते-फूलते रहेंगे? जरूरत है कि पुलिस जांच को तेज़ी से अंजाम तक पहुँचाए, ठगों की संपत्ति सीज़ हो और पीड़ितों की रकम वापस दिलाई जाए। साथ ही, जनता को यह भी समझना होगा कि सरकारी भर्ती किसी “व्हाट्सएप कॉल” या निजी भुगतान से नहीं होती


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